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Success Story: रीवा के सौरभ बने इसरो में वैज्ञानिक, चंद्रयान-दो के प्रक्षेपण को देख तय किया था लक्ष्य
Sat, 25 Apr 2026 11:54 AM IST
रीवा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
Published by: रीवा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:54 AM IST
Saurabh Dwivedi Success Story: मध्य प्रदेश के रीवा के गांव पुरौना के युवा सौरभ द्विवेदी का चयन इसरो में वैज्ञानिक पद पर हुआ है, जो उनकी मेहनत और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी है। चलिए जानते हैं सौरभ की सफलता से जुड़ी खास बातें।
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सौरभ द्विवेदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो छोटे से गांव की मिट्टी भी आसमान छूने का हौसला दे देती है। ऐसा ही कर दिखाया है रीवा जिले की जवा तहसील के गांव पुरौना के होनहार युवा सौरभ द्विवेदी ने, जिनका चयन देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्था इसरो (ISRO) में वैज्ञानिक पद पर हुआ है।
साधारण परिवार से आने वाले सौरभ ने यह साबित कर दिया कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सपनों की उड़ान पर टिकी होती है। उनके पिता शैलेन्द्र द्विवेदी एक शिक्षक हैं, जिन्होंने बेटे को शुरू से ही शिक्षा का महत्व समझाया, वहीं मां गीता द्विवेदी ने हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया।
आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया
सौरभ की शुरुआती पढ़ाई शासकीय मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-एक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से बीटेक और देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
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चंद्रयान- दो के प्रक्षेपण से मिली थी प्रेरणा
सौरभ बताते हैं कि उनका सपना तब आकार लेने लगा, जब उन्होंने चंद्रयान-दो के प्रक्षेपण को देखा। उसी पल उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वे भी देश के अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनेंगे और आज उनकी मेहनत रंग लाई है।
ये भी पढ़ें- Indore News: आलीराजपुर जिला पंचायत सीईओ के साथ मंत्री के भाई ने की बदसलूकी, केस दर्ज
पुरौना गांव में जश्न का माहौल
यह सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है। सौरभ अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक के रूप में देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में योगदान देंगे और रीवा जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। गांव पुरौना से लेकर पूरे रीवा जिले तक खुशी और गर्व का माहौल है। हर कोई सौरभ की इस उपलब्धि को सलाम कर रहा है।
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साधारण परिवार से आने वाले सौरभ ने यह साबित कर दिया कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सपनों की उड़ान पर टिकी होती है। उनके पिता शैलेन्द्र द्विवेदी एक शिक्षक हैं, जिन्होंने बेटे को शुरू से ही शिक्षा का महत्व समझाया, वहीं मां गीता द्विवेदी ने हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया।
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आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया
सौरभ की शुरुआती पढ़ाई शासकीय मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-एक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से बीटेक और देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
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चंद्रयान- दो के प्रक्षेपण से मिली थी प्रेरणा
सौरभ बताते हैं कि उनका सपना तब आकार लेने लगा, जब उन्होंने चंद्रयान-दो के प्रक्षेपण को देखा। उसी पल उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वे भी देश के अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनेंगे और आज उनकी मेहनत रंग लाई है।
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पुरौना गांव में जश्न का माहौल
यह सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है। सौरभ अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक के रूप में देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में योगदान देंगे और रीवा जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। गांव पुरौना से लेकर पूरे रीवा जिले तक खुशी और गर्व का माहौल है। हर कोई सौरभ की इस उपलब्धि को सलाम कर रहा है।
