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झारखंड: इको टूरिज्म का नया प्लान, जंगलों से लेकर जलप्रपातों तक प्राकृतिक स्थलों की होगी मैपिंग
Mon, 21 Sep 2026 04:14 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 21 Sep 2026 04:14 PM IST
झारखंड सरकार ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्राकृतिक, ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों की मैपिंग शुरू की है। जंगलों, पहाड़ों और जलप्रपातों का सर्वेक्षण कर पर्यटन की संभावनाएं तलाशने के साथ स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
झारखंड में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्राकृतिक स्थलों और जलप्रपातों की व्यापक मैपिंग कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थित प्राकृतिक, ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों का विस्तृत ब्योरा तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम राज्यभर में मौजूद ऐसे प्राकृतिक स्थलों की तलाश और अध्ययन कर रही है, जो अब तक मुख्य पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान दर्ज नहीं करा सके हैं। इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य राज्य में पर्यटन विकास को गति देने के साथ-साथ पर्यावरण का संरक्षण करना तथा स्थानीय नागरिकों के लिए आजीविका और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
जंगलों से जलप्रपातों तक हो रहा सर्वेक्षण
विशेषज्ञों का दल जंगलों, पहाड़ों, नदियों और जलप्रपातों का अध्ययन कर रहा है। सर्वेक्षण के दौरान टीम संभावित स्थलों तक पहुंचने के रास्ते, उनकी प्राकृतिक विशेषताएं, आसपास का वातावरण तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े और जानकारी एकत्र कर रही है। झारखंड में कई छोटे और बड़े जलप्रपात मौजूद हैं, जो अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। मैपिंग के माध्यम से इन सभी जलप्रपातों की वर्तमान स्थिति, आसपास के प्राकृतिक परिवेश और विकास की गुंजाइश का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में प्राथमिकता के आधार पर वहां आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा सकें।
ग्रामीणों के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
इको टूरिज्म के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार और आय के नए साधन सृजित होंगे। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, प्रांतीय खान-पान, होम-स्टे तथा टूर गाइड जैसी सेवाओं को व्यापक बढ़ावा मिलेगा। सरकार ग्रामीण आबादी को इन सेवाओं और गतिविधियों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। इस व्यवस्था से ग्रामीण निवासियों को अपने ही क्षेत्र में स्थायी रोजगार मिलेगा, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक उत्थान संभव हो सकेगा।
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पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
इस योजना का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का ढांचागत विकास करना ही नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण करना भी है। संभावित पर्यटन स्थलों का चयन और विकास करते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। चतरा के उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी राहुल मीना ने बताया कि विभिन्न जिलों में मौजूद प्राकृतिक, ऐतिहासिक तथा दर्शनीय स्थलों की पहचान करके उनका प्रामाणिक ब्योरा तैयार करना सरकार का एक सराहनीय और दूरगामी कदम है। इस मैपिंग व्यवस्था से राज्य के प्राकृतिक स्थलों का एक सुदृढ़ आधार तैयार होगा, जो झारखंड को देश में इको टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मददगार साबित होगा।
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जंगलों से जलप्रपातों तक हो रहा सर्वेक्षण
विशेषज्ञों का दल जंगलों, पहाड़ों, नदियों और जलप्रपातों का अध्ययन कर रहा है। सर्वेक्षण के दौरान टीम संभावित स्थलों तक पहुंचने के रास्ते, उनकी प्राकृतिक विशेषताएं, आसपास का वातावरण तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े और जानकारी एकत्र कर रही है। झारखंड में कई छोटे और बड़े जलप्रपात मौजूद हैं, जो अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। मैपिंग के माध्यम से इन सभी जलप्रपातों की वर्तमान स्थिति, आसपास के प्राकृतिक परिवेश और विकास की गुंजाइश का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में प्राथमिकता के आधार पर वहां आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा सकें।
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ग्रामीणों के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
इको टूरिज्म के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार और आय के नए साधन सृजित होंगे। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, प्रांतीय खान-पान, होम-स्टे तथा टूर गाइड जैसी सेवाओं को व्यापक बढ़ावा मिलेगा। सरकार ग्रामीण आबादी को इन सेवाओं और गतिविधियों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। इस व्यवस्था से ग्रामीण निवासियों को अपने ही क्षेत्र में स्थायी रोजगार मिलेगा, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक उत्थान संभव हो सकेगा।
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पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
इस योजना का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का ढांचागत विकास करना ही नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण करना भी है। संभावित पर्यटन स्थलों का चयन और विकास करते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। चतरा के उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी राहुल मीना ने बताया कि विभिन्न जिलों में मौजूद प्राकृतिक, ऐतिहासिक तथा दर्शनीय स्थलों की पहचान करके उनका प्रामाणिक ब्योरा तैयार करना सरकार का एक सराहनीय और दूरगामी कदम है। इस मैपिंग व्यवस्था से राज्य के प्राकृतिक स्थलों का एक सुदृढ़ आधार तैयार होगा, जो झारखंड को देश में इको टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मददगार साबित होगा।