उत्तराखंड में निवेश के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप: धामी सरकार पर बरसे राहुल गांधी, निवेशकों की सूची मांगकर घेरा
राहुल गांधी ने उत्तराखंड की धामी सरकार पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश संबंधी आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू और एक लाख करोड़ रुपये के जमीन पर उतरे निवेश के दावे पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने निवेशकों की सूची में छोटी दुकानों, क्लीनिकों और एक स्कूल को शामिल किए जाने का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से सभी 3,300 निवेशकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।
विस्तार
उत्तराखंड में निवेश के नाम पर धामी सरकार का फ़र्ज़ीवाड़ा - और यह BJP ‘डबल इंजन' मॉडल का एक और नमूना है। Global Investors Summit का ढिंढोरा पीटा गया: 1,779 MoU, ₹3.56 लाख करोड़। रोडशो पर जनता के लगभग ₹100 करोड़ ख़र्च हुए | फिर सरकार ने ₹1 लाख करोड़ को "ज़मीन पर उतरा निवेश" बताया। Newslaundry ने जाँचा कि यह निवेश किसका है: * आटा चक्कियाँ, खाद-बीज की दुकानें और छोटे क्लीनिक "निवेशक" गिन लिए गए। कुछ को पता तक नहीं था। * ₹35,279 करोड़ - यानी 35% - सरकारी बिजली कंपनियों के हैं। * CSR और दान से चलने वाले एक स्कूल को ₹24.49 करोड़ का "निवेशक" बताया गया। * ₹1,200 करोड़ के "निवेशक" की कमाई चार साल से शून्य है, और रिकॉर्ड में उसका एक भी कर्मचारी नहीं। * दुबई-लंदन के रोडशो से ₹27,975 करोड़ का दावा हुआ, पर "ज़मीन पर उतरे" निवेशकों की सूची में इन दोनों शहरों की एक भी कंपनी नहीं। और समिट से सिर्फ़ सात दिन पहले, 1 दिसंबर 2023 को, "निवेश" की परिभाषा ही ढीली कर दी गई। इसे कहते हैं: पहले नियम बदलो, फिर आँकड़े बताओ। मुख्यमंत्री 3,300 "निवेशकों" की पूरी सूची सार्वजनिक करें। निवेश कागज़ पर। रोज़गार नारों में। और उत्तराखंड के युवाओं के हिस्से - पेपर लीक। @newslaundry @Basantrajsonu https://t.co/Iz2ZtQWycQ
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 18, 2026विज्ञापन
निवेशकों की सूची पर राहुल गांधी ने सवाल क्यों उठाए?
राहुल गांधी के मुताबिक, निवेशकों की सूची में आटा चक्कियों, खाद-बीज की दुकानों और छोटे क्लीनिकों को भी शामिल किया गया। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कुछ लोगों को यह तक पता नहीं था कि उन्हें निवेशक के रूप में गिना गया है। राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार के निवेश संबंधी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप राहुल गांधी की ओर से पेश किए गए हैं।
निवेश के आंकड़ों में सरकारी कंपनियों और स्कूल का क्या जिक्र है?
राहुल गांधी ने दावा किया कि निवेश के आंकड़ों में 35,279 करोड़ रुपये सरकारी बिजली कंपनियों के हैं। यह कथित तौर पर जमीन पर उतरे निवेश के एक लाख करोड़ रुपये के दावे का करीब 35 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) और दान से चलने वाले एक स्कूल को 24.49 करोड़ रुपये का निवेशक बताया गया। राहुल गांधी ने इन उदाहरणों के जरिये सरकार के निवेश संबंधी दावों पर सवाल उठाए।
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1,200 करोड़ के निवेशक और दुबई-लंदन के रोडशो पर क्या सवाल हैं?
राहुल गांधी के मुताबिक, 1,200 करोड़ रुपये के निवेशक के रूप में दर्ज एक कंपनी की चार साल से कोई कमाई नहीं हुई है। उनके दावे के अनुसार, रिकॉर्ड में इस कंपनी का एक भी कर्मचारी नहीं है। उन्होंने दुबई और लंदन में आयोजित रोडशो से 27,975 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किए जाने पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि जमीन पर उतरे निवेशकों की सूची में इन दोनों शहरों की एक भी कंपनी शामिल नहीं है।
निवेश की परिभाषा में बदलाव और युवाओं के रोजगार पर क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने दावा किया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से सिर्फ सात दिन पहले, एक दिसंबर 2023 को निवेश की परिभाषा में बदलाव किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले नियमों में ढील दी गई और फिर निवेश के आंकड़े पेश किए गए। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से सभी 3,300 निवेशकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने उत्तराखंड में रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि निवेश कागजों पर है, रोजगार नारों में है और राज्य के युवाओं के हिस्से में पेपर लीक आ रहे हैं।