जम्मू-कश्मीर: रेलवे कर्मचारियों को झटका, तबादला आदेश ठुकराया तो एक साल तक नहीं मिलेगा मौका
रेलवे बोर्ड ने स्वयं के अनुरोध पर तबादला लेने के बाद आदेश ठुकराने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त नियम लागू किए हैं। ऐसे कर्मचारी भविष्य में एसबीआरटी योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे और एक साल तक सामान्य प्रक्रिया के तहत अंतर रेलवे या अंतर मंडलीय तबादले के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे।
विस्तार
रेलवे बोर्ड ने स्वयं के अनुरोध पर तबादले की प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सेवा अवधि आधारित अनुरोध तबादला (एसबीआरटी) योजना के तहत तबादला आदेश जारी होने के बाद इससे इन्कार करने वाले कर्मचारियों को भविष्य में इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही, ऐसे कर्मचारी एक साल तक सामान्य प्रक्रिया के तहत अंतर रेलवे अनुरोध तबादला (आईआरआरटी) और अंतर मंडलीय अनुरोध तबादला के लिए भी आवेदन नहीं कर सकेंगे।
रेलवे बोर्ड के उपनिदेशक अवस्थापना संजय कुमार ने 29 अक्तूबर को जारी आदेश में यह व्यवस्था लागू की है। यह नियम उन अराजपत्रित कर्मचारियों पर लागू होगा, जिन्होंने 20 साल से अधिक की नियमित सेवा पूरी कर ली है। ऐसे कर्मचारियों को एसबीआरटी योजना के तहत स्वयं के अनुरोध पर तबादले में प्राथमिकता दी जाती है।
एचआरएमएस पोर्टल पर दर्ज करा सकेंगे असहमति
तबादला आदेश जारी होने के बाद यदि कोई कर्मचारी स्थानांतरण पर जाने से इन्कार करता है या अपनी अनिच्छा जताता है तो वह मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) पोर्टल पर इसकी सूचना दर्ज करा सकेगा। इसके लिए अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। इनकार की तारीख से अगले एक साल तक कर्मचारी आईआरआरटी और आईडीआरटी के लिए आवेदन नहीं कर पाएगा।
एक साल बाद बहाल होगी प्राथमिकता
प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी की तबादला प्राथमिकता आवेदन की मूल तारीख के आधार पर बहाल की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को एचआरएमएस के तबादला मॉड्यूल में जरूरी तकनीकी बदलाव करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि कर्मचारियों की असहमति दर्ज करने और निर्धारित प्रतिबंध लागू करने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।