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MP News: बच्चों का स्कूल का रास्ता जोखिम भरा, 39% बच्चे अकेले आते-जाते, 85% ने बताया गेट के बाहर तेज रफ्तार
Fri, 21 Aug 2026 09:17 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 21 Aug 2026 09:17 PM IST
मैनिट के सर्वे में स्कूल क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर मिली। 39% बच्चे अकेले आते-जाते हैं, 85% ने तेज रफ्तार वाहनों और 35% ने हादसे का अनुभव बताया। खराब फुटपाथ व असुरक्षित क्रॉसिंग बड़ी समस्या हैं। मैनिट ने 25 किमी गति सीमा, सुरक्षित फुटपाथ-क्रॉसिंग और अलग उतरने-चढ़ने की जगह का प्रस्ताव दिया है।
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बच्चों के स्कूल आने-जाने वाले रास्तों पर जोखिम बना रहता है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में बच्चों के स्कूल सफर को सुरक्षित बनाने के लिए मैनिट ने 7 नंबर बस स्टॉप चौराहे से केंद्रीय विद्यालय तक के संस्थागत स्कूल क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया। सर्वे में सामने आया कि 38.9 प्रतिशत बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते हैं और 84.9 प्रतिशत विद्यार्थियों व शिक्षकों ने स्कूल गेट के बाहर वाहनों की रफ्तार तेज या बहुत तेज बताई। स्कूल गेट पर वाहनों की भीड़, खराब फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी और सड़क पर तेज यातायात बच्चों के लिए बड़ा जोखिम बन रहे हैं। अध्ययन में 34.6 प्रतिशत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल के आसपास सड़क दुर्घटना देखने या उसका सामना करने की बात कही। मैनिट ने अध्ययन के आधार पर सुरक्षित स्कूल क्षेत्र के लिए विस्तृत प्रस्ताव नगर निगम को सौंपा है।
सर्वे में सामने आई स्कूल क्षेत्र की हकीकत
मेनिट के प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार टीम ने 7 नंबर बस स्टॉप वाले चौराहे से सरोजनी नायडू स्कूल, महिला पॉलिटेक्निक, नूतन कॉलेज, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय तक के क्षेत्र को संस्थागत स्कूल क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया। यातायात सर्वेक्षण, जमीनी निरीक्षण और विद्यार्थियों-शिक्षकों से बातचीत के आधार पर यहां सड़क सुरक्षा की स्थिति का अध्ययन किया गया। सर्वे में करीब 200 से 250 बच्चों और 25 से 30 शिक्षकों की राय ली गई। अध्ययन में स्कूल जाने के साधन से लेकर सड़क पर सुरक्षा, स्कूल गेट की स्थिति और हादसों के अनुभव तक कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई।
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39% बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते
अध्ययन का सबसे अहम आंकड़ा यह है कि 38.9 प्रतिशत बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते हैं। यानी हर तीन में से एक से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचने और वापस लौटने के दौरान किसी अभिभावक या बड़े के साथ नहीं होते। ऐसे में स्कूल के आसपास सड़क और पैदल मार्ग की सुरक्षा सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ जाती है।
ये भी पढ़ें- 10 साल में मलेरिया 98% काबू, फिर भी नहीं थमा संक्रमण; इस वर्ष अब तक 583 केस, बालाघाट हॉटस्पॉट
85% ने माना- स्कूल गेट के बाहर वाहन तेज
सर्वे में 84.9 प्रतिशत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल गेट के पास वाहनों की रफ्तार तेज या बहुत तेज बताई। चौड़ी सड़क और तेज गति से गुजरते वाहन बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आए।
स्कूल गेट की सुरक्षा रेटिंग सिर्फ 2 अंक
स्कूल का मुख्य गेट अध्ययन में सबसे असुरक्षित स्थानों में सामने आया। विद्यार्थियों ने इसकी सुरक्षा को 5 में से सिर्फ 2 अंक दिए। छुट्टी के समय ऑटो, मैजिक वैन, बस और अन्य वाहन एक साथ गेट के आसपास पहुंचते हैं। बच्चों के उतरने-चढ़ने के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर भीड़ बढ़ती है।
हर तीसरे ने देखा या झेला सड़क हादसा
सर्वे में शामिल 34.6 प्रतिशत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल के आसपास सड़क दुर्घटना देखने या खुद उसका सामना करने की बात कही। यानी लगभग हर तीसरे व्यक्ति ने स्कूल क्षेत्र में हादसे का अनुभव किया है।
फुटपाथ की हालत खराब, पैदल चलना मुश्किल
जमीनी निरीक्षण में कई जगह फुटपाथ खराब या टूटे हुए मिले। कुछ जगह अतिक्रमण के कारण पैदल चलने की जगह भी बाधित है। इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है और उन्हें सड़क के किनारे या मुख्य सड़क के करीब चलना पड़ता है।
सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी भी बड़ी समस्या
स्कूल क्षेत्र में सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की कमी सामने आई। बच्चों को तेज यातायात वाली सड़क पार करनी पड़ती है। ऐसे स्थानों पर वाहन और पैदल यात्रियों के बीच टकराव का खतरा बना रहता है।
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46.4% छात्र ऑटो-मैजिक से स्कूल पहुंचते
स्कूल आने-जाने के साधनों में 46.4 प्रतिशत छात्र ऑटो या मैजिक वैन पर निर्भर हैं। इसके अलावा 22 प्रतिशत छात्र पैदल, 16.4 प्रतिशत बस और 10.8 प्रतिशत साइकिल से स्कूल पहुंचते हैं। कार से आने वाले छात्रों की संख्या महज 0.4 प्रतिशत रही।यानी स्कूल क्षेत्र में सबसे ज्यादा दबाव पैदल बच्चों और छोटे सार्वजनिक वाहनों का है, लेकिन सड़क की मौजूदा व्यवस्था इन्हीं जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
96% से ज्यादा ने कहा- सुरक्षा में तुरंत सुधार हो
अध्ययन में 96 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की जरूरत बताई। इसका मतलब है कि समस्या केवल सड़क की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल क्षेत्र की पूरी यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सात संवेदनशील जगहों की पहचान
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मैनिट का पूरा समाधान प्रस्ताव
मैनिट ने अध्ययन के आधार पर बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव नगर निगम को सौंपा है। इसमें स्कूल क्षेत्र में 25 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा लागू करने और उसकी निगरानी बढ़ाने, यातायात की गति कम करने वाले उपाय करने, सात संवेदनशील स्थानों पर संकेतक और सड़क चिह्न लगाने तथा जरूरत के अनुसार यातायात कर्मियों की तैनाती का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा ऊंचे पैदल क्रॉसिंग, बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने वाले वाहनों के लिए अलग उतरने-चढ़ने की जगह, बेहतर और लगातार जुड़े फुटपाथ, सुरक्षित साइकिल मार्ग और बच्चों के लिए सुरक्षित पैदल रास्ते विकसित करने की योजना सुझाई गई है। स्कूल गेट के आसपास वाहनों की भीड़ कम करने के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने और चौराहों व सड़कों के डिजाइन में जरूरी बदलाव करने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में अगले दो से पांच साल में सुरक्षित पैदल और साइकिल नेटवर्क विकसित करने तथा स्कूल, नगर निगम और पुलिस के बीच समन्वय के लिए स्कूल क्षेत्र सुरक्षा समिति बनाने की सिफारिश भी की गई है।
कई संस्थाओं ने निशुल्क किया तकनीकी सहयोग
इस परियोजना में मैनिट के साथ केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, डब्ल्यूआरआई इंडिया, ट्रैफिक डेटा कॉर्प और एशियाई विकास बैंक के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार वास्तुकार अपूर्व गर्ग भी जुड़े रहे। मेनिट के प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार सभी संस्थाओं ने समाजहित में बिना किसी शुल्क के तकनीकी सहयोग दिया है। मैनिट आगे भी नगर निगम को तकनीकी सहयोग निशुल्क देने के लिए तैयार है।
नगर निगम ने लागू करने पर जताई सहमति
प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार मैनिट ने पूरा प्रस्ताव भोपाल नगर निगम को सौंप दिया है। नगर निगम ने सिफारिशों को लागू करने पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई है। अब सर्वे के आंकड़ों और तैयार प्रस्ताव के बाद चुनौती इसे जमीन पर लागू करने की है, ताकि बच्चों का स्कूल सफर वास्तव में सुरक्षित बनाया जा सके।
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सर्वे में सामने आई स्कूल क्षेत्र की हकीकत
मेनिट के प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार टीम ने 7 नंबर बस स्टॉप वाले चौराहे से सरोजनी नायडू स्कूल, महिला पॉलिटेक्निक, नूतन कॉलेज, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय तक के क्षेत्र को संस्थागत स्कूल क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया। यातायात सर्वेक्षण, जमीनी निरीक्षण और विद्यार्थियों-शिक्षकों से बातचीत के आधार पर यहां सड़क सुरक्षा की स्थिति का अध्ययन किया गया। सर्वे में करीब 200 से 250 बच्चों और 25 से 30 शिक्षकों की राय ली गई। अध्ययन में स्कूल जाने के साधन से लेकर सड़क पर सुरक्षा, स्कूल गेट की स्थिति और हादसों के अनुभव तक कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई।
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39% बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते
अध्ययन का सबसे अहम आंकड़ा यह है कि 38.9 प्रतिशत बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते हैं। यानी हर तीन में से एक से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचने और वापस लौटने के दौरान किसी अभिभावक या बड़े के साथ नहीं होते। ऐसे में स्कूल के आसपास सड़क और पैदल मार्ग की सुरक्षा सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ जाती है।
ये भी पढ़ें- 10 साल में मलेरिया 98% काबू, फिर भी नहीं थमा संक्रमण; इस वर्ष अब तक 583 केस, बालाघाट हॉटस्पॉट
85% ने माना- स्कूल गेट के बाहर वाहन तेज
सर्वे में 84.9 प्रतिशत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल गेट के पास वाहनों की रफ्तार तेज या बहुत तेज बताई। चौड़ी सड़क और तेज गति से गुजरते वाहन बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आए।
स्कूल गेट की सुरक्षा रेटिंग सिर्फ 2 अंक
स्कूल का मुख्य गेट अध्ययन में सबसे असुरक्षित स्थानों में सामने आया। विद्यार्थियों ने इसकी सुरक्षा को 5 में से सिर्फ 2 अंक दिए। छुट्टी के समय ऑटो, मैजिक वैन, बस और अन्य वाहन एक साथ गेट के आसपास पहुंचते हैं। बच्चों के उतरने-चढ़ने के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर भीड़ बढ़ती है।
हर तीसरे ने देखा या झेला सड़क हादसा
सर्वे में शामिल 34.6 प्रतिशत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल के आसपास सड़क दुर्घटना देखने या खुद उसका सामना करने की बात कही। यानी लगभग हर तीसरे व्यक्ति ने स्कूल क्षेत्र में हादसे का अनुभव किया है।
फुटपाथ की हालत खराब, पैदल चलना मुश्किल
जमीनी निरीक्षण में कई जगह फुटपाथ खराब या टूटे हुए मिले। कुछ जगह अतिक्रमण के कारण पैदल चलने की जगह भी बाधित है। इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है और उन्हें सड़क के किनारे या मुख्य सड़क के करीब चलना पड़ता है।
सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी भी बड़ी समस्या
स्कूल क्षेत्र में सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की कमी सामने आई। बच्चों को तेज यातायात वाली सड़क पार करनी पड़ती है। ऐसे स्थानों पर वाहन और पैदल यात्रियों के बीच टकराव का खतरा बना रहता है।
ये भी पढ़ें- कैलारस शुगर मिल फिर शुरू करने की तैयारी, सरकार ने 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों से मांगी ईओआई
46.4% छात्र ऑटो-मैजिक से स्कूल पहुंचते
स्कूल आने-जाने के साधनों में 46.4 प्रतिशत छात्र ऑटो या मैजिक वैन पर निर्भर हैं। इसके अलावा 22 प्रतिशत छात्र पैदल, 16.4 प्रतिशत बस और 10.8 प्रतिशत साइकिल से स्कूल पहुंचते हैं। कार से आने वाले छात्रों की संख्या महज 0.4 प्रतिशत रही।यानी स्कूल क्षेत्र में सबसे ज्यादा दबाव पैदल बच्चों और छोटे सार्वजनिक वाहनों का है, लेकिन सड़क की मौजूदा व्यवस्था इन्हीं जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
96% से ज्यादा ने कहा- सुरक्षा में तुरंत सुधार हो
अध्ययन में 96 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्कूल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की जरूरत बताई। इसका मतलब है कि समस्या केवल सड़क की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल क्षेत्र की पूरी यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सात संवेदनशील जगहों की पहचान
- फुटपाथ: कई जगह टूटे, खराब और अतिक्रमण की चपेट में।
- वाहनों की गति: स्कूल गेट के बाहर तेज या बहुत तेज यातायात।
- स्कूल गेट: छुट्टी के समय ऑटो, मैजिक, बस और अन्य वाहनों की भीड़।
- उतरने-चढ़ने की व्यवस्था: बच्चों के लिए अलग स्थान नहीं।
- पैदल क्रॉसिंग: सुरक्षित सड़क पार करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं।
- सड़क हादसे: 34.6 प्रतिशत ने हादसा देखने या झेलने की बात कही।
- अकेले बच्चे: 38.9 प्रतिशत बच्चे अकेले स्कूल आते-जाते हैं।
- निगरानी: स्कूल क्षेत्र में गति नियंत्रण और यातायात प्रबंधन की जरूरत।
ये भी पढ़ें- शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के हंगामे के बाद कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन, दो घंटे 'पेन डाउन' किया
मैनिट का पूरा समाधान प्रस्ताव
मैनिट ने अध्ययन के आधार पर बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव नगर निगम को सौंपा है। इसमें स्कूल क्षेत्र में 25 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा लागू करने और उसकी निगरानी बढ़ाने, यातायात की गति कम करने वाले उपाय करने, सात संवेदनशील स्थानों पर संकेतक और सड़क चिह्न लगाने तथा जरूरत के अनुसार यातायात कर्मियों की तैनाती का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा ऊंचे पैदल क्रॉसिंग, बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने वाले वाहनों के लिए अलग उतरने-चढ़ने की जगह, बेहतर और लगातार जुड़े फुटपाथ, सुरक्षित साइकिल मार्ग और बच्चों के लिए सुरक्षित पैदल रास्ते विकसित करने की योजना सुझाई गई है। स्कूल गेट के आसपास वाहनों की भीड़ कम करने के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने और चौराहों व सड़कों के डिजाइन में जरूरी बदलाव करने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में अगले दो से पांच साल में सुरक्षित पैदल और साइकिल नेटवर्क विकसित करने तथा स्कूल, नगर निगम और पुलिस के बीच समन्वय के लिए स्कूल क्षेत्र सुरक्षा समिति बनाने की सिफारिश भी की गई है।
कई संस्थाओं ने निशुल्क किया तकनीकी सहयोग
इस परियोजना में मैनिट के साथ केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, डब्ल्यूआरआई इंडिया, ट्रैफिक डेटा कॉर्प और एशियाई विकास बैंक के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार वास्तुकार अपूर्व गर्ग भी जुड़े रहे। मेनिट के प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार सभी संस्थाओं ने समाजहित में बिना किसी शुल्क के तकनीकी सहयोग दिया है। मैनिट आगे भी नगर निगम को तकनीकी सहयोग निशुल्क देने के लिए तैयार है।
नगर निगम ने लागू करने पर जताई सहमति
प्रोफेसर डॉ. राहुल तिवारी के अनुसार मैनिट ने पूरा प्रस्ताव भोपाल नगर निगम को सौंप दिया है। नगर निगम ने सिफारिशों को लागू करने पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई है। अब सर्वे के आंकड़ों और तैयार प्रस्ताव के बाद चुनौती इसे जमीन पर लागू करने की है, ताकि बच्चों का स्कूल सफर वास्तव में सुरक्षित बनाया जा सके।
