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यूपी: भाजपा विधायकों में बढ़ी अपना टिकट कटने की बेचैनी, सरकार और संगठन की लगा रहे हैं प्रभातफेरी

Mon, 19 Oct 2026 08:17 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 19 Oct 2026 08:17 AM IST
सार
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UP Assembly Elections: यूपी में भाजपा के विधायकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। विधायक टिकट कटने के डर से संगठन और सरकार में अपने सूत्रों से संपर्क साध रहे हैं। 

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UP: BJP MLAs are growing anxious about their tickets being cut, they are organizing morning processions agains
यूपी में भाजपा की चुनाव तैयारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सत्ता का हैट्रिक लगाने के लिए एसआईआर के जरिए भाजपा भले ही एक-एक वोट सहेजने में जुटी है., लेकिन ऐसे तमाम विधायकों की प्राथमिकता में अब एसआईआर के स्थान पर टिकट बचाना शामिल हो गया है। टिकट कटने की चर्चाओं ने उन विधायकों की चिंताएं बढ़ा दी है, जिनको टिकट कटने का अंदेशा है। सरकार और पार्टी संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन टिकट कटने की आशंका से घिरे विधायक अपनी राजनीतिक जमीन सुरक्षित करने में जुटे हैं। समर्थकों की लामबंदी से लेकर स्थानीय संगठन के साथ समीकरण बैठाने तक, उनकी कवायद का केंद्र अपनी दावेदारी मजबूत करना है। चुनाव से पहले बदली यह प्राथमिकता पार्टी के अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।

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भाजपा में मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच छवि और संभावित एंटी-इंकंबेंसी के आकलन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसके साथ ही जातीय समीकरण और स्थानीय संगठन की राय को भी प्रत्याशी चयन में अहम माना जा रहा है। ऐसे में जिन विधायकों को अपनी दावेदारी कमजोर पड़ने का अंदेशा है, वे समर्थकों को सक्रिय करने और संगठन के प्रभावशाली पदाधिकारियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ के लिए नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाना भी प्राथमिकता बन गया है।

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टिकट के आकलन ने बढ़ाई बेचैनी

विधायकों को आशंका है कि क्षेत्र में नाराजगी, कमजोर जनसंपर्क या संगठन से तालमेल की कमी टिकट कटने का आधार बन सकती है। इसी कारण अपनी उपलब्धियां गिनाने और राजनीतिक समीकरण दुरुस्त करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। माना जा रहा है कि टिकट कटने लेकर हो रही चर्चाओं के चलते पार्टी के कार्यक्रमों और एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में विधायकों की सक्रियता कम हो गई है।

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बूथ प्रबंधन पर पड़ सकता है असर

एक तरफ पार्टी के पदाधिकारी एसआईआर में पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल कराने, त्रुटियों को दूर कराने और लोगों को जागरूक करने के लिए बूथ स्तर पर मोर्चा संभाले हुए हैं। वहीं दूसरी ओर विधायक सिर्फ अपना टिकट सुरक्षित करने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि विधायकों के इस रवैये के चलते जहां एसआईआर के तहत की जाने वाली कार्यवाही प्रभावित होगी, वहीं पार्टी समर्तक मतदाताओं का नाम कटने का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती

भाजपा नेतृत्व के सामने एक ओर एसआईआर और बूथ प्रबंधन को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर टिकट की आशंका से पैदा हो रही बेचैनी को संभालने की चुनौती। विधायकों की व्यक्तिगत दावेदारी और संगठन की सामूहिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
 

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