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700 गिरफ्तार: शहजाद भट्टी के आतंकी नेटवर्क ने बदली चाल, धार्मिक पहचान पर दे रहा जोर; किसे बना रहा निशाना?

Fri, 06 Nov 2026 02:12 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 06 Nov 2026 02:12 PM IST
सार
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सुरक्षा एजेंसियों ने आंतकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े 700 लोगों को गिरफ्तार कर उसकी कई साजिशें नाकाम की हैं। इसके बावजूद उसका आतंकी नेटवर्क फिर सक्रिय होने की कोशिश में है। यह आतंकी नेटवर्क अब युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए किस तरह की चाल अपना रहा है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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shahzad bhatti terror network seeks comeback with religious pitch
शहजाद भट्टी का आतंकी नेटवर्क फिर सक्रिय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी के प्रतिबंधित आतंकी नेटवर्क से जुड़े 700 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। एजेंसियों ने भट्टी के नेटवर्क की कई बड़ी साजिशों को नाकाम किया है। इनमें भीड़भाड़ वाली जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना, चुनिंदा लोगों की हत्या करना और सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी करना शामिल था।
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भट्टी के नेटवर्क को खत्म करना हाल के समय में भारतीय जांच एजेंसियों के सबसे मुश्किल अभियानों में से एक था। मुख्य नेटवर्क को तोड़ने के बावजूद खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आतंकी गुट फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने युवाओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बदल दी है।
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अब तक भट्टी के लिए काम करने के शक में करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के इस अभियान से भट्टी के गुट की कई साजिशें नाकाम हुईं। इनमें संवेदनशील और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना, चुनिंदा लोगों की हत्या करना और मादक पदार्थों व नकली नोटों की तस्करी करना शामिल था।
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क्या पूरी तरह खत्म हो गया भट्टी का नेटवर्क?
एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क को काफी हद तक खत्म कर दिया है। हालांकि, बचे हुए सदस्यों के साथ पकड़ने और बचने का खेल अभी जारी है।

अधिकारी ने कहा, अब तक इस नेटवर्क से जुड़े इंस्टाग्राम खातों को हटाने के लिए मेटा को 100 से ज्यादा अनुरोध भेजे जा चुके हैं। जैसे ही इन खातों को हटाया जाता है, 50 से ज्यादा नए खाते सामने आ जाते हैं। वास्तव में यह एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि भट्टी का नेटवर्क दोबारा सक्रिय होने की इस कोशिश में धार्म के सम्मान की रक्षा पर काफी जोर दे रहा है। जब इस नेटवर्क की शुरुआत हुई थी, तब भर्ती का आधार धर्म नहीं था। इसमें अलग-अलग धर्मों के युवाओं को शामिल किया गया था। उस समय पैसे की बहुत बड़ी भूमिका थी।

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एक युवा को सिर्फ पांच हजार रुपये तक देकर कोई काम करने के लिए तैयार किया जा सकता था। इन युवाओं को भट्टी और उसके साथियों की महंगी कारों और आलीशान घरों के सामने खिंचवाई गई तस्वीरें भी दिखाई जाती थीं। नेटवर्क से जुड़े लोग युवाओं को शानदार जिंदगी का सपना दिखाते थे। उनकी यह चाल काफी हद तक सफल भी रही।

अधिकारी ने कहा कि असल में यह सिर्फ युवाओं को फंसाने का तरीका था। भर्ती के समय उन्हें शानदार जीवनशैली देने के जो वादे किए जाते थे, उन्हें पूरा करने की भट्टी के नेटवर्क की कभी कोई योजना नहीं थी।

कार्रवाई के बाद कहां गया भट्टी?
भट्टी पर नजर रखने वाली खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पहली बड़ी कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारी के बाद भट्टी को पाकिस्तान भेज दिया गया था। भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत उसे प्रतिबंधित आतंकी घोषित किया था। इसके बाद यह फैसला लिया गया।

हालांकि, हाल के महीनों में वह दुबई और पुर्तगाल भी गया है। वह अब भी इस आतंकी गुट की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। साथ ही, भारत में अभियानों के लिए नई रणनीतियां बनाने में सक्रिय रूप से शामिल है।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भट्टी अब अपनी अगली भर्ती मुहिम में धर्म, पैसे और बेहतर जीवनशैली के लालच को एक साथ इस्तेमाल करना चाहता है। इसमें धार्मिक पहचान पर पहले से ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

अधिकारी ने कहा, यह जानबूझकर अपनाई गई चाल है। धार्मिक भावनाओं को उभारकर भर्ती होने वाले युवाओं को अपेक्षाकृत कम पैसे दिए जाएंगे। इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया के दौरान युवाओं की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाना है। जिन युवाओं को बहुत कम पैसों पर भर्ती किया जाएगा, उन्हें दुबई, पाकिस्तान या नेपाल में बेहतर जिंदगी देने का वादा किया जा रहा है। उन्हें सिर्फ 3,000 से 5,000 रुपये तक दिए जा सकते हैं।

अधिकारी ने आगे बताया कि जांच में पता चला है कि भट्टी के नेटवर्क ने कई युवाओं के फर्जी पासपोर्ट तैयार किए हैं। इसका मकसद बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद उन्हें भारत से बाहर भगाना है।

अधिकारियों ने कहा, इस बार धार्मिक पहचान पर ज्यादा जोर दिया जाएगा, लेकिन कुल रणनीति वही रहेगी- कम पैसे दो और ज्यादा लोगों को भर्ती करो। भट्टी सिर्फ भारत में एक नेटवर्क नहीं बनाना चाहता, बल्कि ऐसे युवाओं की फौज तैयार करना चाहता है, जो एक धार्मिक उद्देश्य के लिए लड़ेंगे।

किन हमलों से जुड़ा है भट्टी का नेटवर्क?
इस आतंकी गुट की गतिविधियां अब सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगाने, मादक पदार्थों की तस्करी और नकली नोट चलाने तक सीमित नहीं हैं। यह नेटवर्क अपना दायरा बढ़ाने और गतिविधियां तेज करने की कोशिश कर रहा है।


पुलिस ने भट्टी के नेटवर्क को पंजाब में पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों, जालंधर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मुख्यालय के बाहर हुए धमाके और झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले से जोड़ा है।

इस नेटवर्क की आगे की साजिशें भी इसी तरह की हैं, लेकिन उनका स्तर काफी बड़ा हो सकता है। अधिकारी ने बताया कि इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और भारत के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाने के लिए जारी रहेगा।
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