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अध्ययन: मांसपेशियों और दिल की सेहत के लिए विटामिन डी-3 ज्यादा असरदार, हैदराबाद पोषण संस्थान के शोध में खुलासा
Sat, 05 Sep 2026 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आफताब अजमत, हैदराबाद
आफताब अजमत, हैदराबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 05 Sep 2026 04:03 AM IST
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा हालिया किए गए एक अध्ययन में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका मॉलिक्यूलर न्यूट्रिशन एंड फूड रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
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- फोटो : Freepik.com
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मांसपेशियों की मजबूती और दिल को सेहतमंद बनाए रखने के मामले में विटामिन डी-3 विटामिन डी-2 की तुलना में कहीं अधिक असरदार है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा हालिया किए गए एक अध्ययन में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका मॉलिक्यूलर न्यूट्रिशन एंड फूड रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
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राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिक सोमम दत्ता, अथिरा अनिल कुमार, आयशा इस्माइल, मोहम्मद उरूज के शोध के मुताबिक, शरीर में कैल्शियम के संतुलन और हड्डियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विटामिन डी-2 और डी-3 दोनों ही लगभग बराबर काम करते हैं। हालांकि जब बात हड्डियों से इतर अंगों- विशेष रूप से मांसपेशियों की संरचना, पकड़ की ताकत (ग्रिप स्ट्रेंथ) और हृदय की कार्यप्रणाली की आती है तो विटामिन डी-3 का प्रभाव बेहतर पाया गया।
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चूहों पर किया गया गहन अध्ययन
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए नर रैट्स (चूहों) पर विभिन्न आहार समूहों के जरिये परीक्षण किया। जिन समूहों में विटामिन डी की गंभीर कमी के बाद उन्हें दोबारा विटामिन डी-3 की खुराक दी गई, उनमें मांसपेशियों के फाइबर का आकार, प्रोटीन की मात्रा और शारीरिक ताकत तेजी से बहाल हुई। इसके विपरीत, केवल विटामिन डी-2 लेने वाले समूह में मांसपेशियों और हृदय की कोशिकाओं की रिकवरी अपेक्षाकृत काफी धीमी और कम प्रभावी देखी गई। साथ ही, दिल के संकुचन और ऊर्जा चयापचय (मेटाबॉलिज्म) से जुड़े जीन्स की सक्रियता में भी डी-3 ने बाजी मारी।
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धूप और पशु आधारित स्रोत से मिलता है डी-3
वैज्ञानिकों के मुताबिक शाकाहारी आबादी या सख्त वीगन डाइट अपनाने वाले लोग अक्सर पौधों और यीस्ट से मिलने वाले विटामिन डी-2 को प्राथमिकता देते हैं, जबकि डी-3 मुख्य रूप से धूप और पशु-आधारित स्रोतों से प्राप्त होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन खाद्य पदार्थों में विटामिन डी मिलाने और सप्लीमेंट से जुड़ी स्वास्थ्य नीतियों को तय करने में बेहद मददगार साबित होगा, ताकि लोगों को हड्डियों के साथ-साथ मजबूत मांसपेशियों और बेहतर हृदय स्वास्थ्य का भी पूरा लाभ मिल सके।