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आसमान में एक साथ गरजे कई देशों के विमान: तरंग शक्ति का भारतीय वायुसेना ने दिखाया शानदार नजारा; क्या है खास?
Wed, 07 Oct 2026 09:30 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, जोधपुर।
एएनआई, जोधपुर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 07 Oct 2026 09:30 AM IST
भारतीय वायुसेना ने तरंग शक्ति 2026 का वीडियो साझा किया है, जिसमें अभ्यास में शामिल अलग-अलग देशों के विमान एक साझा फॉर्मेशन में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। जोधपुर में हो रहे इस अभ्यास में भारत के साथ सात विदेशी देश शामिल हैं और एफ-35, राफेल, एफ-16 और ए400एम जैसे विमान हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का मुख्य जोर संयुक्त प्रशिक्षण, आपसी सीख और अलग-अलग वायुसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर है।
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तरंग शक्ति 2026
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय वायुसेना ने एक्सरसाइज तरंग शक्ति 2026 का एक नया वीडियो साझा किया है। वीडियो में अभ्यास में शामिल अलग-अलग देशों के विमान एक साथ उड़ते दिखाई दे रहे हैं। सभी विमान एक साझा फॉर्मेशन में हैं। आसमान में बना यह फॉर्मेशन इस पूरे बहुराष्ट्रीय अभ्यास की तस्वीर सामने रखता है। भारतीय वायुसेना ने इसे विश्वास, सटीकता और आपसी सौहार्द का शक्तिशाली प्रदर्शन बताया है। यानी यहां सिर्फ अलग-अलग देशों के विमान उड़ते नहीं दिख रहे, बल्कि वे एक साथ और एक तय तालमेल के साथ काम करते नजर आ रहे हैं।
आखिर कितना बड़ा अभ्यास है तरंग शक्ति 2026?
तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है। इसका आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर हो रहा है। यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्तूबर तक चलेगा। इसका विषय ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी ‘साझेदारी में शक्ति’ है। भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं इसमें शामिल हैं। कई दूसरे मित्र देश पर्यवेक्षक के तौर पर भी जुड़े हैं।
ऐसे अभ्यास में अलग-अलग देशों के विमानों को एक ही हवाई क्षेत्र में साथ उड़ाना अपने आप में बड़ी तैयारी मांगता है। हर देश के विमान, एयरक्रू और संचालन की अपनी प्रक्रियाएं होती हैं। तरंग शक्ति का मकसद इन्हीं अलग-अलग प्रक्रियाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अभ्यास में एयरक्रू के साथ मिशन प्लानर और ऑपरेशनल सपोर्ट से जुड़े कर्मचारी भी एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें दूसरे देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपने अनुभव साझा करने का मौका मिल रहा है।
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अभ्यास में शामिल हैं कौन-कौन से विमान?
तरंग शक्ति में इस बार लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं। विदेशी विमानों में F-35 लाइटनिंग II, राफेल, F-16, A400M, MRTT, C-130, C-130J और KC-30A शामिल हैं। अमेरिकी F-35A लाइटनिंग II की इस अभ्यास में भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही है। यह भारत में किसी अभ्यास में F-35 की पहली भागीदारी है। भारतीय और अमेरिकी विमानों के साथ दूसरे देशों के विमान भी संयुक्त प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं।
इस पूरे अभ्यास में क्या कर रहा है जर्मनी का ए400एम?
यही वह हिस्सा है जो इस अभ्यास की तस्वीर को और बड़ा बनाता है। जर्मनी अपना A400M सैन्य परिवहन विमान लेकर तरंग शक्ति में शामिल हुआ है। जर्मन वायुसेना के कैप्टन मॉरिस बर्न्स ने बताया कि इस बार A400M को बड़े लड़ाकू विमान अभियानों में भी शामिल किया जा रहा है। इसे लार्ज फोर्स एंगेजमेंट कहा जाता है। यानी यह सिर्फ सामान या सैनिकों को ले जाने वाला विमान बनकर अलग नहीं उड़ रहा, बल्कि बड़े लड़ाकू विमान अभ्यास का हिस्सा भी है। बर्न्स ने A400M को जर्मन वायुसेना के राष्ट्रीय बेड़े की रीढ़ बताया है। उनके मुताबिक यह भारी मालवाहक विमान है और सामरिक तथा लॉजिस्टिक दोनों तरह के मिशन कर सकता है।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दिल्ली के विनायक मंदिर में की पूजा: सरकार प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे, तमाम नेताओं ने दी बधाई
भारत से क्या-क्या सीख रहा है जर्मनी?
कैप्टन बर्न्स के मुताबिक, भारत में उड़ान भरना जर्मन वायुसेना के लिए सीखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने बताया कि जर्मन दल को भारतीय वायुसेना की योजना बनाने की प्रक्रिया को समझने का मौका मिला। बड़े हवाई अभ्यासों में किस तरह काम किया जाता है, इसका भी अनुभव मिला। उनके मुताबिक इस अभ्यास से भारतीय और जर्मन लड़ाकू विमानों तथा परिवहन विमानों के बीच तालमेल बढ़ा है। यही तरंग शक्ति का एक अहम मकसद भी है। अलग-अलग वायुसेनाएं साथ काम करें, एक-दूसरे की क्षमता समझें और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल बना सकें।
क्या सिर्फ विमान ही उड़ा रहे हैं सभी देश?
अभ्यास का दायरा सिर्फ उड़ान तक सीमित नहीं है। इसमें संयुक्त प्रशिक्षण के साथ-साथ हवाई सुरक्षा और संचालन की प्रक्रियाओं को समझना भी इसका हिस्सा है। अभ्यास में पेशेवर बातचीत के अलावा सेमिनार, औद्योगिक दौरा, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का दौरा और योग सत्र जैसी गतिविधियां भी रखी गई हैं। तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में हुआ था। 2026 का यह संस्करण उसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहा है।
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आखिर कितना बड़ा अभ्यास है तरंग शक्ति 2026?
तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है। इसका आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर हो रहा है। यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्तूबर तक चलेगा। इसका विषय ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी ‘साझेदारी में शक्ति’ है। भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं इसमें शामिल हैं। कई दूसरे मित्र देश पर्यवेक्षक के तौर पर भी जुड़े हैं।
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ऐसे अभ्यास में अलग-अलग देशों के विमानों को एक ही हवाई क्षेत्र में साथ उड़ाना अपने आप में बड़ी तैयारी मांगता है। हर देश के विमान, एयरक्रू और संचालन की अपनी प्रक्रियाएं होती हैं। तरंग शक्ति का मकसद इन्हीं अलग-अलग प्रक्रियाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अभ्यास में एयरक्रू के साथ मिशन प्लानर और ऑपरेशनल सपोर्ट से जुड़े कर्मचारी भी एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें दूसरे देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपने अनुभव साझा करने का मौका मिल रहा है।
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अभ्यास में शामिल हैं कौन-कौन से विमान?
तरंग शक्ति में इस बार लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं। विदेशी विमानों में F-35 लाइटनिंग II, राफेल, F-16, A400M, MRTT, C-130, C-130J और KC-30A शामिल हैं। अमेरिकी F-35A लाइटनिंग II की इस अभ्यास में भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही है। यह भारत में किसी अभ्यास में F-35 की पहली भागीदारी है। भारतीय और अमेरिकी विमानों के साथ दूसरे देशों के विमान भी संयुक्त प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं।
#WATCH | Indian Air Force shares video of Exercise Tarang Shakti 2026, which has brought together aircraft and aircrew from all participating nations in a shared formation, a powerful display of trust, precision and comradeship. (Video source: Indian Air Force) https://t.co/qaa4Z0IDCo
— ANI (@ANI) October 7, 2026
इस पूरे अभ्यास में क्या कर रहा है जर्मनी का ए400एम?
यही वह हिस्सा है जो इस अभ्यास की तस्वीर को और बड़ा बनाता है। जर्मनी अपना A400M सैन्य परिवहन विमान लेकर तरंग शक्ति में शामिल हुआ है। जर्मन वायुसेना के कैप्टन मॉरिस बर्न्स ने बताया कि इस बार A400M को बड़े लड़ाकू विमान अभियानों में भी शामिल किया जा रहा है। इसे लार्ज फोर्स एंगेजमेंट कहा जाता है। यानी यह सिर्फ सामान या सैनिकों को ले जाने वाला विमान बनकर अलग नहीं उड़ रहा, बल्कि बड़े लड़ाकू विमान अभ्यास का हिस्सा भी है। बर्न्स ने A400M को जर्मन वायुसेना के राष्ट्रीय बेड़े की रीढ़ बताया है। उनके मुताबिक यह भारी मालवाहक विमान है और सामरिक तथा लॉजिस्टिक दोनों तरह के मिशन कर सकता है।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दिल्ली के विनायक मंदिर में की पूजा: सरकार प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे, तमाम नेताओं ने दी बधाई
भारत से क्या-क्या सीख रहा है जर्मनी?
कैप्टन बर्न्स के मुताबिक, भारत में उड़ान भरना जर्मन वायुसेना के लिए सीखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने बताया कि जर्मन दल को भारतीय वायुसेना की योजना बनाने की प्रक्रिया को समझने का मौका मिला। बड़े हवाई अभ्यासों में किस तरह काम किया जाता है, इसका भी अनुभव मिला। उनके मुताबिक इस अभ्यास से भारतीय और जर्मन लड़ाकू विमानों तथा परिवहन विमानों के बीच तालमेल बढ़ा है। यही तरंग शक्ति का एक अहम मकसद भी है। अलग-अलग वायुसेनाएं साथ काम करें, एक-दूसरे की क्षमता समझें और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल बना सकें।
क्या सिर्फ विमान ही उड़ा रहे हैं सभी देश?
अभ्यास का दायरा सिर्फ उड़ान तक सीमित नहीं है। इसमें संयुक्त प्रशिक्षण के साथ-साथ हवाई सुरक्षा और संचालन की प्रक्रियाओं को समझना भी इसका हिस्सा है। अभ्यास में पेशेवर बातचीत के अलावा सेमिनार, औद्योगिक दौरा, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का दौरा और योग सत्र जैसी गतिविधियां भी रखी गई हैं। तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में हुआ था। 2026 का यह संस्करण उसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहा है।