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आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ का घोटाला: अब परियोजना प्रबंधक को हटाया, तीन अफसरों पर दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
Fri, 21 Aug 2026 06:00 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 21 Aug 2026 06:00 PM IST
गुना में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जांच में राशि पात्र हितग्राहियों के बजाय निजी खातों में भेजने का खुलासा हुआ। शासन ने जिला परियोजना प्रबंधक सोनू सुशीला यादव को भोपाल संबद्ध कर दिया। वहीं तीन तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है।
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गुना में करोड़ों का घोटाला सामने आया है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक सोनू सुशीला यादव को भोपाल संबद्ध कर दिया है। राज्य आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इससे पहले, कलेक्टर ने उन्हें ग्रामोद्योग विभाग में भेजा था। जांच पूरी होने तक वह भोपाल में ही पदस्थ रहेंगी।
बता दें कि गुना जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों और उनके सामुदायिक संगठनों के वित्तीय आंकड़ों का रखरखाव भारत सरकार के पोर्टल पर किया जाता है। मई में मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करते समय गुना विकासखंड के प्रतिज्ञा सीएलएफ से संबंधित 90.25 लाख रुपये की राशि में विसंगति सामने आई। पोर्टल पर प्रदर्शित यह रकम उपलब्ध बैंक अभिलेखों और विवरण में वास्तविक रूप से नहीं मिली। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया। साथ ही राज्य स्तरीय टीम ने भी वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच शुरू कर दी।
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जांच में बढ़कर 3.74 करोड़ हुई राशि
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वित्तीय अनियमितता की शुरुआत वर्ष 2021-22 में हुई थी। उस समय विष्णु पंवार जिला परियोजना प्रबंधक, मनोज जैन अकाउंटेंट और अमित अग्रवाल सहायक वित्त प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2019 से 2025 तक के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने पर गड़बड़ी की कुल राशि बढ़कर 3.74 करोड़ रुपये हो गई।
जांच में खुलासा हुआ कि पात्र हितग्राहियों और समूहों के बजाय यह राशि निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में भेजी गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन जिला परियोजना प्रबंधक विष्णु पंवार का 11 फरवरी, 2019 को राजगढ़ स्थानांतरण हो चुका था, इसके बाद भी लेन-देन में उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।
तीन अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज
राज्य स्तरीय जांच समिति ने मामले को महज लापरवाही न मानकर सरकारी धन का गबन और गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी करार दिया। समिति ने कलेक्टर के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा की। इसके आधार पर जिला परियोजना समन्वयक डीपी कमठान ने कैंट थाने में अमित अग्रवाल, मनोज जैन और विष्णु पंवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात का केस दर्ज कराया है। पुलिस पंजाब नेशनल बैंक के खाते में पहुंची रकम तथा स्वीकृति देने वालों की जांच कर रही है।
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बता दें कि गुना जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों और उनके सामुदायिक संगठनों के वित्तीय आंकड़ों का रखरखाव भारत सरकार के पोर्टल पर किया जाता है। मई में मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करते समय गुना विकासखंड के प्रतिज्ञा सीएलएफ से संबंधित 90.25 लाख रुपये की राशि में विसंगति सामने आई। पोर्टल पर प्रदर्शित यह रकम उपलब्ध बैंक अभिलेखों और विवरण में वास्तविक रूप से नहीं मिली। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया। साथ ही राज्य स्तरीय टीम ने भी वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच शुरू कर दी।
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जांच में बढ़कर 3.74 करोड़ हुई राशि
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वित्तीय अनियमितता की शुरुआत वर्ष 2021-22 में हुई थी। उस समय विष्णु पंवार जिला परियोजना प्रबंधक, मनोज जैन अकाउंटेंट और अमित अग्रवाल सहायक वित्त प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2019 से 2025 तक के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने पर गड़बड़ी की कुल राशि बढ़कर 3.74 करोड़ रुपये हो गई।
जांच में खुलासा हुआ कि पात्र हितग्राहियों और समूहों के बजाय यह राशि निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में भेजी गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन जिला परियोजना प्रबंधक विष्णु पंवार का 11 फरवरी, 2019 को राजगढ़ स्थानांतरण हो चुका था, इसके बाद भी लेन-देन में उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।
तीन अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज
राज्य स्तरीय जांच समिति ने मामले को महज लापरवाही न मानकर सरकारी धन का गबन और गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी करार दिया। समिति ने कलेक्टर के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा की। इसके आधार पर जिला परियोजना समन्वयक डीपी कमठान ने कैंट थाने में अमित अग्रवाल, मनोज जैन और विष्णु पंवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात का केस दर्ज कराया है। पुलिस पंजाब नेशनल बैंक के खाते में पहुंची रकम तथा स्वीकृति देने वालों की जांच कर रही है।
