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MP: पहली ही बारिश में ओंकारेश्वर की व्यवस्थाओं की खुली पोल, घाटों पर बहा गंदा पानी; श्रद्धालु हुए परेशान

Fri, 26 Jun 2026 07:54 AM IST
खंडवा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Fri, 26 Jun 2026 07:54 AM IST
सार
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ओंकारेश्वर में मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। गोमुख, ब्रह्मपुरी और कोटितीर्थ घाटों पर गंदा पानी बहने लगा, जिससे श्रद्धालुओं और दुकानदारों को परेशानी हुई। नाविकों ने नावों को सुरक्षित रखा, जबकि स्थानीय लोगों ने जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए।

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MP news First Monsoon Rain Exposes Civic Failure in Omkareshwar as Ghats Submerge
ओंकारेश्वर में मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं की पोल खोली - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। कुछ ही देर की बारिश में गोमुख घाट, ब्रह्मपुरी घाट और कोटितीर्थ घाट पर तेज बहाव के साथ बारिश का पानी उतरने लगा। कई स्थानों पर घाटों की सीढ़ियां जलधारा में तब्दील हो गईं और गंदा पानी सीधे घाटों तक पहुंच गया। इससे श्रद्धालुओं को काफी सतर्कता के साथ आवागमन करना पड़ा।

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कुछ ही मिनटों की बारिश ने बढ़ाई चिंता
बारिश के दौरान दर्शन और स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु एक-दूसरे का सहारा लेकर धीरे-धीरे घाटों तक पहुंचते नजर आए। तेज बहाव को देखते हुए कई लोगों ने घाटों से दूरी बनाए रखी, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने इस नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। बारिश का पानी घाट किनारे लगी अस्थायी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे दुकानदारों को जल्दबाजी में अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर हटाना पड़ा। पहली ही बारिश ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी और नगर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
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नाविकों ने संभाला मोर्चा
तेज बारिश के बीच घाट किनारे बंधी नावों में पानी भरने लगा। नाविक लगातार बाल्टियों और डिब्बों की मदद से नावों से पानी निकालते रहे ताकि उनका संतुलन बना रहे और कोई नाव क्षतिग्रस्त न हो। नाविक संघ के सदस्य भोलाराम केवट ने बताया कि बरसात और बाढ़ के मौसम में नाविक 24 घंटे शिफ्ट के आधार पर निगरानी करते हैं। कई नाविक पूरी रात नावों पर ही रहते हैं। वे रस्सियों को मजबूत बांधने, नावों से पानी निकालने और उन्हें सुरक्षित रखने के साथ-साथ किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं।
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पहली बारिश ने तैयारियों पर खड़े किए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून की पहली तेज बारिश में ही यह स्थिति बन गई है तो सावन और लगातार होने वाली बारिश के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले जल निकासी, सीवरेज व्यवस्था और घाटों के रखरखाव में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।


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प्रशासन का पक्ष नहीं मिला
इस संबंध में स्थानीय प्रशासन का पक्ष जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

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