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50 हजार रुपये वाले बयान पर घिरे वाघेला: बोले- माफी नहीं मांगूंगा; भाजपा को बताया आरक्षण विरोधी; बवाल क्यों?
Sun, 04 Oct 2026 10:15 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, अहमदाबाद।
पीटीआई, अहमदाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 04 Oct 2026 10:15 PM IST
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने आरक्षण पर दिए विवादित बयान के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने भाजपा की केंद्र और गुजरात सरकार को आरक्षण विरोधी बताते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी दलितों और दूसरे वंचित समुदायों के अधिकारों के समर्थन में थी। उन्होंने ब्राह्मण और पटेल समुदाय के खिलाफ होने के आरोपों को भी खारिज किया। उनके बयान पर गुजरात में विरोध हुआ है और भाजपा पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है।
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शंकरसिंह वाघेला, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने आरक्षण को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है। रविवार को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि मैंने जो कुछ कहा, पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा है। अपनी राजनीतिक जिंदगी में कभी अपने बयान वापस नहीं लिए हैं। वाघेला ने कहा कि उनके माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणी भाजपा की केंद्र और गुजरात सरकार के आरक्षण विरोधी रुख को लेकर थी, न कि किसी जाति विशेष के खिलाफ।
आखिर किस बयान पर शुरू हुआ विवाद?
विवाद शुक्रवार को गुजरात के नर्मदा जिले के सागबारा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए वाघेला के बयान से शुरू हुआ। गांधी जयंती के मौके पर आदिवासी किसानों की सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर पटेल, वणिक या ब्राह्मण समुदाय के लोग हाथ से मैला उठाने का काम करने के लिए तैयार हों, तो वह उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये देने को तैयार हैं। इस बयान के जरिए वह ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए आरक्षण की जरूरत समझाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि आरक्षण किसी पर किया गया एहसान नहीं है, बल्कि जीवनभर झेले गए भेदभाव और पीड़ा के बदले मिला अधिकार है।
वाघेला ने दलित समुदाय के बारे में क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री वाघेला ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता था, पीने के पानी की सुविधा से वंचित रखा जाता था और गांव में उन्हें बारात निकालने तक की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय के लोगों को मानव मल ढोने का काम करना पड़ता था। वाघेला के मुताबिक, आरक्षण देने के पीछे इन समुदायों के साथ लंबे समय तक हुए भेदभाव की भरपाई करने का विचार था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में थी।
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मैं ब्राह्मण और पटेल समुदाय के खिलाफ नहीं हूं- वाघेला
वाघेला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह ब्राह्मण या किसी दूसरे सवर्ण समुदाय के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर वह ब्राह्मण विरोधी हैं, तो उनके मुख्यमंत्री रहते भगवान परशुराम जयंती पर छुट्टी देने की अनुमति किसने दी थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकता है, जब उन्होंने पटेल समुदाय का विरोध किया हो। वाघेला ने कहा कि उनके बयान को किसी जाति के खिलाफ बताना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण के अधिकारों की बात कर रहे थे।
यह भी पढ़ें: एसआईआर विवाद: शुभेंदु अधिकारी बोले- चारों ओर कई खटमल फिर उभर आए हैं; क्या सीजेपी प्रदर्शन पर साधा निशाना?
भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
वाघेला ने विवाद के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले भाजपा के लोग हैं और उनकी टिप्पणी का निशाना भी वही पार्टी थी। उन्होंने यह भी बताया कि करीब एक साल पहले उन्होंने आरक्षण को लेकर इसी तरह की बात कही थी, लेकिन उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। इस बीच, गुजरात भाजपा के पूर्व मीडिया संयोजक और समस्त ब्रह्म समाज के संयोजक यज्ञेश दवे ने शनिवार को वाघेला के बयान पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुदायों और जातियों के बीच दुश्मनी पैदा करना उचित नहीं है। वाघेला के बयान के बाद उनके दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
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आखिर किस बयान पर शुरू हुआ विवाद?
विवाद शुक्रवार को गुजरात के नर्मदा जिले के सागबारा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए वाघेला के बयान से शुरू हुआ। गांधी जयंती के मौके पर आदिवासी किसानों की सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर पटेल, वणिक या ब्राह्मण समुदाय के लोग हाथ से मैला उठाने का काम करने के लिए तैयार हों, तो वह उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये देने को तैयार हैं। इस बयान के जरिए वह ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए आरक्षण की जरूरत समझाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि आरक्षण किसी पर किया गया एहसान नहीं है, बल्कि जीवनभर झेले गए भेदभाव और पीड़ा के बदले मिला अधिकार है।
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वाघेला ने दलित समुदाय के बारे में क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री वाघेला ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता था, पीने के पानी की सुविधा से वंचित रखा जाता था और गांव में उन्हें बारात निकालने तक की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय के लोगों को मानव मल ढोने का काम करना पड़ता था। वाघेला के मुताबिक, आरक्षण देने के पीछे इन समुदायों के साथ लंबे समय तक हुए भेदभाव की भरपाई करने का विचार था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में थी।
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मैं ब्राह्मण और पटेल समुदाय के खिलाफ नहीं हूं- वाघेला
वाघेला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह ब्राह्मण या किसी दूसरे सवर्ण समुदाय के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर वह ब्राह्मण विरोधी हैं, तो उनके मुख्यमंत्री रहते भगवान परशुराम जयंती पर छुट्टी देने की अनुमति किसने दी थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकता है, जब उन्होंने पटेल समुदाय का विरोध किया हो। वाघेला ने कहा कि उनके बयान को किसी जाति के खिलाफ बताना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण के अधिकारों की बात कर रहे थे।
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भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
वाघेला ने विवाद के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले भाजपा के लोग हैं और उनकी टिप्पणी का निशाना भी वही पार्टी थी। उन्होंने यह भी बताया कि करीब एक साल पहले उन्होंने आरक्षण को लेकर इसी तरह की बात कही थी, लेकिन उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। इस बीच, गुजरात भाजपा के पूर्व मीडिया संयोजक और समस्त ब्रह्म समाज के संयोजक यज्ञेश दवे ने शनिवार को वाघेला के बयान पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुदायों और जातियों के बीच दुश्मनी पैदा करना उचित नहीं है। वाघेला के बयान के बाद उनके दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।