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हिमाचल प्रदेश: खुबानी और अखरोट के बगीचे मिट्टी में जमा करते हैं ज्यादा कार्बन, सेब से आगे निकले दोनों फल

Tue, 13 Oct 2026 11:49 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 13 Oct 2026 11:49 AM IST
सार
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वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में खुबानी और अखरोट के बगीचों में मिट्टी के भीतर कार्बन जमा होने की दर सेब के मुकाबले अधिक पाई गई। खुबानी में यह दर 0.54 और अखरोट में 0.53 मेगाग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष रही। शोध के नतीजे पश्चिमी हिमालय में बागवानी और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए अहम माने जा रहे हैं।

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apricot walnut orchards soil carbon storage study
मिट्टी को ताकत देंगे खुबानी और अखरोट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बगीचों में पेड़ों की पत्तियां, जड़ें और दूसरे जैविक पदार्थ केवल पौधों के पोषण में ही योगदान नहीं देते, बल्कि मिट्टी में कार्बन जमा करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में मिट्टी में कार्बन संचय के मामले में खुबानी और अखरोट के बगीचे सेब से आगे रहे हैं। शोध के अनुसार, खुबानी के बगीचों में मिट्टी के भीतर कार्बन जमा होने की दर सबसे अधिक 0.54 मेगाग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष रही। वहीं, अखरोट में यह दर 0.53 और सेब के बगीचों में 0.37 मेगाग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष दर्ज की गई।

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ये निष्कर्ष पश्चिमी हिमालय के बागवानी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल फलदार पेड़ों का चयन करके मिट्टी में जैविक कार्बन के संचय को बढ़ावा दिया जा सकता है। हालांकि, बागवानी में किसी दूसरे फलदार पेड़ को अपनाने का फैसला स्थानीय परिस्थितियों, उत्पादन और किसानों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर करना होगा।
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22 साल से पुराने बगीचों की मिट्टी का अध्ययन
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली समेत कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सात तरह के शीतोष्ण फलदार बगीचों की मिट्टी का अध्ययन किया। इसमें 22 साल से अधिक पुराने बगीचों की मिट्टी का विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्ष पश्चिमी हिमालय के दूसरे बागवानी क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।
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अध्ययन में मिट्टी की सतह से 20 सेंटीमीटर की गहराई तक कार्बन संचय का आकलन किया गया। इस स्तर पर खुबानी और अखरोट के बगीचों में कार्बन संचय की दर सबसे अधिक मिली। सेब के बगीचों में भी मिट्टी की गुणवत्ता से जुड़े कई संकेतक बेहतर पाए गए, लेकिन कार्बन जमा होने की दर के मामले में वे खुबानी और अखरोट से पीछे रहे।

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खुबानी की मिट्टी में जैविक कार्बन सबसे अधिक
शोध के दौरान सतही मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा खुबानी के बगीचों में 15.30 ग्राम प्रति किलोग्राम और अखरोट के बगीचों में 15.16 ग्राम प्रति किलोग्राम पाई गई। इसके मुकाबले सेब के बगीचों की मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा 11.68 ग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। मिट्टी में जैविक कार्बन पौधों की पत्तियों, जड़ों और अन्य जैविक पदार्थों के सड़ने-गलने से जमा होता है। यह मिट्टी की संरचना और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है। कार्बन का कुछ हिस्सा अपेक्षाकृत जल्दी विघटित हो जाता है, जबकि कुछ हिस्सा लंबे समय तक मिट्टी में सुरक्षित रह सकता है।

कई संस्थानों के वैज्ञानिक शोध में शामिल
इस अध्ययन में अभिषेक जांगीर, सर्वेंद्र कुमार, तपन ज्योति पुरकायस्थ, प्रसेनजीत रे, सूर्य प्रकाश यादव और पूजा जांगड़ा शामिल रहे। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के अलावा भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून और मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर के शोधकर्ताओं ने भी योगदान दिया। श्रीनगर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समशीतोष्ण बागवानी संस्थान ने मिट्टी के नमूने उपलब्ध कराने में सहयोग किया। यह अध्ययन हाल ही में एन्वायरनमेंटल साइंसेज यूरोप शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि विभाग इस अध्ययन को देखेगा।
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