शिमला: मल्लिकार्जुन खरगे से मिले विस अध्यक्ष पठानिया, हिमाचल की सियासत पर की चर्चा
पठानिया ने खरगे के साथ हिमाचल प्रदेश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जिला चंबा के राजनीतिक समीकरणों के साथ प्रदेश कांग्रेस की गतिविधियों को लेकर भी अपना दृष्टिकोण रखा।
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प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से नई दिल्ली में मुलाकात कर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की। खरगे के सरकारी आवास पर हुई इस मुलाकात में विशेष रूप से आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में विचार-विमर्श हुआ। पठानिया ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया है। पठानिया ने खरगे के साथ हिमाचल प्रदेश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जिला चंबा के राजनीतिक समीकरणों के साथ प्रदेश कांग्रेस की गतिविधियों को लेकर भी अपना दृष्टिकोण रखा।
मुलाकात के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कुलदीप सिंह पठानिया की भूमिका और कार्यशैली पर भी चर्चा हुई। पठानिया ने कहा कि वह बुनियादी तौर पर कांग्रेसी रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने खरगे के साथ जिला चंबा और प्रदेश कांग्रेस से जुड़े विभिन्न राजनीतिक पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए। अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। पठानिया ने प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों और संभावित चुनावी परिदृश्य को लेकर अपनी बात रखी।
लोकतंत्र की मजबूती विधायी संस्थाओं की प्रभावशीलता पर निर्भर : पठानिया
प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि विधायी संस्थाओं के कामकाज में एकरूपता लाने के लिए एक समान मॉडल नियमावली तैयार करना समय की आवश्यकता है। इसे विभिन्न विधानमंडल अपनी सांविधानिक शक्तियों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपना सकेंगे। पठानिया मंगलवार को नई दिल्ली में दिल्ली विधानसभा की ओर से आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे पठानिया ने कहा कि सदन के कार्य संचालन और प्रक्रिया से जुड़े नियम केवल तकनीकी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता, बहस और जनप्रतिनिधित्व का आधार हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सराहना करते हुए कहा कि विधायी संस्थाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सभी विधानमंडलों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने के प्रयास प्रशंसनीय हैं। उनका पिछला और वर्तमान कार्यकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विधायी संस्थाओं की मजबूती के लिहाज से स्वर्णिम कार्यकाल माना जाएगा।