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हिमाचल: जॉब ट्रेनी डॉक्टर भी कर सकेंगे पीजी, नियुक्ति तिथि से मिलेंगे जीडीओ के लाभ

Wed, 28 Oct 2026 07:19 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Oct 2026 07:19 PM IST
सार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में निर्देश दिए। साथ ही जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को नियुक्ति की तिथि से जनरल ड्यूटी ऑफिसर (जीडीओ) के सभी लाभ देने और आईजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कॉलेज में जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग खोलने की घोषणा की। 

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Himachal: Doctors serving as trainees will also be eligible for PG studies; they will receive GDO  benefits
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त चिकित्सा अधिकारियों और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के साथ संवाद किया। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में जॉब ट्रेनी चिकित्सा अधिकारियों को अब स्नातकोत्तर (पीजी) करने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए प्रदेश सरकार पीजी/सुपर स्पेशलिटी (एसएस) नीति में आवश्यक संशोधन करेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में निर्देश दिए। साथ ही जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को नियुक्ति की तिथि से जनरल ड्यूटी ऑफिसर (जीडीओ) के सभी लाभ देने और आईजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कॉलेज में जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग खोलने की घोषणा की। सरकार जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को नियमितीकरण के लिए दोबारा परीक्षा देने से छूट देने पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

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मुख्यमंत्री ने यहां नवनियुक्त चिकित्सा अधिकारियों और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के साथ संवाद के दौरान स्वास्थ्य विभाग को पीजी/एसएस नीति के प्रावधानों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। संशोधित व्यवस्था के तहत जॉब ट्रेनी चिकित्सा अधिकारी इन-सर्विस जनरल ड्यूटी ऑफिसर के लिए आरक्षित 66.6 प्रतिशत कोटे में पीजी (एमडी/एमएस) और पीजी (एमडीएस) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर पढ़ाई कर सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें अपनी नियुक्ति अवधि की शेष अवधि जॉब ट्रेनी के रूप में सेवाएं देनी होंगी। पढ़ाई के दौरान वेतन और अन्य लाभ देने के लिए भी उचित प्रावधान किए जाएंगे।

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मुख्यमंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स नई दिल्ली से पीजी करने वाले चिकित्सकों को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट के रिक्त पदों पर नियुक्त करने के लिए भी प्रावधान करने को कहा। ये नियुक्तियां सीधे भर्ती वाले अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित 33.33 प्रतिशत कोटे के तहत होंगी। चयन एमबीबीएस और स्नातकोत्तर परीक्षाओं में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए लिखित परीक्षा या साक्षात्कार नहीं होगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 35 प्रतिशत कर्मचारी कार्यरत थे। अब यह संख्या बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार कर रही है। इस अवसर पर विधायक संजय अवस्थी, सचिव स्वास्थ्य आशीष सिंहमार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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बुजुर्गों के उपचार के लिए अलग विभाग
शिमला। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग स्थापित किए जाएंगे। इन विभागों में बुजुर्ग मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चार चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से परिचित करवाने के लिए विदेशों में एक्सपोजर विजिट पर भी भेजा जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतर चिकित्सा तकनीकों को प्रदेश में अपनाया जा सके।

पुरानी मशीन ने रिपोर्ट में शुगर 177 दिखाई, मुझे कभी शुगर की बीमारी नहीं रही : सीएम
- सीएम सुक्खू ने बुधवार को राज्य सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही पुरानी जांच मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि एक सरकारी अस्पताल में रूटीन चेकअप के दौरान पुरानी मशीन ने उनकी रिपोर्ट में शुगर 177 दिखाई, जबकि उन्हें कभी शुगर की बीमारी नहीं रही।

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