हिमाचल: इस बार महंगा मिलेगा सेब, 20 हजार मीट्रिक टन कम हुआ उत्पादन, प्रभावित हो सकती है आपूर्ति
इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले में करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम है। उत्पादन में गिरावट के पीछे मौसम को प्रमुख कारण माना जा रहा है। साल दर साल सेब बागवानी पर जलवायु परिवर्तन की मार बढ़ रही है।
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हिमाचल में इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले में करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम है। अब तक 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब बाजार पहुंचा है, जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि तक 4.07 लाख मीट्रिक टन पहुंच चुका था। कम आवक का असर आने वाले दिनों में बाजार भाव पर पड़ सकता है। उत्पादन में गिरावट के पीछे मौसम को प्रमुख कारण माना जा रहा है। साल दर साल सेब बागवानी पर जलवायु परिवर्तन की मार बढ़ रही है। दिसंबर 2023 से मई 2024 के बीच पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से चिलिंग ऑवर प्रभावित हुए। इसके बाद बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में असमानता से फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस बार ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन करीब 15 दिन देरी से शुरू हुआ। वहीं, जम्मू-कश्मीर में हालत और खराब है, जहां उत्पादन 40 फीसदी तक घट गया है।
पिछले साल प्रदेश में करीब सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन 3.5 से 3.75 लाख टन रहने का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा के अनुसार सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है और अंतिम आंकड़े में अंतर कम हो सकता है। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत भी पिछले सीजन की तुलना में खरीद घटी है। पिछले सीजन में इस अवधि तक करीब 49 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था, जबकि इस साल खरीद करीब 32 हजार मीट्रिक टन है। कम आवक से बाजार में आपूर्ति घटने पर कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। हालांकि खुदरा भाव मांग, मंडियों में आवक और बाहरी राज्यों से आने वाले सेब पर भी निर्भर करेंगे। हिमाचल में सेब पर निर्भर अर्थ व्यवस्था करीब 5,000 करोड़ रुपये की है। उत्पादन घटने से बागवानों के साथ ढुलाई, पैकिंग, मजदूरी और मंडी कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।
सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक और नए रूट स्टॉक अपनाना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है। सेब उत्पादन में गिरावट का यह बड़ा कारण है।- जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री