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सुना है क्या: "कैसे जाएं पब्लिक के बीच", "नेताजी को लगा दोहरा झटका", "कैसे बढ़ेगा खेल, फंसा वेतन का झोल"
Thu, 01 Oct 2026 10:43 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 01 Oct 2026 10:43 AM IST
नगर की सड़कें बदहाल हैं पर अब इन्हीं सड़कों पर राजा-महाराजा स्टाइल में द्वार बनेंगे। जनप्रतिनिधि जनता के बीच नहीं जाना चाहते हैं कि आखिर उखड़ी हुई सड़कों पर क्या जवाब देंगे। "सुना है क्या" कॉलम में पढ़िए पावर कॉरिडोर के वो किस्से जो लगातार चर्चा में हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नगर की सड़कें बदहाल हैं पर अब इन्हीं सड़कों पर राजा-महाराजा स्टाइल में द्वार बनेंगे। जनप्रतिनिधि जनता के बीच नहीं जाना चाहते हैं कि आखिर उखड़ी हुई सड़कों पर क्या जवाब देंगे। "सुना है क्या" कॉलम में पढ़िए पावर कॉरिडोर के वो किस्से जो लगातार चर्चा में हैं। एक नेता जी अपनी नासमझी में दोहरा झटका खा गए तो खेलों को आगे बढ़ाने के लिए आवेदक ही नहीं आ रहे हैं क्योंकि वेतन काफी कम है। पढ़ें ये किस्से:
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कैसे जाएं पब्लिक के बीच
राजधानी से सटी बड़ी नगरी की बेहाली के किस्से और फोटो सोशल मीडिया पर जितनी सुर्खियां बटोर रहे हैं, उससे ज्यादा छीछालेदर वहां के जनप्रतिनिधियों की हो रही है। सीनियर हो या जूनियर, युवा हो या वृद्ध... पब्लिक किसी को नहीं छोड़ रही। ऊपर से कोढ़ में खाज का काम ये कि गड्ढों में दफन सड़कों की बदहाली के बीच राजा-महाराजा स्टाइल के तोरण द्वार शहर के हर एंट्री प्वाइंट पर बनेंगे, जिन पर करोड़ों खर्च होंगे। अब इस खबर ने माननीयों का मजाक उड़ा दिया है। माननीय यह हाल देखकर घबरा रहे हैं कि आखिर चुनावी सीजन में वोट मांगने किस मुंह से जाएं।
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नेताजी को लगा दोहरा झटका
प्रदेश में इन दिनों शिक्षकों से जुड़े चुनाव की गहमागहमी बढ़ गई है। एक तरफ राजनीतिक दल सक्रिय हैं तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठन भी। एक शिक्षक संगठन के मुखिया का पद छोड़कर राजनीतिक दल में जुगाड़ बैठाने में लगे नेताजी को झटका लगा है। नेताजी को न तो राजनीतिक दल से टिकट मिला और न संगठन का मुखिया पद बचा। खास बात यह कि जिनको संगठन का मुखिया बनाया गया, टिकट भी उन्हीं के हाथ लग गया। ऐसे में नेताजी का दुख दोहरा है।
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खेल कैसे बढ़ेगा
प्रदेश में खेलों के उत्थान के लिए बने संस्थान ने नई शाखाएं तो खोल दीं, लेकिन अब कर्मियों की भर्ती टेढ़ी खीर बनी हुई है। शासन स्तर पर कई बार बैठकें हुईं और विज्ञापन निकले, मगर कम वेतनमान देखकर किसी ने आवेदन नहीं किया। हाल में फिर बैठक हुई और बढ़े वेतनमान के साथ विज्ञापन जारी किया गया है, ताकि शाखाएं जल्द शुरू हो सकें। हालांकि मौजूदा हालात में भर्ती की राह अब भी आसान नहीं दिख रही। नई शाखाओं का पहला सत्र शुरू होने से पहले ही सवालों में है। शाखाएं तो खुल गईं, अब कर्मचारी मिलें तो खेल आगे बढ़े।
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