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लखनऊ: वसूली के खेल में दबाए रहे ध्वस्तीकरण का आदेश, 8000 से अधिक ऑर्डर फाइलों में गुम, ऐसे चल रहा खेल

Wed, 30 Sep 2026 12:59 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 30 Sep 2026 12:59 PM IST
सार
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लखनऊ में करीब 16 साल पहले शहर के अलग-अलग इलाकों में 83 अपार्टमेंट अवैध रूप से बने मिले थे। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन्हें ध्वस्त करने का आदेश दिया था। हालांकि अब तक इनसे जुड़े मामले पर कानूनी विवाद चल रहा है। वहीं, अवैध निर्माण के लिए अलग से वसूली की जा रही है।

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Lucknow: Demolition orders suppressed in extortion game, over 8000 orders lost in files
लखनऊ में अवैध निर्माण। - फोटो : amar ujala

विस्तार

गोलागंज के बारूदखाना में बने छह मंजिला अवैध एसए अपार्टमेंट के ध्वस्तीकरण का आदेश एलडीए के जिम्मेदार वसूली के खेल में दबाए रहे। दो साल पहले अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर अवैध तरीके से पेंट हाउस का निर्माण शुरू हुआ। इस पर एलडीए ने कागजी खानापूरी के लिए ध्वस्तीकरण आदेश तो जारी किया लेकिन फिर उसे दबा दिया गया।

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एलडीए अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का आदेश दबाने का यह पहला मामला नहीं है। शहर में पिछले 15 वर्षों से अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के करीब आठ हजार आदेश फाइलों में गुम हैं। अवैध निर्माणों के जिम्मेदारों को बचाने के खेल में एलडीए अधिकारियों के शामिल होने से इनकी संख्या बढ़ रही है।
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गोलागंज में ही एसए अपार्टमेंट की तर्ज पर करीब दर्जन भर अन्य अपार्टमेंट बने हैं। ये सभी अवैध रूप से आवासीय मानचित्र पास कराकर छह-छह मंजिल तक बनाए गए हैं। जानकारों ने बताया कि कागजी खानापूरी के लिए एलडीए अभियंताओं ने इन्हें अवैध निर्माण के नाम पर नोटिस जारी कर रखे हैं लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं की।

हद तो यह है कि एलडीए प्रशासन एसए अपार्टमेंट के मामले में भी इंजीनियरों को बचाने की कोशिश में लगा है। अवैध अपार्टमेंट के बहने का खतरा सामने आने के बाद भी किसी इंजीनियर या अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। आदेश के बाद भी अवैध निर्माण ध्वस्त न करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई बल्कि अभी सूची बनाने का ही काम किया जा रहा है।

अलीगंज में निरस्त कर दिया था ध्वस्तीकरण का आदेश: जून में अलीगंज सेक्टर डी की अवैध इमारत में आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। एलडीए ने शुरुआती निर्माण के दौरान ही इसके ध्वस्तीकरण का भी आदेश जारी किया था। हालांकि बाद में उसे निरस्त कर फाइल दबा दी गई। मामला 15 साल बाद तब खुला जब बिल्डिंग में हादसा हो गया।

तय है अवैध निर्माण का रेट: मानचित्र के विपरीत बिल्डिंग बनाने के लिए एलडीए इंजीनियरों का रेट फिक्स है। एक जानकार ने बताया कि मानचित्र के विपरीत निर्माण पर जब तक बिल्डिंग बनती है इंजीनियर हर महीना तय रकम के अलावा प्रति स्लैब रुपये अलग लेते हैं। इस तरह एक चार मंजिला बिल्डिंग पर 20 से 25 लाख रुपये इंजीनियर वसूल लेता है। इसी तरह तरह सील बिल्डिंग में निर्माण करने पर रेट दोगुना हो जाता है। ध्वस्तीकरण आदेश के बाद कार्रवाई न करने एवज में भी मोटी रकम वसूली जाती है।

बच जाते हैं इंजीनियर, खड़े रहते हैं अवैध अपार्टमेंट

करीब 16 साल पहले शहर के अलग-अलग इलाकों में 83 अपार्टमेंट अवैध रूप से बने मिले थे। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन्हें ध्वस्त करने का आदेश दिया था। हालांकि अब तक इनसे जुड़े मामले पर कानूनी विवाद चल रहा है। इन अपार्टमेंटों को बनवाने के जिम्मेदार 48 इंजीनियरों की सूची कार्रवाई के लिए शासन को भेजी गई पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नहीं मिल रही फाइल: एसए अपार्टमेंट का मामला सामने आने के बाद एलडीए में इस इमारत के मानचित्र से जुड़ी फाइल ही गुम है। एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि जब वह मौके पर गए थे तो वहां पर सिर्फ मानचित्र का परमिट नंबर ही मिला। उसके आधार पर फाइल की तलाश की जा रही है। उसके मिलने के बाद ही अपार्टमेंट से जुड़ी और जानकारी सामने आ पाएगी।

जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई: एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का कहना है कि 6 बारुदखाना की बिल्डिंग का पेंट हाउस तोड़ने के आदेश के खिलाफ बिल्डर की ओर से उच्च स्तर पर अपील की गई है। इस बारे में जोनल अफसर से रिपोर्ट मांगी गई है कि किस स्तर पर अपील लंबित है। इसका पता कर निस्तारण करवाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कराया जाए। इस मामले में जिन अभियंताओं ने लापरवाही की है उन पर भी कार्रवाई होगी। इनका पता कराया जा रहा है।

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