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बदलाव: फर्स्ट AC में अब कंबल की जगह मिलेंगे फूलों वाले कंफर्टर, रेलवे ने इस ट्रेन से की शुरुआत
Mon, 12 Oct 2026 08:34 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 12 Oct 2026 08:34 PM IST
रेलवे ने पिछले साल एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए कंबल पर कवर देने की पहल भी शुरू की थी। यात्रियों की लंबे समय से मांग थी कि ट्रेनों में दिए जाने वाले कंबलों की भी चादर और तकिये के कवर की तरह नियमित सफाई हो।
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रेलवे ने किया बदलाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को अब ज्यादा आरामदायक और स्वच्छ यात्रा का अनुभव मिलेगा। पूर्वी रेलवे ने ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में सामान्य कंबल की जगह फूलों की डिजाइन वाले कंफर्टर देने का फैसला किया है। यह सुविधा 11 अक्टूबर 2026 से शुरू की गई है। भारतीय रेलवे ने यह पहल दुर्गा पूजा के त्योहार को देखते हुए की है।
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हर फेरे के बाद धुलेंगे और सैनिटाइजर होंगे कंफर्टर
पूर्वी रेलवे के मुताबिक, इसका उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा के दौरान यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और उनके सफर को अधिक आरामदायक बनाना है। इन कंफर्टर को हर राउंड ट्रिप के बाद अच्छी तरह धोया और सैनिटाइज किया जाएगा। इससे इनकी साफ-सफाई बनी रहेगी और यात्रियों को हर बार साफ कंफर्टर मिलेंगे।
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ट्रेनों में कंबल के कवर देने की भी हुई थी शुरुआत
इससे पहले रेलवे ने पिछले साल एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए कंबल पर कवर देने की पहल भी शुरू की थी। यात्रियों की लंबे समय से मांग थी कि ट्रेनों में दिए जाने वाले कंबलों की भी चादर और तकिए के कवर की तरह नियमित सफाई हो। आमतौर पर कंबलों को हर यात्रा के बाद नहीं धोया जाता, बल्कि महीने में एक या दो बार साफ किया जाता है। इस समस्या को दूर करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए रेलवे ने कंबलों पर कवर देने की व्यवस्था शुरू की थी।
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कंबल से कितना अलग होता है कंफर्टर?
कंफर्टर दिखने में रजाई जैसा होता है। इसमें आमतौर पर कपड़े की दो परतों के बीच रुई या सिंथेटिक फाइबर जैसी भराव सामग्री होती है। वहीं, सामान्य कंबल ऊन, फ्लीस या दूसरे मोटे कपड़े से बना हो सकता है। दोनों का इस्तेमाल शरीर को गर्म रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, इनकी गर्माहट वजन, मोटाई और बनावट पर निर्भर करती है। कंफर्टर के ऊपर कई प्रकार डिजाइन भी बनाई जा सकती है। सामान्य कंबल को भी धोने में समय लगता हैं। जबकि कंफर्टर कंफर्टर मशीन में आसानी से धोए जा सकते हैं।
देश की पहली राजधानी एक्सप्रेस है यह ट्रेन
हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता है। यह कोलकाता को देश की राजधानी नई दिल्ली से जोड़ती है। देश की पहली राजधानी एक्सप्रेस के रूप में इस ट्रेन की शुरुआत 3 मार्च 1969 को हुई थी। रेलवे के अनुसार, ट्रेन में कुल 22 एलएचबी कोच हैं। इनमें दो फर्स्ट एसी, छह एसी सेकंड टियर और 11 एसी थर्ड टियर कोच शामिल । इसके अलावा एक पेंट्री कार और दो पावर कार-कम-लगेज वैन हैं। हावड़ा से नई दिल्ली के बीच गया होकर चलने वाली यह ट्रेन 12301 नंबर से संचालित होती है। वापसी में नई दिल्ली से हावड़ा के लिए इसका नंबर 12302 है। वहीं, पटना होकर चलने पर हावड़ा से नई दिल्ली के लिए ट्रेन का नंबर 12305 और वापसी में नई दिल्ली से हावड़ा के लिए 12306 है।