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सुप्रीम कोर्ट: हवाई किराये पर लगाम लगाने वाले नियमों को मंजूरी, दो हफ्ते में प्रवाधान पेश करेगी केंद्र सरकार
Fri, 16 Oct 2026 06:09 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 16 Oct 2026 06:09 PM IST
केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत विमानन क्षेत्र के नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। सरकार इन्हें दो सप्ताह में प्रकाशित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर नियम पेश करने को कहा है। मामला हवाई किराये में मनमानी बढ़ोतरी और अतिरिक्त शुल्क से जुड़ा है। क्या नए नियम टिकटों की कीमतों पर लगाम लगाएंगे? यात्रियों को कितनी राहत मिलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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क्या यात्रियों को टिकट की बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी?
- फोटो : सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन लाइव
विस्तार
हवाई सफर करने वाले यात्रियों को टिकटों की बढ़ती कीमतों और अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलने की उम्मीद के बीच केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र से जुड़े नए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से प्रकाशित नियम अगली सुनवाई पर पेश करने को कहा है। यह मामला हवाई किराये में अचानक बढ़ोतरी, यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा और विमानन कंपनियों की मनमानी पर नियंत्रण की मांग से जुड़ा है।
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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बाद पीठ ने सरकार को अगली सुनवाई पर नियम पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने याचिका दायर कर विमानन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की है, जो किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करे और यात्रियों के हितों की रक्षा करे।
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हवाई किराये में बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या सवाल उठाए?
याचिका में मांग की गई है कि निजी विमानन कंपनियों की ओर से हवाई किराये और अन्य शुल्कों में होने वाले अनिश्चित उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण के लिए नियम बनाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी त्योहारों के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी। जनवरी में अदालत ने कहा था कि किराये में बेतहाशा वृद्धि यात्रियों के साथ शोषण जैसी स्थिति पैदा करती है। अदालत ने केंद्र सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से इस मामले में जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया है कि मांग बढ़ने पर विमानन कंपनियां किराये में मनमाने ढंग से बढ़ोतरी कर सकती हैं और फिलहाल कीमतों की समीक्षा या अधिकतम सीमा तय करने के लिए पर्याप्त नियामक व्यवस्था नहीं है।
नए नियमों की जरूरत क्यों महसूस हुई?
केंद्र सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 जनवरी 2025 में लागू हुआ और इसके तहत नियम तैयार किए जा रहे हैं। 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इन नियमों को अदालत में पेश करने को कहा था। अदालत ने निर्देश दिया था कि नियम संसद के सामने रखे गए हों या नहीं, उन्हें सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए। 17 अगस्त को केंद्र ने बताया था कि नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और इन्हें तीन सप्ताह में अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। उस समय सरकार ने कहा था कि कुछ अंतिम चर्चाएं बाकी हैं। अब केंद्र के मुताबिक नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है और इन्हें प्रकाशित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
चेक-इन बैगेज और अतिरिक्त शुल्क को लेकर याचिका में क्या आरोप हैं?
याचिका में दावा किया गया है कि निजी विमानन कंपनियों ने इकोनॉमी श्रेणी के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे पहले टिकट में शामिल सुविधा को अतिरिक्त कमाई का जरिया बना दिया गया है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि चेक-इन सामान नहीं ले जाने वाले यात्रियों को कोई छूट या दूसरी राहत नहीं मिलती। इसके अलावा, मनमाने किराये, अतिरिक्त शुल्क, टिकट रद्द करने की नीतियों और यात्रियों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं, जिन पर अदालत में विचार होना है।
क्या नए नियम यात्रियों को किराये और अतिरिक्त शुल्क से राहत दिला सकेंगे?
याचिका के अनुसार, किराये में अचानक बढ़ोतरी, मौसम खराब होने पर टिकट महंगे होना और आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्रियों पर अधिक खर्च का बोझ पड़ना बड़ी समस्या है। इसमें कहा गया है कि कीमतों के निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने से यात्रियों को नुकसान हो सकता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि किराये, अतिरिक्त शुल्क, टिकट रद्द करने और शिकायतों के निपटारे से जुड़े मामलों में प्रभावी निगरानी हो। हालांकि, केंद्र ने अभी केवल नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिलने और उन्हें दो सप्ताह में प्रकाशित करने की बात कही है। इन नियमों में किराये की अधिकतम सीमा तय होगी या नहीं, और यात्रियों को किन मामलों में राहत मिलेगी, यह जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।