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तमिलनाडु में हिंदी पर फिर रार: दवा के कवर पर हिंदी दिखी तो भड़का विवाद; क्यों रोकना पड़ा इस्तेमाल?

Wed, 07 Oct 2026 12:12 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोयंबटूर।
पीटीआई, कोयंबटूर। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 07 Oct 2026 12:12 PM IST
सार
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तमिलनाडु के करूर और कोयंबटूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दवा के कवर पर तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में निर्देश छपे मिलने के बाद भाषा विवाद खड़ा हो गया। डीएमके नेता टीआरबी राजा ने इसे अस्पतालों में तीन भाषा नीति लागू करने से जोड़ते हुए सवाल उठाया। अस्पतालों ने विवाद सामने आने के बाद इन कवर का इस्तेमाल रोक दिया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि ये कवर हाल में भाषा नीति बदलने के लिए नहीं लाए गए थे। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में हिंदी वाले एक हाईवे साइनबोर्ड को लेकर भी हाल ही में दो अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।
 

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Tamil Nadu Hindi medicine cover language row controversy TRB Rajaa
तमिलनाडु में हिंदी पर फिर विवाद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तमिलनाडु में हिंदी को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के कवर से जुड़ा है। करूर और कोयंबटूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ऐसे कवर इस्तेमाल किए गए, जिन पर दवा कब और कितनी लेनी है, इससे जुड़े निर्देश तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी छपे थे। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इन कवर का इस्तेमाल रोकने के निर्देश दे दिए।
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कैसे हुई विवाद की शुरुआत?
विवाद तब सामने आया जब डीएमके नेता टीआरबी राजा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर करूर के सरकारी अस्पताल में इस्तेमाल किए जा रहे दवा के कवर की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु के अस्पतालों में भी तीन भाषा नीति लागू की जा रही है। राजा ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ऐसा लगता है कि तमिलनाडु के अस्पतालों में भी तीन भाषा नीति लागू की जा रही है! पहले करूर, अब कोयंबटूर में भी यही स्थिति है।' 
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अस्पतालों ने हिंदी वाले कवर क्यों इस्तेमाल किए?
करूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन डॉक्टर एम. भारती मोहन के मुताबिक, अस्पताल आमतौर पर मदुरै जेल से तैयार कराए गए सादे भूरे कवर इस्तेमाल करता है। इन कवर पर अस्पताल की फार्मेसी में रबर स्टांप से तमिल में दवा लेने का समय लिखा जाता है। कवर की कमी होने पर दिसंबर 2025 में ईरोड की एक सहकारी प्रिंटिंग प्रेस से कवर मंगाए गए थे। डीन के अनुसार, अस्पताल ने इन पर कोई भाषा छापने का निर्देश नहीं दिया था, लेकिन बड़े आकार के कवर पर प्रिंटिंग प्रेस ने अपनी तरफ से दवा की खुराक और इस्तेमाल से जुड़े शब्द छाप दिए। अस्पताल में इन पर छपी हिंदी पर उस समय ध्यान नहीं गया और सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद इनका इस्तेमाल रोक दिया गया।
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कोयंबटूर में क्या हुआ?
कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी हिंदी वाले ऐसे कवर इस्तेमाल किए जा रहे थे। विवाद के बाद अस्पताल ने इन कवर को हटाकर सादे कवर इस्तेमाल करने शुरू कर दिए। अधिकारियों के मुताबिक, अब दवा देने से पहले कवर पर दवा की खुराक और लेने का तरीका हाथ से स्टांप किया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि दवा की खुराक से जुड़ी जानकारी छपे हुए कवर पर देना आम व्यवस्था है और कोयंबटूर में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं, इसलिए ऐसी जानकारी उनके लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि, अस्पताल के कुछ फार्मासिस्टों ने सादे कवर की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि केवल तमिल और अंग्रेजी में जानकारी होने पर कुछ प्रवासी मजदूरों को दवा की खुराक समझाने में अतिरिक्त समय लग सकता है, जबकि अस्पताल पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।

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तमिलनाडु में हिंदी पर इतना बड़ा विवाद क्यों?
इस पूरे विवाद को समझने के लिए तमिलनाडु की दो भाषा नीति को समझना जरूरी है। राज्य में तमिल और अंग्रेजी के इस्तेमाल की नीति लंबे समय से चली आ रही है और राज्य सरकारें केंद्र की तीन भाषा नीति का विरोध करती रही हैं। ऐसे में सरकारी संस्थानों में हिंदी का इस्तेमाल राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। दवा के कवर का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही तूतीकोरिन जिले के सातानकुलम के पास राज्य राजमार्ग-93 के एक दिशा-सूचक बोर्ड पर तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी भी लिखी मिली थी। विवाद के बाद बोर्ड से हिंदी हटाई गई और राज्य सरकार ने इस मामले में दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।

विवाद के बाद सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए? 
स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने कहा कि मौजूदा सरकार ने इन कवर के डिजाइन या भाषा में कोई बदलाव नहीं किया था। उन्होंने कहा कि करूर में दिसंबर 2025 में कवर की खरीद पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल में हुई थी, जबकि कोयंबटूर में भी इसी तरह के कवर पहले से इस्तेमाल किए जा रहे थे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने मामला सामने आते ही दोनों अस्पतालों में विवादित कवर का इस्तेमाल रोक दिया है। 
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