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सीईसी ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: फॉर्म-6 में बदलाव समेत उठे ये सवाल; क्या है मामला?
Fri, 25 Sep 2026 03:31 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:31 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कुछ फैसलों और फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने बिना सहमति और अल्पमत में लिए गए फैसलों को शुरू से अमान्य घोषित करने की मांग की है। इसके साथ ही पद और अधिकार की सीमा से आगे जाने वाले कथित कृत्यों पर आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। याचिका में अन्य संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कथित अपराधों में प्रतिरक्षा न देने की मांग भी शामिल है।
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सीईसी ज्ञानेश कुमार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से लिए गए कुछ फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि हाल के दिनों में सामने आए विवादों और मीडिया रिपोर्टों में उठाए गए मुद्दों के आधार पर यह याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के फैसलों और कुछ प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता की मांग क्या?
शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के मुताबिक, याचिका में मांग की गई है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से बिना सहमति और अल्पमत में रहते हुए लिए गए सभी फैसलों को शुरू से ही अमान्य घोषित किया जाए।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कुछ मामलों में अपने पद और अधिकार की सीमाओं को पार किया। उनका कहना है कि ऐसे कृत्यों को केवल प्रशासनिक चूक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए और संबंधित व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
यह भी पढ़ें: एसआईआर विवाद LIVE: देशभर में कांग्रेस का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
फॉर्म-6 को लेकर याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों को भी चुनौती दी गई है। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, ये बदलाव बिना बहुमत और कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए किए गए। इसलिए याचिकाकर्ता ने इन संशोधनों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। इस मामले में याचिका का जोर इस बात पर है कि किसी भी बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और बहुमत की शर्तों का पालन होना चाहिए।
क्या सिर्फ सीईसी की जिम्मेदारी तय करने की मांग?
याचिकाकर्ता ने उन अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है, जिन पर कानून के दायरे से बाहर जाकर कथित तौर पर ऐसे कदम उठाने का आरोप है। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी का कहना है कि यदि किसी अधिकारी ने अपराध किया है तो उसे जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मिलने वाली प्रतिरक्षा का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। याचिका में ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
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याचिकाकर्ता की मांग क्या?
शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के मुताबिक, याचिका में मांग की गई है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से बिना सहमति और अल्पमत में रहते हुए लिए गए सभी फैसलों को शुरू से ही अमान्य घोषित किया जाए।
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- बिना सहमति लिए गए सीईसी के फैसलों को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है। अल्पमत में लिए गए फैसलों को भी शुरू से ही शून्य घोषित करने की मांग है।
- पद और अधिकार की सीमा से आगे जाने वाले कथित कृत्यों पर सवाल उठाया गया है। ऐसे कथित कृत्यों को आपराधिक कृत्य मानने की मांग याचिका में की गई है।
- सीईसी की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की मांग भी रखी गई है।
- फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई है। कथित रूप से कानून से बाहर जाकर काम करने वाले अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग है।
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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कुछ मामलों में अपने पद और अधिकार की सीमाओं को पार किया। उनका कहना है कि ऐसे कृत्यों को केवल प्रशासनिक चूक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए और संबंधित व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
यह भी पढ़ें: एसआईआर विवाद LIVE: देशभर में कांग्रेस का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
फॉर्म-6 को लेकर याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों को भी चुनौती दी गई है। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, ये बदलाव बिना बहुमत और कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए किए गए। इसलिए याचिकाकर्ता ने इन संशोधनों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। इस मामले में याचिका का जोर इस बात पर है कि किसी भी बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और बहुमत की शर्तों का पालन होना चाहिए।
क्या सिर्फ सीईसी की जिम्मेदारी तय करने की मांग?
याचिकाकर्ता ने उन अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है, जिन पर कानून के दायरे से बाहर जाकर कथित तौर पर ऐसे कदम उठाने का आरोप है। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी का कहना है कि यदि किसी अधिकारी ने अपराध किया है तो उसे जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मिलने वाली प्रतिरक्षा का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। याचिका में ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।