{"_id":"6ab92e7e3cca8b23050ec209","slug":"sir-voter-list-row-opposition-attack-election-commission-bjp-congress-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"'राहुल-खरगे सही निकले’: एसआईआर पर शिवकुमार का दावा; कांग्रेस ने पूछा- 13 करोड़ में बाकी 10.2 करोड़ वोटर कौन?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'राहुल-खरगे सही निकले’: एसआईआर पर शिवकुमार का दावा; कांग्रेस ने पूछा- 13 करोड़ में बाकी 10.2 करोड़ वोटर कौन?
Sun, 27 Sep 2026 08:26 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 27 Sep 2026 08:26 PM IST
एसआईआर को लेकर विवाद अब सिर्फ मतदाता सूची में नाम जुड़ने या हटने तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस ने ईसीआईनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 10.2 करोड़ हटाए गए नामों पर सवाल उठाए हैं, जबकि माकपा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर रोकने की मांग की है। डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी और खरगे की चिंताओं को सही बताया है। दूसरी ओर, भाजपा ने 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम हटाने को एसआईआर की उपलब्धि बताया है।
विज्ञापन
एसआईआर पर विपक्ष हमलावर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने आयोग के नए कदमों को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं माकपा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहरा दी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची को लेकर जो चिंता जताई थी, वह अब सही साबित होती दिख रही है। इस पूरे विवाद के बीच भाजपा ने एसआईआर के तहत हटाए गए नामों में 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के होने का दावा किया है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के नए कदमों पर क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 5.43 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम हटने का खतरा है और अब बूथ स्तर के अधिकारियों को उनके घर भेजने की बात कही गई है। कांग्रेस का सवाल है कि जब घर-घर जाकर गणना के दौरान यह काम होना था और कई जगह दौरे कम या अनियमित रहे, तो दूसरी बार वही प्रक्रिया कितनी कारगर होगी। जयराम रमेश ने कहा कि एसआईआर के तीन चरणों में करीब 14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं और अब उन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए चुनाव पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। कांग्रेस ने ईसीआईनेट को लेकर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि सॉफ्टवेयर के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए तथा चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के फैसलों को दरकिनार किया गया।
रमेश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी पारदर्शिता की मांग की और कहा कि दिल्ली में मतदाताओं की बड़े स्तर पर छंटाई में इसका इस्तेमाल हुआ, जबकि चुनाव आयोग ने जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों से कहा था कि किसी भी स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल नहीं होता।
विज्ञापन
आयोग के अंदर मतभेद और विपक्ष की आपत्ति क्या?
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और गहरा हुआ जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर हुए हैं। माकपा ने आयोग के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया और कहा कि इससे मतदाता नामांकन, नाम हटाने, चुनावी आंकड़ों तक पहुंच और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे सवालों का जवाब नहीं मिलता।
माकपा ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर होने से बचाने के पर्याप्त उपाय होने चाहिए। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि इस्तीफा नहीं देने पर उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई होनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: बंगाल: कुणाल घोष की कार पर दो दिन में दूसरी बार हमले का आरोप, हथौड़े से शीशा तोड़ने और बंदूक तानने का दावा
डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी और खरगे के आरोपों पर क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची को लेकर जो चिंता जताई थी, वह अब सही साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है और इसके बाद विपक्षी दल भी आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। शिवकुमार के मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है और इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।
भाजपा का क्या दावा?
भाजपा ने कहा कि एसआईआर के तहत 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा ने सवाल किया कि ऐसे नाम मतदाता सूची में बने रहने से किसे फायदा होता और इनका इस्तेमाल फर्जी मतदान के लिए कौन करना चाहता था। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि एसआईआर में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं, तो बाकी 10.2 करोड़ नाम कहां गए। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर 2.8 करोड़ मृत लोग 2014 से मतदाता सूची में बने हुए थे, तो पिछले वर्षों में हुई वार्षिक पुनरीक्षण प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी। भाजपा ने इसके अलावा एक करोड़ से ज्यादा दोहरे नाम और 9.43 करोड़ अनुपस्थित या स्थान बदल चुके नाम हटाए जाने का भी दावा किया है।
विज्ञापन
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के नए कदमों पर क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 5.43 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम हटने का खतरा है और अब बूथ स्तर के अधिकारियों को उनके घर भेजने की बात कही गई है। कांग्रेस का सवाल है कि जब घर-घर जाकर गणना के दौरान यह काम होना था और कई जगह दौरे कम या अनियमित रहे, तो दूसरी बार वही प्रक्रिया कितनी कारगर होगी। जयराम रमेश ने कहा कि एसआईआर के तीन चरणों में करीब 14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं और अब उन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए चुनाव पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। कांग्रेस ने ईसीआईनेट को लेकर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि सॉफ्टवेयर के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए तथा चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के फैसलों को दरकिनार किया गया।
विज्ञापन
रमेश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी पारदर्शिता की मांग की और कहा कि दिल्ली में मतदाताओं की बड़े स्तर पर छंटाई में इसका इस्तेमाल हुआ, जबकि चुनाव आयोग ने जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों से कहा था कि किसी भी स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल नहीं होता।
विज्ञापन
आयोग के अंदर मतभेद और विपक्ष की आपत्ति क्या?
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और गहरा हुआ जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर हुए हैं। माकपा ने आयोग के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया और कहा कि इससे मतदाता नामांकन, नाम हटाने, चुनावी आंकड़ों तक पहुंच और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे सवालों का जवाब नहीं मिलता।
माकपा ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर होने से बचाने के पर्याप्त उपाय होने चाहिए। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि इस्तीफा नहीं देने पर उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई होनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: बंगाल: कुणाल घोष की कार पर दो दिन में दूसरी बार हमले का आरोप, हथौड़े से शीशा तोड़ने और बंदूक तानने का दावा
डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी और खरगे के आरोपों पर क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची को लेकर जो चिंता जताई थी, वह अब सही साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है और इसके बाद विपक्षी दल भी आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। शिवकुमार के मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है और इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।
भाजपा का क्या दावा?
भाजपा ने कहा कि एसआईआर के तहत 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा ने सवाल किया कि ऐसे नाम मतदाता सूची में बने रहने से किसे फायदा होता और इनका इस्तेमाल फर्जी मतदान के लिए कौन करना चाहता था। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि एसआईआर में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं, तो बाकी 10.2 करोड़ नाम कहां गए। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर 2.8 करोड़ मृत लोग 2014 से मतदाता सूची में बने हुए थे, तो पिछले वर्षों में हुई वार्षिक पुनरीक्षण प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी। भाजपा ने इसके अलावा एक करोड़ से ज्यादा दोहरे नाम और 9.43 करोड़ अनुपस्थित या स्थान बदल चुके नाम हटाए जाने का भी दावा किया है।