फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why Is Starlink India Approval Delayed Nishikant Dubey Panel to Discuss Issue, Musk’s Allegations May Come Up

स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में देरी क्यों?: निशिकांत दुबे की समिति करेगी मंथन, मस्क के आरोपों पर भी चर्चा संभव

Wed, 14 Oct 2026 06:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 14 Oct 2026 06:20 PM IST
सार
Register For Event

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने में देरी को लेकर एलन मस्क ने कारोबारी समूहों पर आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार ने भेदभाव के दावों को खारिज किया है। अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। स्टारलिंक, जियो और यूटेलसैट वनवेब मंजूरी की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में क्या समिति की चर्चा से विवाद सुलझेगा और भारत में सेवा शुरू होने का रास्ता साफ होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Why Is Starlink India Approval Delayed Nishikant Dubey Panel to Discuss Issue, Musk’s Allegations May Come Up
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने के लिए कौन-कौन तैयार? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक और सरकार के बीच चल रही बहस के बीच संसद की एक समिति इस मुद्दे की विस्तार से जांच करेगी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सैटेलाइट इंटरनेट को चर्चा के लिए चुना है। ऐसे में सवाल है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने में देरी क्यों हो रही है और क्या इस मामले में कारोबारी हितों को लेकर उठे आरोपों पर भी चर्चा होगी?

विज्ञापन


समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने 14 अक्तूबर को बैठक के बाद बताया कि आने वाले दिनों में सैटेलाइट इंटरनेट के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्टारलिंक ने भारत में सेवा शुरू करने की मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने आरोप लगाया है कि कुछ ताकतवर कारोबारी समूह उनकी कंपनी की भारत में एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सरकार ने नियामकीय प्रक्रिया में भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है।
विज्ञापन


स्टारलिंक की एंट्री को लेकर मस्क ने क्या आरोप लगाए?
एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कई पोस्ट कर भारत में स्टारलिंक की सेवा शुरू करने में देरी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर संबोधित किया और सवाल उठाया कि क्या भारत के फैसलों पर उनका प्रभाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी ज्यादा है। मस्क ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कारोबारी समूह भारतीय उपभोक्ताओं पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। इन आरोपों पर संचार मंत्रालय ने कहा कि नियामकीय नियमों को अनुचित या भेदभावपूर्ण बताने वाले दावे बेबुनियाद और गलत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने के लिए कौन-कौन तैयार है?
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन किया है। इनमें मस्क की स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट शामिल हैं। जियो सैटकॉम, रिलायंस जियो की सैटेलाइट सेवा से जुड़ी इकाई है, जबकि यूटेलसैट वनवेब को भारती का समर्थन प्राप्त है। भारती, एयरटेल का संचालन करती है। इसके अलावा, अमेजन की प्रोजेक्ट कुइपर ने भी भारत में सेवा शुरू करने में रुचि दिखाई है। हालांकि, उसे भी तय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

लाइसेंस मिलने के बाद भी सेवा क्यों शुरू नहीं हो पा रही है?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को सैटेलाइट संचार लाइसेंस मिल चुके हैं। लेकिन लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी तुरंत व्यावसायिक सेवा शुरू कर सकती है। इसके लिए सुरक्षा संबंधी मंजूरी और स्पेक्ट्रम का आवंटन भी जरूरी है। सरकार के मुताबिक, तीनों कंपनियां मंजूरी की प्रक्रिया में लगभग एक ही स्तर पर हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण और दूरसंचार विभाग सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने के मामले में फैसले के करीब हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप देना भी जरूरी है।


क्या संसदीय समिति से विवाद पर स्थिति साफ होगी?
निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति आने वाले दिनों में सैटेलाइट इंटरनेट के मुद्दे पर विस्तार से विचार करेगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समिति किन खास सवालों पर चर्चा करेगी या कब तक कोई निष्कर्ष सामने आएगा। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि कंपनियों को सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन कब तक मिलेंगे। साथ ही, मस्क के कारोबारी एकाधिकार से जुड़े आरोपों और सरकार के जवाब पर भी नजर रहेगी। फिलहाल सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों को समान नियमों और सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed