फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Umar Khalid Documentary Row: Why Did IIIT Hyderabad Issue Disciplinary Warnings? Eight Students Served Notices

उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री विवाद: आईआईआईटी-हैदराबाद ने क्यों दी अनुशासनात्मक चेतावनी? आठ छात्रों को मिली नोटिस

Mon, 21 Sep 2026 07:53 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 21 Sep 2026 07:53 PM IST
सार
Register For Event

उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर आईआईआईटी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को अनुशासनात्मक चेतावनी दी है। संस्थान ने एनटीएनएस को गैर-अधिकृत समूह बताते हुए सोशल मीडिया और वेबसाइट से अपना नाम हटाने को कहा। छात्रों ने कार्रवाई के आधार और कथित गोपनीय बैठक की जानकारी पर सवाल उठाए हैं। संस्थान ने छात्रों के खिलाफ इतनी कड़ी चेतावनी क्यों जारी की और विवाद की शुरुआत कहां से हुई? आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...

विज्ञापन
Umar Khalid Documentary Row: Why Did IIIT Hyderabad Issue Disciplinary Warnings? Eight Students Served Notices
उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग से पहले आठ छात्रों पर कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की कैंपस में प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर विवाद के बीच इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को अनुशासनात्मक चेतावनी जारी की है। ये छात्र नो टायरेंट्स, नो साइलेंस यानी एनटीएनएस नाम के स्वतंत्र कैंपस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। संस्थान ने कहा है कि एनटीएनएस आईआईआईटी-हैदराबाद का अधिकृत या मान्यता प्राप्त संगठन नहीं है। यह कार्रवाई 18 सितंबर को जारी नोटिस के जरिए की गई।

विज्ञापन


मामला उस समय सामने आया जब एनटीएनएस ने 18 सितंबर को कैंपस में प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट नाम की डॉक्यूमेंट्री दिखाने का प्रस्ताव रखा। यह डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार ललित वाचानी ने बनाई है और इसमें जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद से जुड़ा विषय है। इससे पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कहा था कि बिना प्रमाणित डॉक्यूमेंट्री की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के लिए विशेष छूट जरूरी है। इसके बाद स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई। आईआईआईटी-हैदराबाद ने भी कहा कि संस्थान या उसके किसी मान्यता प्राप्त छात्र संगठन ने इस स्क्रीनिंग का आयोजन नहीं किया था।

विज्ञापन

आईआईआईटी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को क्या चेतावनी दी?

रजिस्ट्रार प्रोफेसर केएस राजन के हस्ताक्षर से 18 सितंबर को तत्काल अनुपालन का नोटिस और अनुशासनात्मक चेतावनी’ जारी की गई। संस्थान ने छात्रों पर एनटीएनएस के नाम से ऐसे सोशल मीडिया हैंडल, ऑनलाइन पेज और वेबसाइट चलाने का आरोप लगाया, जिनमें आईआईआईटी-हैदराबाद का नाम प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया था। नोटिस में आंतरिक बैठकों की कार्यवाही प्रकाशित करने का भी आरोप लगाया गया। संस्थान ने इन कार्यवाहियों को गोपनीय बताते हुए कहा कि इन्हें केवल आंतरिक प्रशासन के लिए रखा गया था। छात्रों को चार घंटे के भीतर संस्थान के नाम से जुड़े ऐसे कंटेंट हटाने को कहा गया। नोटिस में चेतावनी दी गई कि 18 सितंबर रात 8.30 बजे तक निर्देश का पालन नहीं हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है और इसमें संस्थान से निष्कासन तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

छात्रों ने संस्थान की कार्रवाई पर क्या सवाल उठाए?

कुछ छात्रों ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर संस्थान के नोटिस का जवाब दिया। उन्होंने कार्रवाई का आधार पूछते हुए कहा कि संस्थान उन नियमों को स्पष्ट करे, जो छात्रों को स्वतंत्र समूह बनाने, अपनी लिखी सामग्री प्रकाशित करने या खुद को आईआईआईटी-हैदराबाद का छात्र बताने से रोकते हैं। छात्रों ने यह भी कहा कि एनटीएनएस की ओर से प्रकाशित सामग्री को जिस आंतरिक बैठक की गोपनीय कार्यवाही बताया गया है, वह बैठक सभी के लिए खुली थी। उनके मुताबिक, बैठक में शामिल लोगों को यह नहीं बताया गया था कि उसकी कार्यवाही गोपनीय है।

एनटीएनएस पहले से कैंपस में क्या गतिविधियां कर रहा था?

एनटीएनएस डॉक्यूमेंट्री विवाद से पहले भी कैंपस में चर्चा और संवाद आयोजित करता रहा है। मार्च में उसने ‘हू डज योर साइलेंस प्रोटेक्ट?’ नाम से एक चर्चा की थी। इसमें उन छात्रों को भी आमंत्रित किया गया था, जो मानते थे कि वे संस्थान में पढ़ाई करने आए हैं, राजनीति करने नहीं। चर्चा में कैंपस की मेस नीति और अनुशासनात्मक प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर छात्रों की भागीदारी और फैसलों पर सवाल उठाने की जरूरत पर चर्चा की गई। एनटीएनएस ने जाति और संस्थान की प्रवेश व्यवस्था पर भी एक दस्तावेज जारी किया था। इसमें कहा गया कि संस्थान में जाति आधारित आरक्षण नहीं है और पीढ़ियों से जमा जातिगत तथा आर्थिक फायदे मेरिट आधारित चयन को प्रभावित कर सकते हैं। समूह ने तकनीकी काम के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव तथा समाज में इंजीनियरों की भूमिका पर भी चर्चा की। इसके अलावा उसने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को छात्रों से बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।

डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर संस्थान ने क्या कहा था?

17 सितंबर को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कहा था कि ऐसी डॉक्यूमेंट्री की सार्वजनिक स्क्रीनिंग, जिसे उसने प्रमाणित नहीं किया है, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का उल्लंघन होगी, जब तक इसके लिए विशेष छूट नहीं ली जाती। बोर्ड ने प्रस्तावित स्क्रीनिंग के संदर्भ में आईआईआईटी-हैदराबाद को टैग करते हुए संस्थान से आवश्यक कार्रवाई पर ध्यान देने को कहा था। इसके बाद संस्थान ने प्रस्तावित स्क्रीनिंग से खुद को अलग कर लिया। आईआईआईटी-हैदराबाद ने कहा कि न तो संस्थान और न ही उसके किसी मान्यता प्राप्त छात्र क्लब, सेल या संगठन ने स्क्रीनिंग आयोजित की थी। संस्थान ने यह भी कहा कि आधिकारिक कैंपस कार्यक्रमों के लिए तय प्रक्रियाएं लागू हैं और किसी अनधिकृत गतिविधि को संस्थान या उसके मान्यता प्राप्त छात्र संगठनों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed