सोमवती अमावस्या पर ओंकारेश्वर में उमड़ी अभूतपूर्व भीड़: सिंहस्थ जैसा नजारा; स्नान के दौरान एक श्रद्धालु डूबा
30 वर्षों बाद अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए रिकॉर्ड भीड़ पहुंची। जाम, पार्किंग और पेयजल संकट के बीच नागरघाट पर एक श्रद्धालु की डूबने से मौत हो गई।
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अधिक मास के अंतिम दिन लगभग 30 वर्षों बाद आई पवित्र सोमवती अमावस्या ने तीर्थनगरी ओंकारेश्वर को आस्था के महासागर में परिवर्तित कर दिया। भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मां नर्मदा पवित्र जल में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि अब तक के अधिकांश रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। लोगों को घाटों पर पहुंचने में ही कई घंटे लग गए। डूबने से महाराष्ट्र के एक श्रद्धालु की मौत हो गई।
घाटों पर तिल रखने की नहीं थी जगह
नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर सुबह से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि कई लोगों को मुख्य घाटों पर स्थान नहीं मिला और उन्हें अन्य स्थानों पर जाकर स्नान करना पड़ा। नागरघाट, कोटितीर्थ घाट, नर्मदा कावेरी संगम घाट ब्रह्मपुरीघाट गोमुखघाट अभयघाट ओंकारेश्वर नर्मदा तट के सभी घाटों सहित आसपास के सभी स्नान स्थलों पर भारी भीड़ बनी रही। खंडवा-इंदौर-इच्छापुर मार्ग स्थित खेड़ीघाट पर भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहा। यहां लोगों ने नर्मदा तट पर पहुंचकर स्नान किया।
पार्किंग बनी सबसे बड़ी चुनौती
महापर्व के दौरान सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की सामने आई। ओंकारेश्वर नगर की सीमित भौगोलिक स्थिति और बढ़ती श्रद्धालु संख्या के कारण वाहनों को नगर से कई किलोमीटर दूर रोकना पड़ा। जब पैदल चलने तक के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था, तब चारपहिया और दोपहिया वाहनों के लिए जगह मिलना लगभग असंभव हो गया। प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी पार्किंग स्थल भी जल्दी भर गए।
पेयजल और छांव की व्यवस्था अपर्याप्त
भीषण गर्मी के बीच लाखों श्रद्धालुओं को सबसे अधिक परेशानी पेयजल और छांव की कमी के कारण उठानी पड़ी। यद्यपि प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा पेयजल एवं विश्राम केंद्र स्थापित किए गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या की तुलना में ये व्यवस्थाएं काफी कम थी कई स्थानों पर लोग पेयजल के लिए लंबी प्रतीक्षा करते दिखाई दिए। धूप से बचाव के लिए पर्याप्त छायादार स्थान नहीं होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
44 डिग्री में स्नान का उत्साह
लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान ओंकारेश्वर एवं भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भीषण गर्मी और 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुके तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और श्रद्धा में कोई कमी दिखाई नहीं दी।
अधिक मास और सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक दुबे ने बताया कि अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग लगभग तीन दशक बाद बना है। हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। शास्त्रों में इसका महत्व सावन मास के समान बताया गया है। ऐसे में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का एक साथ पड़ना इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है।
इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर बड़े वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण प्रशासन और पुलिस को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि बड़ी संख्या में छोटे वाहनों के पहुंचने से नगर क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़े वाहनों का प्रवेश इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर प्रतिबंधित किया गया तथा नगर के कई मार्गों पर वन-वे व्यवस्था लागू की गई। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम दिनभर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने तथा सुचारु दर्शन व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही।
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श्रद्धालु बोले इतनी भीड़ कभी नहीं देखी
गुना के रामसिंह रघुवंशी बताया कि वह प्रत्येक सोमवती अमावस्या पर ओंकारेश्वर स्नान करने पहुंचते हैं, लेकिन इतनी भीड़ उन्होंने कभी नहीं देखी। फिर भी उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन कभी-कभी तो बड़ी आसानी से हो जाते हैं और कभी-कभी वह कठिन परीक्षा लेते हैं।
फोरलेन सड़क भी पड़ी छोटी
कोठी से ओंकारेश्वर तक निर्मित फोरलेन सड़क, जिसे भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था, वह भी श्रद्धालुओं की संख्या के सामने छोटी पड़ गई। सड़क के दोनों ओर कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। पैदल यात्रियों, वाहनों की आवाजाही एक साथ होने से पूरा मार्ग दिनभर जाम की स्थिति में रहा।
नागरघाट पर डूबने से महाराष्ट्र के श्रद्धालु की मौत
महापर्व के दौरान नागरघाट पर स्नान कर रहे महाराष्ट्र के अमरावती निवासी 40 वर्षीय राहुल देशपांडे की डूबने से मृत्यु हो गई। घटना के बाद एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन अत्यधिक भीड़ और जाम के कारण वाहन समय पर मौके तक नहीं पहुंच सकी। बाद में परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने उन्हें चादर में लपेटकर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
प्रशासन की तैयारियां भीड़ के आगे पड़ी कम
प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और पेयजल सहित विभिन्न व्यवस्थाएं की गई थीं, लेकिन श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित संख्या के सामने वे अपर्याप्त साबित हुईं। कई स्थानों पर अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी, परंतु भीड़ इतनी अधिक थी कि वहां तक पानी के टैंकर और कर्मचारी भी समय पर नहीं पहुंच पा रहे थे। ओंकारेश्वर नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) मोनिका पारधी ने बताया कि प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम किए थे, लेकिन अपेक्षा से कहीं अधिक श्रद्धालु पहुंच गए। कई स्थानों पर अतिरिक्त संसाधन भी जुटाए गए, फिर भी भीड़ के दबाव के कारण व्यवस्थाओं को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।
निभाई जलसेवा की परंपरा
ओंकारेश्वर मोरटक्का का सड़क मर्ग पर आरो फिल्टर पानी का व्यापार करने वाले जयपाल सिंह चौहान लोगों को पिलाया चौहान ने बढ़ती हुई भीड़ को देखते हुए जाम में फंसे लोगों के लिए अपना प्लांट खोल दिया एवं कर्मचारियों को कहा कि कोई भी पैसा मत लेना सबको पानी पिलाना।
