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स्टारलिंक पर डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक की चेतावनी: मुफ्त में भी एंट्री न दे भारत; राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा?
डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक ने एलन मस्क की स्टारलिंक को मुफ्त में भी भारत में एंट्री देने का विरोध किया है। उन्होंने डाटा के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने की आशंका जताई और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा करने की सलाह दी। आखिर स्टारलिंक की एंट्री को देश की सुरक्षा के लिए इतना बड़ा जोखिम क्यों बताया जा रहा है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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रवि गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
सरकार को मुफ्त में भी एलन मस्क की स्टारलिंक को देश में आने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। यह कहना है डीआरडीओ के वैज्ञानिक रहे डॉक्टर रवि कुमार गुप्ता का। स्टारलिंक को लेकर जारी राजनीतिक उठापटक के बीच अमर उजाला ने इससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की पड़ताल की।
स्टारलिंक से जोखिम
स्टारलिंक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बताते हुए डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि आज का युद्ध तलवारों या गोलियों से होने वाले युद्ध की बजाय नेटवर्क-सेंट्रिक हो चुका है। इंटरनेट अपने आप में नई दुनिया बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट डेटा प्रदाता के पास यूजर की लोकेशन की सारी जानकारी मौजूद रहती है। अमेरिका ने भी ईरान में खामेनेई पर सटीक हमले के लिए डेटा का ही इस्तेमाल किया था। ऐसे में हमारे देश की स्वायत्तता के साथ समझौता करना खतरनाक है।
ये भी पढ़ें: प्रदीप पूर्णेकर मर्डर केस: मंदिर में छिपा था मुख्य आरोपी; ठाणे पुलिस ने 1500 किमी दूर से कैसे पकड़ा?
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मस्क का दावा बेमानी
डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि सरकार को देश के वैज्ञानिकों पर भरोसा रखना चाहिए। स्टारलिंक के समानांतर ढांचा बनाने में भारत को ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। उन्होंने इस दावे को बेमानी बताया कि स्टारलिंक का डेटा भारत में ही बनाए रखा जाएगा। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि यह कोई गेहूं या आलू की बोरिया नहीं हैं कि उसको दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से शिफ्ट करने में महीनों लग जाएं। डेटा मिनटों में इधर से उधर जा सकता है।
डिवाइड एंड रूल से सावधान
गुप्ता ने कहा कि अमेरिका की आबादी करीब 35 करोड़ है, जबकि भारत में मध्य वर्ग की आबादी लगभग 46 करोड़ होने का अनुमान है। दक्षिण एशिया का विशाल जनसंख्या आधार इसे कारोबार के लिहाज से बड़ा बाजार बनाता है। मस्क इसी बाजार में अपने कारोबारी हितों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और भारत की अंदरूनी राजनीति में फूट डालो और राज करो की नीति अपना रहे हैं।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
इधर रक्षा एवं सैन्य संचार विशेषज्ञ कर्नल रोहित देव ने भी स्टारलिंक को देश की संप्रभुता के लिए खतरा बताते हुए भारत में इसकी सेवाओं को अनुमति देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत-विरोधी तत्वों द्वारा इसके दुरुपयोग की आशंका है। इसमें सुरक्षा के अंतर्निहित प्रावधानों, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल हैं। कर्नल देव ने कहा कि भारत को ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिसका लाभ नागरिकों के साथ सेना को भी मिले।
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स्टारलिंक से जोखिम
स्टारलिंक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बताते हुए डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि आज का युद्ध तलवारों या गोलियों से होने वाले युद्ध की बजाय नेटवर्क-सेंट्रिक हो चुका है। इंटरनेट अपने आप में नई दुनिया बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट डेटा प्रदाता के पास यूजर की लोकेशन की सारी जानकारी मौजूद रहती है। अमेरिका ने भी ईरान में खामेनेई पर सटीक हमले के लिए डेटा का ही इस्तेमाल किया था। ऐसे में हमारे देश की स्वायत्तता के साथ समझौता करना खतरनाक है।
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मस्क का दावा बेमानी
डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि सरकार को देश के वैज्ञानिकों पर भरोसा रखना चाहिए। स्टारलिंक के समानांतर ढांचा बनाने में भारत को ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। उन्होंने इस दावे को बेमानी बताया कि स्टारलिंक का डेटा भारत में ही बनाए रखा जाएगा। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि यह कोई गेहूं या आलू की बोरिया नहीं हैं कि उसको दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से शिफ्ट करने में महीनों लग जाएं। डेटा मिनटों में इधर से उधर जा सकता है।
डिवाइड एंड रूल से सावधान
गुप्ता ने कहा कि अमेरिका की आबादी करीब 35 करोड़ है, जबकि भारत में मध्य वर्ग की आबादी लगभग 46 करोड़ होने का अनुमान है। दक्षिण एशिया का विशाल जनसंख्या आधार इसे कारोबार के लिहाज से बड़ा बाजार बनाता है। मस्क इसी बाजार में अपने कारोबारी हितों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और भारत की अंदरूनी राजनीति में फूट डालो और राज करो की नीति अपना रहे हैं।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
इधर रक्षा एवं सैन्य संचार विशेषज्ञ कर्नल रोहित देव ने भी स्टारलिंक को देश की संप्रभुता के लिए खतरा बताते हुए भारत में इसकी सेवाओं को अनुमति देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत-विरोधी तत्वों द्वारा इसके दुरुपयोग की आशंका है। इसमें सुरक्षा के अंतर्निहित प्रावधानों, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल हैं। कर्नल देव ने कहा कि भारत को ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिसका लाभ नागरिकों के साथ सेना को भी मिले।
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क्या हैं सुरक्षा से जुड़े खतरे?
पीएम का बयान
मौजूदा विवाद के बीच ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दूरसंचार और डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि फोन की सिक्योरिटी और नेटवर्क की सिक्योरिटी, ये हम सभी की प्राथमिकता है।
- विदेशी कंपनी के संचार नेटवर्क पर निर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित होने का खतरा।
- युद्ध में सेवा बाधित होने या प्रतिबंधित किए जाने से सैन्य संचार प्रभावित होने का खतरा।
- यूजर की लोकेशन और नेटवर्क संबंधी जानकारी तक सेवा प्रदाता की पहुंच गोपनीयता संबंधी जोखिम
- विदेशी कनेक्टिविटी का इस्तेमाल दुश्मन सैन्य बल ड्रोन संचालन और हमलों के समन्वय में कर सकते हैं
- पारंपरिक इंटरनेट बंद होने या नेटवर्क न होने पर भी आतंकी समूह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं
- अनधिकृत उपग्रह कनेक्टिविटी से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियां बढ़ सकती हैं
- इंटरनेट का इस्तेमाल भ्रामक खबरों व भड़काऊ सामग्री के प्रसार के लिए होने का खतरा
- चोरी, तस्करी या अवैध रूप से हस्तांतरित उपकरणों के जरिए नेटवर्क का दुरुपयोग किए जाने की आशंका
पीएम का बयान
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