जम्मू-कश्मीर: नरवाल की बस्ती में दिनभर हलचल, रात में अपने ही आशियाने समेटते दिखे रोहिंग्या
नरवाल की रोहिंग्या बस्ती में दिनभर की कार्रवाई के बाद रात में कई लोग खुद ही अपनी झुग्गियां और अस्थायी ढांचे हटाते नजर आए। प्लॉट मालिकों की ओर से जगह खाली करवाए जाने की आशंका के चलते बस्ती के लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना रहा।
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दिनभर नरवाल की रोहिंग्या बस्ती में चले घटनाक्रम के बाद रात होते-होते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जहां दिन में कार्रवाई और टूटते ढांचों की आवाज सुनाई दे रही थी, वहीं रात में बस्ती के लोगों के चेहरों पर डर साफ नजर आया। इस बार प्रशासन या पुलिस ने दुकानें और झुग्गियां नहीं तोड़ीं, बल्कि खुद रोहिंग्याओं ने अपने अस्थायी ढांचे हटा रहे थे। रात तक बस्ती में टूटे टीन, लकड़ियां और सामान सड़कों के किनारे बिखरा पड़ा था।रात करीब आठ बजे मौके का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।
अंधेरे में कई रोहिंग्या अपने टूटे ढांचों से सामान निकालकर सुरक्षित जगह ले जाते दिखे। कहीं टीन की चादरें पड़ी थीं तो कहीं लकड़ियों का ढेर लगा था। दिनभर जिन जगहों पर दुकानें और झुग्गियां थीं, वहां मलबा नजर आ रहा था। रोहिंग्या सड़क किनारे समूह बनाकर खड़े थे और पूरे घटनाक्रम को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे।
रात में बस्ती में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि आगे क्या होगा। रोहिंग्या को आशंका है कि जिस तरह कुछ स्थान खाली करवाए गए हैं, उसी तरह आने वाले दिनों में प्लाट मालिक दूसरी झुग्गियों को भी खाली करने के लिए कह सकते हैं। यही डर अब बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है।
कई लोग अपने सामान को समेटने और सुरक्षित जगह तलाशने को लेकर चिंतित दिखे।मौके पर मौजूद लोगों के बीच बार-बार यही सवाल उठता रहा कि आज कुछ ढांचे हटे हैं, कल किसकी बारी होगी? दिनभर की कार्रवाई के बाद रात में बस्ती में पसरा सन्नाटा और मलबे के बीच खड़े टूटे ढांचे इस बदले हुए माहौल की कहानी खुद बयां कर रहे थे