आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल पर घमासान: राहुल के आरोपों पर मंत्री अशोक उइके का पलटवार, कहा- आप देर से आते हैं
महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने पुणे में आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी पर पलटवार किया है। उइके ने राहुल गांधी पर मुद्दे पर देर से प्रतिक्रिया देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को सही जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया।
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महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने पुणे के आदिवासी छात्रावासों में 30 साल की उम्र सीमा, कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट, असुरक्षित सुविधाओं और अन्य नियमों का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। वहीं उइके ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सही जानकारी नहीं दी गई और उनके आने से पहले ही छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। छात्रों की मांगों में सरकारी आदेश वापस लेना, उम्र सीमा खत्म करना या 36 साल करना, छात्रावास सुविधाओं में सुधार, गढ़चिरौली में सांप के काटने से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा PESA एक्ट को सख्ती से लागू करने और आदिवासी नीतियां बनाते समय छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
'छात्रों की मांग पर उम्र सीमा 30 साल तक बढ़ाई गई'
उइके ने राहुल गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट का आरोप लगाया था। मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक छुट्टी पर रहने वाले छात्रों से स्वास्थ्य की स्थिति स्पष्ट करने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा जाता है, लेकिन प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने की बात पूरी तरह गलत है और ऐसा कोई नियम या जांच नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल में रहने की उम्र सीमा को 30 साल तक बढ़ाया गया था। उइके ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उनका मामला अलग है और वे किसी मुद्दे को कितनी भी बार शुरू करें, वह असफल ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी छात्रों की समस्याओं को सरकार गंभीरता से ले रही है और उनकी मांगों पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
सांप के काटने की घटनाओं पर कांग्रेस नेताओं को घेरा
आदिवासी आवासीय स्कूलों में सुविधाओं की कमी और सांप के काटने की घटनाओं को लेकर भी उइके ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में ऐसी घटनाएं हुई हैं या जहां अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, उनमें कुछ स्कूल कांग्रेस के पूर्व सांसद मारोतराव कोवासे और पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. वसंत पुरके जैसे नेताओं से जुड़े हैं। उइके ने कहा कि ये सभी कांग्रेस नेता हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र के सभी छात्रों को, चाहे वे किसी भी समुदाय से हों, महागठबंधन सरकार जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार सक्षम है और व्यवस्था में सुधार का काम चल रहा है तथा आगे भी जारी रहेगा।
उइके का राहुल गांधी पर पर्यटन को लेकर तंज
मंत्री ने राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि उन्हें अपनी यात्राओं का दायरा झारखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और केरल तक भी बढ़ाना चाहिए। उइके की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब आदिवासी छात्रों के आंदोलन को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
राहुल गांधी ने फडणवीस से मांगा था तत्काल हस्तक्षेप
इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पुणे में आदिवासी छात्रों की 10 दिनों से चल रही भूख हड़ताल के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। राहुल गांधी ने एक्स पर अपना पत्र और छात्रों का ज्ञापन साझा करते हुए सरकारी छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी छात्रों की समस्याओं और कथित 'अपमानजनक नियमों' का मुद्दा उठाया। 24 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान छात्राओं की ओर से बताई गई परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई आदिवासी छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर 10 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं।
30 साल की उम्र सीमा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट पर सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राज्य के आदिवासी छात्रावासों में 30 साल की उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट जैसे नियम लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने इन व्यवस्थाओं को छात्रों की गरिमा के खिलाफ बताया। नए नियम के तहत 30 साल की उम्र सीमा तय किए जाने का दावा है। इससे अधिक उम्र के आदिवासी छात्र छात्रावासों में रहने से वंचित हो सकते हैं, जबकि कई छात्र उच्च शिक्षा पूरी कर रहे हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। छात्राओं को लेकर भी आरोप लगाया गया है कि लंबे समय तक हॉस्टल से बाहर रहने के बाद वापस लौटने पर उन्हें अपनी 'फिटनेस' साबित करने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट और अन्य चिकित्सकीय जांच से गुजरना पड़ता है। राहुल गांधी ने इसे छात्राओं की गरिमा और मानवाधिकारों पर हमला बताया।
हॉस्टलों में भोजन, सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर शिकायतें
आदिवासी छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर भी लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन, साफ-सफाई तथा मेडिकल इमरजेंसी की व्यवस्था प्रमुख हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ छात्रावास परिसरों में सांप के काटने की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें छात्रों को गंभीर चोटें आईं और कुछ मामलों में मौत की भी खबर सामने आई। इन्हीं समस्याओं को लेकर छात्र सरकार से छात्रावासों की व्यवस्था में व्यापक सुधार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
सरकारी आदेश वापस लेने और उम्र सीमा खत्म करने की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में 5 अगस्त और 14 अगस्त को जारी सरकारी आदेशों यानी GRs को तत्काल वापस लेना शामिल है। इसके अलावा वे 11 नवंबर 2011 के सरकारी आदेश में संशोधन की मांग कर रहे हैं, ताकि मौजूदा महंगाई के अनुरूप छात्रावास भत्ते और अन्य आर्थिक प्रावधानों में बदलाव किया जा सके। छात्र सरकारी आदिवासी छात्रावासों में प्रवेश के लिए उम्र सीमा पूरी तरह खत्म करने या मौजूदा 30 साल की सीमा को बढ़ाकर 36 साल करने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आदिवासी कल्याण से जुड़ी नीतियां बनाते समय छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
18 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
इससे पहले 18 अगस्त को आदिवासी छात्रों ने पुणे के मांजरी इलाके स्थित आदिवासी छात्रावास में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। छात्रों ने शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और छात्रावासों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। यह आंदोलन 13 अगस्त से आदिवासी छात्रों की शैक्षिक, सामाजिक और अन्य समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के प्रयासों के बीच तेज हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने 5 अगस्त को जारी सरकारी आदेश को भी अन्यायपूर्ण बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की थी।
गढ़चिरौली में तीन छात्राओं की मौत पर एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों की एक प्रमुख मांग गढ़चिरौली के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में सांप के काटने से कथित तौर पर जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना है। छात्रों ने इस घटना के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या यानी 'culpable homicide' का आपराधिक मामला दर्ज करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि घटना की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
PESA एक्ट और जाति वैधता प्रमाण पत्र से जुड़े आदेश भी निशाने पर
आदिवासी छात्रों ने भर्ती विज्ञापनों में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा खून के रिश्तों के आधार पर जाति वैधता प्रमाण पत्र और बंजारा अध्ययन समिति से संबंधित दोनों सरकारी आदेशों को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। छात्रों का आंदोलन अब केवल छात्रावासों की सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक व्यवस्था, आदिवासी अधिकार और सरकारी नीतियों में भागीदारी जैसे व्यापक मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।
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सरकार के सामने छात्रों की मांगें पूरी करने की चुनौती
एक तरफ राहुल गांधी ने आदिवासी छात्रों की शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, वहीं मंत्री अशोक उइके ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि आदिवासी छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी और व्यवस्था में सुधार जारी रहेगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी उम्र सीमा, छात्रावास सुविधाओं, सुरक्षा, मुआवजे और आदिवासी नीतियों में छात्रों की भागीदारी जैसी मांगों पर ठोस फैसले चाहते हैं। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।