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झारखंड: बिना जांच-पड़ताल स्कूलों को दे दी स्थापना की अनुमति, जैक की लापरवाही पर विभाग सख्त
Fri, 30 Oct 2026 07:47 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 30 Oct 2026 07:47 PM IST
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। बिना जांच-पड़ताल और दस्तावेजों की समीक्षा के कई वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों को स्थापना की अनुमति देने का मामला सामने आया है।
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झारखंड एकेडमिक काउंसिल
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने बिना किसी जांच-पड़ताल और दस्तावेज की समीक्षा के कई वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों को स्थापना की अनुमति दे दी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर की अध्यक्षता में आयोजित अनुदान समिति की बैठक में यह गंभीर अनियमितता उजागर हुई। इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 107 माध्यमिक विद्यालयों के अनुदान अपीलों को खारिज कर दिया है।
दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
विभागीय अनुदान समिति ने इस पूरे प्रकरण को झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति (शर्त एवं बंधेज) नियमावली, 2008 के प्रावधानों के विरुद्ध पाया है। समिति ने जैक को पत्र भेजकर इस विषय में स्पष्टीकरण मांगने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही, गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। विभाग इस दिशा में जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
मानकों की अनदेखी पर लगी रोक
राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों को भी अनुदान प्रदान करती है। सामान्य प्रक्रिया के तहत जैक पहले विद्यालयों को स्थापना अनुमति देता है, जिसके बाद मानक पूरे होने पर स्थायी प्रस्वीकृति दी जाती है। हालांकि, जांच में गड़बड़ी सामने आने पर समिति ने संबंधित विद्यालयों का अनुदान रोक दिया है। जिन 107 विद्यालयों के आवेदन खारिज हुए हैं, उनमें से 28 स्कूलों की अपील निर्धारित शर्तें पूरी न करने के कारण निरस्त की गई।
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भौतिक निरीक्षण में सामने आईं खामियां
निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में व्यापक कमियां पाई गईं। अधिकांश विद्यालयों में विधिवत शासी निकाय का गठन ही नहीं हुआ था। इसके बावजूद उन्हें स्थापना अनुमति दे दी गई। दुमका स्थित विजय राय जनजाति माध्यमिक विद्यालय में मानक के अनुरूप स्थान के बजाय केवल छह वर्गकक्ष मिले।
ये भी पढ़ें- झारखंड: मासूम की जिंदगी बचाने के लिए जमशेदपुर पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर, 15 मिनट में एंबुलेंस को निकाला
दुमका के ही सूरज मंडल माध्यमिक विद्यालय में केवल तीन वर्गकक्ष उपलब्ध थे, जहां कागजों पर दिखाए गए नामांकन के सापेक्ष विद्यार्थियों की उपस्थिति न के बराबर पाई गई। इसके अलावा, सरायकेला खरसावां स्थित शास्त्री स्मारक हाई स्कूल में शासी निकाय का गठन नियमसंगत नहीं था। कई विद्यालयों ने अनुमति प्राप्त करने के वर्षों बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति के मानक पूरे नहीं किए थे।
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दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
विभागीय अनुदान समिति ने इस पूरे प्रकरण को झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति (शर्त एवं बंधेज) नियमावली, 2008 के प्रावधानों के विरुद्ध पाया है। समिति ने जैक को पत्र भेजकर इस विषय में स्पष्टीकरण मांगने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही, गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। विभाग इस दिशा में जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
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मानकों की अनदेखी पर लगी रोक
राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों को भी अनुदान प्रदान करती है। सामान्य प्रक्रिया के तहत जैक पहले विद्यालयों को स्थापना अनुमति देता है, जिसके बाद मानक पूरे होने पर स्थायी प्रस्वीकृति दी जाती है। हालांकि, जांच में गड़बड़ी सामने आने पर समिति ने संबंधित विद्यालयों का अनुदान रोक दिया है। जिन 107 विद्यालयों के आवेदन खारिज हुए हैं, उनमें से 28 स्कूलों की अपील निर्धारित शर्तें पूरी न करने के कारण निरस्त की गई।
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भौतिक निरीक्षण में सामने आईं खामियां
निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में व्यापक कमियां पाई गईं। अधिकांश विद्यालयों में विधिवत शासी निकाय का गठन ही नहीं हुआ था। इसके बावजूद उन्हें स्थापना अनुमति दे दी गई। दुमका स्थित विजय राय जनजाति माध्यमिक विद्यालय में मानक के अनुरूप स्थान के बजाय केवल छह वर्गकक्ष मिले।
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दुमका के ही सूरज मंडल माध्यमिक विद्यालय में केवल तीन वर्गकक्ष उपलब्ध थे, जहां कागजों पर दिखाए गए नामांकन के सापेक्ष विद्यार्थियों की उपस्थिति न के बराबर पाई गई। इसके अलावा, सरायकेला खरसावां स्थित शास्त्री स्मारक हाई स्कूल में शासी निकाय का गठन नियमसंगत नहीं था। कई विद्यालयों ने अनुमति प्राप्त करने के वर्षों बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति के मानक पूरे नहीं किए थे।