हिमाचल: 3.70 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों को दिवाली का तोहफा, 5 फीसदी डीए बढ़ा, सीएम ने किया एलान
सरकार ने दिवाली से पहले प्रदेश के करीब 3.70 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते (डीए) में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रेस वार्ता कर इसकी घोषणा की।
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साढ़े तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा लाभ
हिमाचल में करीब 1.77 लाख अधिकारी-कर्मचारी और 1.92 लाख पेंशनर हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि महंगाई भत्ते में दो चरणों में बढ़ोतरी की गई है। इसमें एक जुलाई 2023 से 1% प्रतिशत और एक जनवरी 2024 से 4% की वृद्धि शामिल है। इन दोनों अवधियों से 30 सितंबर 2026 तक बनने वाले एरियर के भुगतान के लिए सरकार अलग से आदेश जारी करेगी।
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उधर, वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के दायरे में आने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों को बढ़ा हुआ डीए मिलेगा। इसके अलावा अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों और यूजीसी वेतनमान के तहत आने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। डीए की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक के अंश को अगले पूरे रुपये में बदला जाएगा, जबकि 50 पैसे से कम के अंश को नजरअंदाज किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नियमित चतुर्थ श्रेणी यानी ग्रुप-डी कर्मचारियों को भी राहत दी है। इन कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान के कुल बकाया एरियर में से 10,000 रुपये नवंबर 2026 में नकद दिए जाएंगे। यह भुगतान एक जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के तहत देय एरियर का हिस्सा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार हमेशा से कर्मचारियों के हित में रही है।
महंगाई भत्ते में पांच फीसदी की बढ़ोतरी होने से कर्मचारियों और अधिकारियों के मासिक वेतन में 900 से लेकर 11 हजार रुपये तक बढ़ोतरी होगी। पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलने के बाद अब दस प्रतिशत भत्ता देय रह गया है। नवंबर से कर्मचारियों को 50 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश में पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा करने के साथ ही सरकार ने 400 करोड़ का ऋण लेने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। वित्त विभाग की ओर से राजपत्र में जारी अधिसूचना के तहत ऋण 28 अक्तूबर तक सरकार के खाते में आ जाएगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने किशाऊ बांध के मुद्दे पर भाजपा सांसदों को घेरते हुए कहा कि कुछ सांसदों को पूरे मामले की जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर तथ्यों को समझने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक, किशाऊ बांध से जुड़े मामले में प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है और सरकार इस दिशा में अपना पक्ष मजबूती से रख रही है।
सुक्खू ने बताया कि किशाऊ बांध के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के दौरान जब उन्हें लगा कि हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी हो रही है, तो उन्होंने विरोध जताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वह बैठक से उठकर जाने वाले थे। इसके बाद हिमाचल प्रदेश की शर्तों को स्वीकार किया गया। मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सरकार जरूरत पड़ने पर अपना विरोध दर्ज कराने से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी बीबीएमबी से जुड़े मामले पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस मामले में भी हिमाचल के हितों की लड़ाई जीतेगी। सुक्खू के अनुसार, फिलहाल पंजाब की ओर से कुछ आनाकानी की जा रही है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश सरकार अपने अधिकारों और हितों के लिए प्रयास जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश भाजपा पर राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा हाईकमान प्रदेश के नेताओं से दुखी है। सुक्खू के इस बयान से प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
जयराम ठाकुर के बयान पर भी पलटवार
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब वह उनके बयानों पर ध्यान नहीं देते। सुक्खू ने प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज होने संबंधी जयराम ठाकुर के बयान को गलत बताया। हालांकि, कर्ज के आंकड़े को लेकर मुख्यमंत्री ने अपने इस बयान में विस्तृत वैकल्पिक आंकड़े नहीं दिए। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के दावों का आकलन करने के लिए आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों की अलग से जांच जरूरी होगी।