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यूपी: 47 लाख उपभोक्ताओं की अतिरिक्त सिक्योरिटी वसूली पर आयोग में याचिका, मांग- नई दर लगाने की व्यवस्था बदलें

Wed, 07 Oct 2026 07:31 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 07 Oct 2026 07:31 PM IST
सार
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उत्तर प्रदेश के करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं से अतिरिक्त सिक्योरिटी वसूली के मामले में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल की। परिषद ने पुराने भार की वर्तमान दरों से दोबारा गणना पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था की समीक्षा, अतिरिक्त वसूली की जांच और अधिक राशि के समायोजन या रिफंड की मांग की।

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UP: Petition filed with the Commission regarding the recovery of additional security from 4.7 million consumer
बिजली बिल के लिए नियम - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

प्रदेश के करीब 47 लाख विद्युत उपभोक्ताओं का भार बढ़ाकर वर्तमान दरों पर अतिरिक्त सिक्योरिटी वसूले जाने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बुधवार को विद्युत नियामक आयोग में जनहित याचिका दाखिल किया। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्यों से मिलकर प्रस्ताव सौंपते हुए उपभोक्ताओं पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ को समाप्त करने की मांग की।

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परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जुलाई में परिषद ने 47 लाख उपभोक्ताओं के भार के पुर्ननिर्धारण के बाद अतिरिक्त सिक्योरिटी वसूले जाने का मामला उठाया था। पुराने कनेक्शनों में वर्षों पहले जमा की गई जमानत राशि को नजरअंदाज कर पूरे पुराने भार की वर्तमान दरों से दोबारा गणना करना उपभोक्ताओं के साथ न्यायसंगत नहीं है।
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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता, 2005 की धारा 4.20 (सी) में भार वृद्धि के मामले में अतिरिक्त भार के लिए आवश्यक अतिरिक्त सिक्योरिटी का प्रावधान है। ऐसे में यदि किसी उपभोक्ता का भार केवल 1 किलोवाट अथवा 1 केवीए बढ़ता है तो अतिरिक्त सिक्योरिटी का आधार भी केवल वही बढ़ा हुआ लोड होना चाहिए, न कि वर्षों पुराने पूरे भार की वर्तमान दर से दोबारा गणना।
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परिषद के संज्ञान में एक मामला आया है, जिसमें 300 केवीए के पुराने औद्योगिक कनेक्शन में लगभग 1 किलोवाट भार बढ़ाने पर करीब 4 लाख रुपये अतिरिक्त सिक्योरिटी की मांग की गई है। अवधेश वर्मा ने कहा कि यदि यह मांग पुराने भार को वर्तमान दरों पर दोबारा आंकने के कारण बनी है तो इसकी तत्काल नियामकीय समीक्षा आवश्यक है।

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औचित्य की यूपीईआरसी को समीक्षा करनी चाहिए

परिषद ने यह भी मांग की है कि 2016 की कास्ट डाटा बुक में लागू भार वृद्धि संबंधी व्यवस्था का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए। उस समय भार वृद्धि के मामले में अतिरिक्त सिक्योरिटी के लिए केवल वर्तमान दर के आधार पर देय अतिरिक्त जमानत राशि ही जमा कराई जाती थी, जबकि पुराने भार के लिए पहले से जमा जमानत राशि को दोबारा वर्तमान दर पर नहीं आंका जाता था। इसलिए वर्तमान व्यवस्था में पुराने भार की पूरी सिक्योरिटी को वर्तमान दर से दोबारा गणना कर अतिरिक्त राशि मांगने के औचित्य की यूपीईआरसी को समीक्षा करनी चाहिए।

अवधेश वर्मा ने कहा कि कास्ट डाटा बुक में निर्धारित दरों को सप्लाई कोड के मूल प्रावधानों के अनुरूप ही लागू किया जाना चाहिए। यदि किसी प्रावधान की व्याख्या से पहले से जमा जमानत राशि का लाभ समाप्त होता है और पुराने भार पर दोबारा वर्तमान दर लागू होती है, तो आयोग को तत्काल स्पष्ट संशोधन, दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

परिषद ने आयोग से मांग की है कि भार वृद्धि के प्रत्येक मामले में पुराना स्वीकृत भार, नया भार, वास्तविक अतिरिक्त भार, पहले से जमा जमानत राशि, लागू वर्तमान दर और अतिरिक्त देय सिक्योरिटी अलग-अलग दिखाई जाए। साथ ही सभी बिजली कंपनियां से ऐसे मामलों का विवरण लेकर जांच कराई जाए। यदि किसी उपभोक्ता से अधिक राशि वसूल की गई है तो उसका समायोजन व रिफंड किया जाए।

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