राजस्थान: एम्स जोधपुर में पहली बार सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और आईवीएफ से बच्चे का जन्म, मिली नई उम्मीद
एम्स जोधपुर में सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल, आईवीएफ और आईसीएसआई तकनीक की मदद से पहली बार सफल प्रसव हुआ है। ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया से जूझ रहे दंपती को इस आधुनिक उपचार के जरिए संतान सुख मिला।
विस्तार
बांझपन की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर से राहत भरी खबर सामने आई है। संस्थान में पहली बार सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक की मदद से एक बच्चे का सफल जन्म हुआ है। यह उपलब्धि उन दंपतियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिनके पुरुष साथी ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। इस जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
क्या है ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया की समस्या?
ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया पुरुषों में होने वाली ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें अंडकोष में शुक्राणुओं का निर्माण तो होता है, लेकिन प्रजनन मार्ग में किसी रुकावट के कारण वे वीर्य तक नहीं पहुंच पाते। चिकित्सकों के अनुसार, कई पुरुषों में यह समस्या जन्मजात भी होती है। ऐसे मामलों में सामान्य तरीके से शुक्राणु प्राप्त करना संभव नहीं हो पाता। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से अब इसका उपचार संभव है। सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रिया के तहत शल्य चिकित्सा के जरिए पुरुष के प्रजनन मार्ग से सीधे शुक्राणु प्राप्त किए जाते हैं।
आईवीएफ और आईसीएसआई तकनीक से संभव हुआ गर्भधारण
इस उपचार में सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल के साथ आईवीएफ और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आईसीएसआई प्रक्रिया में प्राप्त किए गए शुक्राणुओं में से एक शुक्राणु को सीधे महिला के अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इसके बाद प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए गर्भधारण संभव हो पाता है और दंपती को संतान सुख मिल सकता है।
पुरुष और महिला दोनों की जांच जरूरी
चिकित्सकों ने बताया कि बांझपन की समस्या केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी हो सकती है। कई मामलों में यह समस्या दोनों में भी मौजूद होती है। ऐसे में सही कारण का पता लगाने और प्रभावी उपचार के लिए पति-पत्नी दोनों की समय पर संपूर्ण चिकित्सकीय जांच जरूरी है। रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के क्षेत्र में लगातार हो रही प्रगति से अब बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए कई नए उपचार विकल्प उपलब्ध हुए हैं। इनकी मदद से अपने ही शुक्राणु और अंडाणु के जरिए संतान प्राप्ति की संभावना बन रही है।
दो साल से आधुनिक प्रजनन उपचार की सुविधा दे रहा एम्स
एम्स जोधपुर के सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) केंद्र में पिछले दो वर्षों से सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और इससे जुड़े प्रजनन उपचार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। संस्थान में पहली बार इस तकनीक की मदद से सफल प्रसव होना चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे उन दंपतियों को भी उपचार की नई उम्मीद मिलेगी, जिनके लिए शुक्राणुओं की कमी या प्रजनन मार्ग में रुकावट के कारण प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त करना मुश्किल होता है।
विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने हासिल की सफलता
इस जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया को सफल बनाने में एम्स जोधपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में आईवीएफ विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनु गोयल, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक भिरुड और भ्रूणविज्ञानी डॉ. गिरीश शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों के साझा प्रयास, गहन चिकित्सकीय निगरानी और आधुनिक तकनीकों के सटीक इस्तेमाल से यह सफलता मिली। एम्स जोधपुर के इतिहास में पहली बार इस तरह की प्रक्रिया के जरिए सफल प्रसव होना संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।