हिमाचल: कांस्टेबल से धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में पूर्व एसएसपी संजीव कुमार गांधी पर एफआईआर
जिला शिमला के पूर्व एसएसपी आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ कांस्टेबल से कथित धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
विस्तार
फंड से 2.35 लाख रुपये की निकासी की जांच
शिमला के एएसपी मेहर पंवार ने बताया कि कांस्टेबल की शिकायत पर तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, वित्तीय रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच में जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान 2.35 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया। आरोप है कि इस धनराशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, संजीव गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में तबादला होने के बाद फंड की कमी पूरी करने के लिए कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि निकालकर संबंधित फंड खाते में स्थानांतरित किया गया। इससे कांस्टेबल को उसकी स्वीकृत राशि का भुगतान नहीं हो सका।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में आईपीएस अधिकारी डीआईजी संजीव कुमार गांधी को हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है। इससे पहले वे डीआईजी टीटीआर के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं।
पुलिस के कुछ अधिकारी मेरे खिलाफ रच रहे हैं साजिश : गांधी
डीआईजी संजीव गांधी ने बताया कि उनके खिलाफ पुलिस के कुछ अधिकारी काफी समय से साजिश रच रहे हैं। उन्होंने पुलिस विभाग में अनियमितताओं और कई गलत कार्यों पर सवाल उठाए हैं। यही वजह है कि उन्हें इस तरह के झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कांस्टेबल ने पैसों की रिसीविंग दी है तो उसे पैसे भी जारी हुए हैं। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से हुई सीसीटीवी की खरीद के मामले में भी जांच की मांग उठाई थी। ऐसे कई मामले हैं, जिन्हें उन्होंने उजागर किया जिस वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।