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राजा वड़िंग पर आप और भाजपा की नजर: काम नहीं आया डैमेज कंट्रोल; सचिन पायलट पंजाब प्रभारी बने और राजा बदल गया
Sat, 03 Oct 2026 03:27 PM IST
Sharukh Khan
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 03 Oct 2026 03:27 PM IST
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर आम आदमी पार्टी और भाजपा की नजर है। सचिन पायलट के प्रभारी बनते ही पंजाब का राजा बदल गया। हाईकमान पर नाराज धड़े की प्रेशर पॉलिटिक्स असरदार दिखाई दी। अब कांग्रेस के सामने एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
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amarinder singh raja
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने औपचारिक रूप से पंजाब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। अपनी अगली भूमिका के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी हाईकमान जहां उनकी जिम्मेदारी लगाएगा, वे डटकर काम करेंगे।
दूसरी ओर, विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की नजर वड़िंग पर है। सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल को हटाए जाने के बाद वड़िंग से संपर्क किया था मगर उस वक्त वड़िंग ने राहुल गांधी के प्रति अपनी पूरी आस्था व्यक्त की थी।
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दूसरी ओर, विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की नजर वड़िंग पर है। सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल को हटाए जाने के बाद वड़िंग से संपर्क किया था मगर उस वक्त वड़िंग ने राहुल गांधी के प्रति अपनी पूरी आस्था व्यक्त की थी।
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इस्तीफा देने के बाद शुक्रवार को वड़िंग खासे मायूस दिखे मगर उनके सुर थोड़े तल्ख थे। वड़िंग ने दोहराया कि कांग्रेस में सिर्फ राहुल गांधी ही उनके नेता हैं, इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा भी राहुल को सौंपा है।
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काम नहीं आया मान-मनौव्वल
राजा वड़िंग जानते थे कि पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा धड़ा उनसे नाराज है। इसलिए वे काफी दिनों से पार्टी में चल रहे घमासान के डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए थे। इसी सिलसिले में उन्होंने सार्वजनिक मंचों से सभी वरिष्ठ कांग्रेसियों को अपनी पगड़ी का लड़ बताया (सम्मानजनक टिप्पणी), उनके जूतों को अपने सिर पर रखने और उनके चरणों की धूल को माथे पर लगाने तक के सार्वजनिक बयान दिए।
राजा वड़िंग जानते थे कि पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा धड़ा उनसे नाराज है। इसलिए वे काफी दिनों से पार्टी में चल रहे घमासान के डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए थे। इसी सिलसिले में उन्होंने सार्वजनिक मंचों से सभी वरिष्ठ कांग्रेसियों को अपनी पगड़ी का लड़ बताया (सम्मानजनक टिप्पणी), उनके जूतों को अपने सिर पर रखने और उनके चरणों की धूल को माथे पर लगाने तक के सार्वजनिक बयान दिए।
राजा के इन तमाम प्रयासों को उस वक्त धक्का लगा, जब हाईकमान ने नाराज कांग्रेसियों के लगातार बढ़ रहे दबाव के चलते प्रभारी भूपेश बघेल की छुट्टी कर दी। उसी वक्त राजा को अहसास हो गया था कि उन्हें भी अब जल्द प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। इन्हीं परिस्थितियों को भांपते हुए आप और भाजपा ने उसी वक्त से वड़िंग पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे।
पायलट प्रभारी बने और राजा बदल गया
इस पूरे प्रकरण में पद छोड़ने के बाद राजा वड़िंग ने भले ही किसी कांग्रेसी नेता के खिलाफ खुलकर नहीं बोला मगर उनके दर्द और बयानों के सियासी मायने कुछ अलग ही दिख रहे हैं। सचिन पायलट को प्रभारी बनाने के बाद पंजाब में क्या बदलाव हुआ। इस सवाल पर वड़िंग ने स्पष्ट कहा- पायलट प्रभारी बने और राजा बदल गया, बाकी तो सब कुछ वैसा ही है।
इस पूरे प्रकरण में पद छोड़ने के बाद राजा वड़िंग ने भले ही किसी कांग्रेसी नेता के खिलाफ खुलकर नहीं बोला मगर उनके दर्द और बयानों के सियासी मायने कुछ अलग ही दिख रहे हैं। सचिन पायलट को प्रभारी बनाने के बाद पंजाब में क्या बदलाव हुआ। इस सवाल पर वड़िंग ने स्पष्ट कहा- पायलट प्रभारी बने और राजा बदल गया, बाकी तो सब कुछ वैसा ही है।
पायलट मेरे पुराने दोस्त हैं, लिहाजा अपने मुंह से टीका-टिप्पणी नहीं करूंगा। बघेल की छुट्टी के सवाल पर भी वड़िंग तंज कसते हुए बोले- अब न गुड्डा रहा, न गुड्डी। यह जवाब उन्होंने बघेल के उस बयान को जोड़ते हुए दिया, जिसमें बघेल ने कहा था- कांग्रेस में किसी प्रदेशाध्यक्ष को बदलना कोई गुड्डा-गुड़िया का खेल नहीं होता।
वड़िंग बोले- चन्नी मुझसे सीनियर नहीं
पद छोड़ने के बाद वड़िंग ने पूर्व सीएम और बागी नेताओं का नेतृत्व कर रहे चरणजीत सिंह चन्नी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, सीएम बनने के बाद कोई सीनियर नहीं हो जाता। चन्नी उनसे वरिष्ठ नहीं हैं। जितनी बार चन्नी ने चुनाव जीते हैं, उन्होंने भी उतनी बार जीते हैं। बहरहाल, उनकी चन्नी, सांसद रंधावा व अन्य किसी छोटे-बड़े नेता से कोई नाराजगी नहीं है।
पद छोड़ने के बाद वड़िंग ने पूर्व सीएम और बागी नेताओं का नेतृत्व कर रहे चरणजीत सिंह चन्नी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, सीएम बनने के बाद कोई सीनियर नहीं हो जाता। चन्नी उनसे वरिष्ठ नहीं हैं। जितनी बार चन्नी ने चुनाव जीते हैं, उन्होंने भी उतनी बार जीते हैं। बहरहाल, उनकी चन्नी, सांसद रंधावा व अन्य किसी छोटे-बड़े नेता से कोई नाराजगी नहीं है।
हां, मैं गुस्सा हो सकता हूं, मगर भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की तरह यह बात अपने मुंह से नहीं कह सकता कि राहुल गांधी ने यूज एंड थ्रो किया है। राहुल उनसे बहुत दिनों के बाद शुक्रवार को झप्पी पाकर मिले। आखिर में वड़िंग ने कहा- खैर, मैं अकेला कितनी लड़ाई लड़ सकता था। इसलिए इस्तीफा दे दिया। राजनीति है, कब और कल क्या हो जाए, पता नहीं।