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पति की मौत बनी पहेली: जहर तो साबित हुआ, लेकिन जहर देने वाला नहीं; हाईकोर्ट ने आरोपी पत्नी को किया बरी
Sun, 06 Sep 2026 11:09 AM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:09 AM IST
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि बलजीत कौर ने जहर कहां से हासिल किया, उसे खरीदा या मृतक को किस तरह दिया। उसके पास से जहर बरामद नहीं हुआ।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
करीब 23 साल पुराने जहरीला पदार्थ देकर पति की हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी बलजीत कौर को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि मृतक की मौत जहरीले पदार्थ के कारण हुई थी, लेकिन अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि जहर उसकी पत्नी ने ही दिया था।
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कोर्ट ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया और बलजीत कौर को संदेह का लाभ देते हुए आरोप से मुक्त कर दिया। मामला वर्ष 2003 मजीठा पुलिस स्टेशन का है। बलजीत कौर का पति सरमुख सिंह हेड कांस्टेबल था। आठ और नौ अगस्त 2003 की दरम्यानी रात ड्यूटी से लौटने के बाद उसने परिवार के साथ खाना खाया और करीब 11 बजे सो गया। सुबह करीब छह बजे वह मृत मिला।
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शुरुआत में किसी तरह के अपराध की आशंका नहीं जताई गई और मौत को हृदयाघात से जोड़कर देखा गया। बाद में विसरा जांच में शराब के साथ कीटनाशक जैसे जहरीले रसायन की मौजूदगी सामने आई। रासायनिक जांच रिपोर्ट सात अक्टूबर 2003 को सामने आई, जबकि हत्या की एफआईआर 22 अक्टूबर को दर्ज हुई। यानी घटना के करीब 74 दिन बाद मामला हत्या में बदला। अभियोजन ने वैवाहिक विवाद, कथित अवैध संबंध और करीब 2.20 लाख रुपये के आर्थिक विवाद को हत्या का कारण बताया।
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ट्रायल कोर्ट ने 2 जून 2005 को पत्नी बलजीत कौर को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई अभियोजन ने बलजीत कौर की ओर से किए गए कथित अतिरिक्त न्यायिक कबूलनामे का भी सहारा लिया था। जिसके कुछ दिन बाद उसने दोषसिद्धि और सजा के फैसले के खिलाफ दायर की थी।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि बलजीत कौर ने जहर कहां से हासिल किया, उसे खरीदा या मृतक को किस तरह दिया। उसके पास से जहर बरामद नहीं हुआ। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था और ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला जो उसे जहरीले पदार्थ से सीधे जोड़ता हो। कोर्ट ने कहा कि केवल यह साबित हो जाना कि मौत जहर से हुई, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जहर किसने दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी के खिलाफ ऐसा आधार और परिस्थितियां साबित करनी होती हैं, जिनसे अपराध में उसकी संलिप्तता की कड़ी जुड़ती हो।
यहां परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला नहीं बन सकी। हाईकोर्ट ने कहा कि जहरीले पदार्थ के कारण सरमुख सिंह की मौत होना साबित है, लेकिन यह संदेह से परे साबित नहीं हुआ कि बलजीत कौर ने ही उसे जहर दिया या हत्या की साजिश में उसकी भूमिका थी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए बलजीत कौर को बरी कर दिया।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि बलजीत कौर ने जहर कहां से हासिल किया, उसे खरीदा या मृतक को किस तरह दिया। उसके पास से जहर बरामद नहीं हुआ। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था और ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला जो उसे जहरीले पदार्थ से सीधे जोड़ता हो। कोर्ट ने कहा कि केवल यह साबित हो जाना कि मौत जहर से हुई, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जहर किसने दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी के खिलाफ ऐसा आधार और परिस्थितियां साबित करनी होती हैं, जिनसे अपराध में उसकी संलिप्तता की कड़ी जुड़ती हो।
यहां परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला नहीं बन सकी। हाईकोर्ट ने कहा कि जहरीले पदार्थ के कारण सरमुख सिंह की मौत होना साबित है, लेकिन यह संदेह से परे साबित नहीं हुआ कि बलजीत कौर ने ही उसे जहर दिया या हत्या की साजिश में उसकी भूमिका थी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए बलजीत कौर को बरी कर दिया।