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                                                                           नील गगन के नीरव तट पर संध्या ने जब पंख पसारे,
म्लान चाँदनी में डूब गए तब मेरे स्वप्नों के उजियारे।

मंद पवन की करुण लहरियाँ जब सूने उपवन से आईं,
झरते पर्णों की भाषा में जाने कितनी स्मृतियाँ गाईं।

दूर क्षितिज...और पढ़ें
18 hours ago
                                                                           समय के हाथों में
सुख और दुःख के अनेक रूप हैं।
वे आते हैं, चले जाते हैं,
पर मैं सोचता हूँ—
क्या जीवन उनका नाम है,
या उन्हें देखने वाली दृष्टि का?

कभी सफलता मुझे ऊँचा करती है,
कभी विफलता झुका देत...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           मैं क्यूँ जिऊं हूँ सोचता,
दर्द भरके खुशियां बेचता,
रोशनी बनके जैसे हूँ अंधेरे में खड़ा,
इस नींद से दे जगा,
आ गले से मुझको लगा,
काफिला जगनुओं का जैसे भटका है बड़ा,

रात मद्धम और बुझी सी,
कहकशी बन...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           गुज़र गए कई मौसम कई रुतें बदलीं
उदास तुम भी हो यारो उदास हम भी हैं
फ़क़त तुम्हीं को नहीं रंज-ए-चाक-दामानी
कि सच कहें तो दरीदा-लिबास हम भी हैं

तुम्हारे बाम की शमएँ भी ताबनाक नहीं
मिरे फ़लक के सितारे भी ज़र्द...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           आएगा वो दिन, जब तुम भी एक दिन पिता बनोगे,
बचपन की गलियों में फिर लौट-लौटकर चलोगे।
याद आएगा वो आँगन, वो ममता की ठंडी छाया,
तब शायद तुम सोचोगे—माँ-बाप ने क्या-क्या पाया?

खुद बिन खाए सो जाते थे, तुमको भोजन करवाते थे...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           सप्तपदी जब तुम वामांगिनी बनी

मंगल-ध्वनि से द्वार सजा था,
वेद-मंत्र दोहराते थे।
अग्नि-साक्षी, हाथ में हाथ,
दो कुल पास में आते थे।

माँग तुम्हारी जब सजी थी,
मन में दीपक जलते थे।
सप्तपदी के...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           कई बार मैंने कोशिश की
इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की
कई बार भरोसा हुआ
कई बार दिखा यह है अंत

मैं कहना चाहता था
एक या दो मालूमी शब्द
जिन पर फ़िलहाल विश्वास किया जा सके
जो सबसे ज़रूरी हों फ...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           
ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

घर की ता'मीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फ...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           तुम्हारे साथ चलते-चलते
मैंने जाना है—
प्रेम केवल
हाथ थाम लेने का नाम नहीं,
यह तो उस मौन को समझना है
जहाँ शब्द पहुँच नहीं पाते।

जीवन की राह में
हर दिन फूल नहीं खिलते,
कुछ रास्ते पथरीले भी...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           सामान तो सारा बांध लिया,
पर यादें ले जाना भूल गए।
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
अलमारी के एक कोने में,
कुछ सूखे फूल अभी बाकी हैं।
जिस राह से तुम हो कर गुज़रे,
उस राह की धूल अभी बाकी ह...और पढ़ें
6 days ago
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