जम्मू-कश्मीर विधानसभा में फिर घमासान: फारूक अब्दुल्ला पर बयान को लेकर भी बवाल, 'वोट चोर' के नारों से गूंजा सदन
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को सोमवार की कार्यवाही और प्रस्ताव को लेकर भाजपा व नेकां-कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी बहस और जमकर नारेबाजी हुई। डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बयान को लेकर नेकां ने भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया से माफी की मांग की।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा की मंगलवार की कार्यवाही शुरू होते ही सोमवार को सदन में पारित प्रस्ताव को लेकर भाजपा और सत्तारूढ़ दल के विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सोमवार की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह गैर-संवैधानिक था। उन्होंने स्पीकर से पद छोड़ने की मांग भी की।
सुनील शर्मा के बयान पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक भड़क गए और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। दोनों पक्षों के विधायकों के बीच तीखी तकरार को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर बैठने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत चलती है और वह पहले ही अपनी रूलिंग दे चुके हैं। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदन में किसी भी तरह की गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी।
इस दौरान भाजपा विधायक शामलाल शर्मा ने भी आपत्ति जताई और सदन में शोरगुल जारी रहा। उपमुख्यमंत्री ने स्पीकर का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने सदस्यों को बहस करने का अवसर दिया।
हंगामे के बीच भाजपा विधायकों की ओर से नारेबाजी की गई। वहीं, कांग्रेस विधायकों ने भी भाजपा के खिलाफ वोट चोर, चंदा चोर के नारे लगाए। भाजपा विधायकों की ओर से 'चोर-चोर मसेरे भाई' और 'अली बाबा 40 चोर' जैसे नारे लगाए गए।
इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया द्वारा डॉ. फारूक अब्दुल्ला को राष्ट्रविरोधी और जेकेएलएफ का संस्थापक बताए जाने पर आपत्ति जताई। नेकां विधायकों ने मनकोटिया से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग की।
हंगामे के दौरान भाजपा विधायकों ने कुछ समय के लिए सदन से वॉकआउट किया। हालांकि बाद में सीपी गंगा, पवन गुप्ता, एसएस सलाथिया, विक्रम रंधावा, देवयानी राणा, शगुन परिहार समेत अन्य भाजपा विधायक सदन में लौट आए। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा सहित भाजपा के अन्य विधायक भी सदन में वापस आ गए।
भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी के दौरान प्रश्नकाल जारी रहा। बाद में उनके सदन में लौटने के साथ ही विधानसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई।