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पीओजेके की हालत हुई दयनीय: घर में बढ़ा संकट तो सीमा पर साजिश! भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाने की फिराक में पाकिस्तान

Tue, 08 Sep 2026 03:06 PM IST
Nikita Gupta अभिषेक राज अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अभिषेक राज अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 08 Sep 2026 03:06 PM IST
सार
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पाकिस्तान बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओजेके में बढ़ते आंतरिक संकट से जूझ रहा है। इस बीच भारतीय सीमा पर सेना की बढ़ती सक्रियता को आंतरिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की संभावित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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A plot to escalate tensions at the border by a Pakistan besieged by internal troubles.
सुरक्षाबल - फोटो : ani

विस्तार

बलूच संगठनों के हमले, खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की सक्रियता, अफगान सीमा पर तनाव और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी असंतोष से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान भारतीय सीमा पर तनाव बढ़ाने की साजिश रच रहा है। इसी क्रम में उसने बॉर्डर पर रेंजर के साथ सेना को भी तैनात करना शुरू कर दिया है। कश्मीर व जम्मू संभाग के कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तान में बैठे आतंकियों और उनके स्थानीय मददगारों की आपसी बातचीत इंटरसेप्ट की गई है। इसके बाद सेना, सीआरपीएफ व पुलिस ने सक्रियता बढ़ाई है।

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सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जम्वाल बताते हैं कि पाकिस्तानी सेना ने सितंबर की शुरुआत में बलूचिस्तान में तीन दिन के अभियानों के दौरान 48 बलूच आंदोलनकारियों को मारने का दावा किया। इससे पहले एन-40 क्वेटा-तफ्तान हाईवे पर विद्रोहियों की ओर से नाका लगाकर वसूली करने और पिशीन में कस्टम्स हाउस पर हमले जैसी घटनाएं सामने आईं। यानी चुनौती अब केवल दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा बलों पर हमलों तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी वहां की महत्वपूर्ण सड़कों और सरकारी प्रतिष्ठानों तक पहुंच गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 28 अगस्त से तीन सितंबर के बीच पाकिस्तान में आंदोलनकारियों के हमलों की संख्या एक सप्ताह में 40 से बढ़कर 61 हो गई। इसी अवधि में हिंसा में मरने वालों की संख्या 32 से बढ़कर 74 तक पहुंच गई। बलूचिस्तान हिंसा का प्रमुख केंद्र रहा, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में भी आंदोलन जोर पकड़ते जा रहा है। पीओके की हालत भी दयनीय हो गई है।

बलूचिस्तान-खैबर से अफगान सीमा तक दबाव
बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और अन्य बलूच समूहों की गतिविधियों के साथ टीटीपी ने भी पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान की चुनौती बढ़ाई है। अफगान सीमा पर तनाव इस दबाव को और बढ़ा रहा है। सितंबर की शुरुआत में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान से उत्तरी वजीरिस्तान में प्रवेश की कोशिश कर रहे 15 टीटीपी सदस्यों को मारने का दावा किया।

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पीओजेके की हालत गंभीर
आंतरिक दबाव केवल बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में आंदोलन लंबे समय से पाकिस्तान सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

जून में आंदोलन के दौरान हिंसक झड़पों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ा। जुलाई में पीओजेके विधानसभा चुनाव के दौरान भी क्षेत्र में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अलावा पाकिस्तानी सेना के जवान भी तैनात रहे।

रेंजर्स के साथ सेना की मौजूदगी पर सवाल
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर रेंजर्स की प्रमुख भूमिका है, जबकि नियंत्रण रेखा पर नियमित पाकिस्तानी सेना की तैनाती रहती है। लेकिन मौजूदा आंतरिक सुरक्षा संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास पाकिस्तानी सेना की गतिविधियां असामान्य रूप से बढ़ी हैं। इसे पाकिस्तान की ओर से सीमा पर तनाव बढ़ाकर आंतरिक मुद्दों से पूरे विश्व का ध्यान भटकाने की साजिश माना जा रहा है।

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