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Omkareshwar: नेशनल हाईवे की पुलिया का स्लैब गिरने की जांच तेज, इंदौर से पहुंची टीम; NHAI और कंपनी के दावे अलग
Fri, 26 Jun 2026 07:27 PM IST
Dinesh Sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Fri, 26 Jun 2026 07:27 PM IST
इंदौर–खंडवा-इच्छापुर हाईवे पर निर्माणाधीन पुलिया के क्षतिग्रस्त स्लैब मामले में एनएचएआई ने एसजीएसआईटीएस विशेषज्ञों से जांच शुरू कराई है। एनडीटी टेस्ट के जरिए गुणवत्ता जांच की जा रही है। एनएचएआई ने ओवरलोड ट्रक को कारण बताया, जबकि निर्माण कंपनी ने स्वयं स्लैब तोड़कर दोबारा ढालने का दावा किया है। अंतिम रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
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इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर क्षतिग्रस्त पुलिया की जांच करने पहुंचे विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर–खंडवा-इच्छापुर नेशनल हाईवे पर ग्राम बासवा के आगे खिड़किया नदी पर निर्माणाधीन पुलिया के स्लैब क्षतिग्रस्त होने के मामले में अब जांच तेज हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने संज्ञान लेते हुए इंदौर के एसजीएसआईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज की विशेषज्ञ टीम से तकनीकी जांच शुरू कराई है। शुक्रवार को वरिष्ठ प्रोफेसर मिलिंद कुमार लघाटे के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर पुल के ऊपरी और निचले हिस्से का निरीक्षण किया तथा नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) के माध्यम से गुणवत्ता जांच के लिए आवश्यक डेटा एकत्र किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जांच के दौरान एनएचएआई और निर्माण कंपनी ने स्लैब क्षतिग्रस्त होने के अलग-अलग कारण बताए, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
एनएचएआई खंडवा क्षेत्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष बिरला ने पूर्व में कहा था कि एक ओवरलोड ट्रक का एक्सल टूटने से स्लैब के एक हिस्से पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ा, जिससे वहां ब्रेकडाउन होकर गड्ढा बन गया। बाद में उस हिस्से की दोबारा री-कास्टिंग कर सुधार कार्य कराया गया। वहीं निर्माण कंपनी का कहना है कि स्लैब डालने के बाद उसमें हल्की दरार दिखाई दी थी। गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से उस हिस्से को स्वयं तोड़कर दोबारा स्लैब डाली गई थी और इसकी जानकारी पहले ही एनएचएआई अधिकारियों को दे दी गई थी।
ये भी पढ़ें- ओंकारेश्वर झूला पुल: दो दिन बाद भक्तों के लिए फिर खुला झूला पुल, भीड़ का एक जगह रुकना अब भी खतरनाक
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एनएचएआई खंडवा क्षेत्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष बिरला ने पूर्व में कहा था कि एक ओवरलोड ट्रक का एक्सल टूटने से स्लैब के एक हिस्से पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ा, जिससे वहां ब्रेकडाउन होकर गड्ढा बन गया। बाद में उस हिस्से की दोबारा री-कास्टिंग कर सुधार कार्य कराया गया। वहीं निर्माण कंपनी का कहना है कि स्लैब डालने के बाद उसमें हल्की दरार दिखाई दी थी। गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से उस हिस्से को स्वयं तोड़कर दोबारा स्लैब डाली गई थी और इसकी जानकारी पहले ही एनएचएआई अधिकारियों को दे दी गई थी।
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इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर क्षतिग्रस्त पुलिया की जांच करने पहुंचे विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञ बोले— रिपोर्ट आने से पहले कुछ कहना जल्दबाजी
जांच दल के प्रमुख प्रोफेसर मिलिंद कुमार लघाटे ने बताया कि फिलहाल एनडीटी टेस्ट के माध्यम से डेटा एकत्र किया जा रहा है। सभी तकनीकी परीक्षणों और विश्लेषण के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी। रिपोर्ट से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
क्या है एनडीटी टेस्ट?
एनडीटी (Non-Destructive Testing) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिससे पुल या भवन को बिना तोड़े उसकी मजबूती और गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है। इसमें रिबाउंड हैमर टेस्ट, अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी, ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) तथा अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से कांक्रीट और संरचना की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है।
जांच दल के प्रमुख प्रोफेसर मिलिंद कुमार लघाटे ने बताया कि फिलहाल एनडीटी टेस्ट के माध्यम से डेटा एकत्र किया जा रहा है। सभी तकनीकी परीक्षणों और विश्लेषण के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी। रिपोर्ट से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
क्या है एनडीटी टेस्ट?
एनडीटी (Non-Destructive Testing) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिससे पुल या भवन को बिना तोड़े उसकी मजबूती और गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है। इसमें रिबाउंड हैमर टेस्ट, अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी, ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) तथा अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से कांक्रीट और संरचना की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है।
इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर क्षतिग्रस्त पुलिया की जांच करने पहुंचे विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
पहले भी उठे थे गुणवत्ता पर सवाल
करीब दो सप्ताह पहले पुलिया के स्लैब का कंक्रीट उखड़ने से सरिया दिखाई देने लगा था। उस समय सामने आया था कि स्लैब में लगभग 10 एमएम सरिया तथा करीब 4 इंच मोटी कांक्रीट का उपयोग हुआ था, जिसे लेकर गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए थे।
3900 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत लगभग 3900 करोड़ रुपये की लागत से 203 किलोमीटर लंबे इंदौर–एदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। धनगांव–बलवाड़ा खंड की लागत लगभग 1001.69 करोड़ रुपये है, जिसमें नर्मदा नदी पर बनने वाला लगभग 12.75 किलोमीटर लंबा पुल भी शामिल है।
जनहित में निष्पक्ष जांच जरूरी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाली पुलिया की गुणवत्ता सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट में तकनीकी रूप से किस पक्ष के दावे सही पाए जाते हैं और यदि निर्माण में कोई कमी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
करीब दो सप्ताह पहले पुलिया के स्लैब का कंक्रीट उखड़ने से सरिया दिखाई देने लगा था। उस समय सामने आया था कि स्लैब में लगभग 10 एमएम सरिया तथा करीब 4 इंच मोटी कांक्रीट का उपयोग हुआ था, जिसे लेकर गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए थे।
3900 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत लगभग 3900 करोड़ रुपये की लागत से 203 किलोमीटर लंबे इंदौर–एदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। धनगांव–बलवाड़ा खंड की लागत लगभग 1001.69 करोड़ रुपये है, जिसमें नर्मदा नदी पर बनने वाला लगभग 12.75 किलोमीटर लंबा पुल भी शामिल है।
जनहित में निष्पक्ष जांच जरूरी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाली पुलिया की गुणवत्ता सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट में तकनीकी रूप से किस पक्ष के दावे सही पाए जाते हैं और यदि निर्माण में कोई कमी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
