विज्ञान: एआई, रोबोटिक्स की मदद से पढ़ेंगे और सीखेंगे डॉक्टर, मेडिकल शिक्षा बेहतर बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित
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आने वाले समय में डॉक्टर बनने के लिए सिर्फ किताबें पढ़ना और अस्पताल में मरीज देखना ही काफी नहीं होगा। सरकार मेडिकल छात्रों को एआई, वर्चुअल पेशेंट, डिजिटल सिमुलेशन और रोबोट आधारित प्रशिक्षण के जरिये प्रशिक्षित करने की भी तैयारी कर रही है। ये बदलाव अंडर ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट दोनों में हो सकता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए पढ़ाई और प्रशिक्षण के नए तरीकों पर विशेषज्ञों से प्रस्ताव मांगे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इन तकनीकों से मेडिकल पढ़ाई कितनी बेहतर हो सकती है।
पहल का सबसे अहम उद्देश्य यह है कि एआई डॉक्टर की जगह लेने को नहीं, बल्कि डॉक्टर को बेहतर तरीके से तैयार करने में मददगार बन सकता है। भविष्य में मेडिकल छात्रों का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होगा कि उन्हें कितनी बातें याद हैं। यह भी देखा जाएगा कि मरीज की स्थिति को कितनी अच्छी तरह समझते हैं, सही सवाल पूछते हैं, जांच का सही चुनाव करते हैं और सही फैसला लेते हैं।
कैसे काम करेंगे नए तरीके
वर्चुअल पेशेंट से पहचानेंगे बीमारी
मेडिकल छात्र वर्चुअल पेशेंट के साथ बातचीत और बीमारी पहचानने का अभ्यास कर सकता है। इसके बाद एआई यह बता सकता है कि छात्र ने कौन-सा जरूरी सवाल नहीं पूछा, बीमारी पहचानने में कहां गलती की या किस हिस्से में उसे और अभ्यास की जरूरत है।
मशीन लर्निंग कराएगी अभ्यास
मशीन लर्निंग का इस्तेमाल छात्रों की पढ़ाई को उनकी जरूरत के मुताबिक बनाने में भी किया जा सकता है। अगर कोई छात्र किसी खास चिकित्सकीय प्रक्रिया को समझने में ज्यादा समय लेता है तो तकनीक उस कमजोरी को पहचान सकती है।
जटिल इलाज और सर्जरी की समझ
छात्र डिजिटल मॉडल या सिमुलेशन में जटिल इलाज और सर्जरी का अभ्यास दोहरा सकते है। इससे गलती की गुंजाइश कम होगी। बदलाव का एक अहम हिस्सा यह भी हो सकता है कि मेडिकल छात्रों को एआई की सीमाएं समझाई जाएं।