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सुभाषितम्: 'अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

Thu, 27 Aug 2026 09:37 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 27 Aug 2026 09:37 AM IST
सार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर संस्कृत का सुभाषित साझा किया। इसमें परंपरा और ज्ञान को आगे बढ़ाने, बुद्धि से न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग चुनने, श्रेष्ठ जनों के सदाचार को अपनाने और विचारशील बने रहने की सीख दी गई है। 

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Subhashitam: One must do noble deeds carrying forward one traditions and knowledge PM Modi shares Subhashitam
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर गुरुवार को सुभाषित शेयर किया है। उन्होंने एक श्लोक, 'तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥' साझा किया है। 

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पीएम के इस सुभाषित का क्या अर्थ? 
जिसका हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उसे बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में अपनाकर निरंतर विचारशील रहना चाहिए और दिव्य गुणों से सम्पन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।

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बुधवार को क्या शेयर किया? 
एक दिन पहले बुधवार को भी प्रधानमंत्री की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा गया था, 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥ साझा किया। जिसका हिंदी अर्थ है कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव का व्यवहार करते हैं। वे व्यक्तिगत लाभ की भावना से मुक्त होकर एक-दूसरे की सेवा तथा प्रशंसा करते हुए जीवन में सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करते हैं।

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इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए संस्कृत श्लोक, 'उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥' शेयर किया गया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि उत्तम व्यक्तियों की संगति, विद्वानों के साथ सत्संवाद तथा निःस्वार्थ और निर्लोभी व्यक्तियों के साथ मित्रता करने वाला व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता।


सोमवार को सुभाषित शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा था, 'करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।' प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक, 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥'  साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि दूसरों के प्रति करुणा भाव रखने से आत्म-सम्मान प्राप्त होता है। संतोषी होने से तृष्णा पर विजय प्राप्त होती है। पुरुषार्थ द्वारा आलस्य तथा वितर्क, अर्थात् आधारहीन आशंकाओं पर निश्चय ही विजय प्राप्त करें।

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