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हिमाचल: फरवरी 2027 से शुरू होगा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन, नालागढ़ में तैयार हो रहा प्रदेश का पहला प्लांट
Mon, 05 Oct 2026 09:49 AM IST
Ankesh Dogra
अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 05 Oct 2026 09:49 AM IST
जलविद्युत उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश अब ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रहा है। सोलन जिले के नालागढ़ के दभोटा में करीब 9.04 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला एक मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। प्लांट का निर्माण अंतिम चरण में है और फरवरी 2027 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन 423 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
जलविद्युत उत्पादन के लिए पहचान रखने वाला हिमाचल प्रदेश अब ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाने जा रहा है। सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के दभोटा में स्थापित किया जा रहा राज्य का पहला एक मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र फरवरी 2027 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर सकता है। संयंत्र का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है और हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) ने उत्पादित होने वाली ग्रीन हाइड्रोजन के संभावित खरीदारों से संपर्क शुरू कर दिया है।
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एचपीपीसीएल और ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से करीब 9.04 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना विकसित की जा रही है। इसके लिए दभोटा में 4,000 वर्गमीटर भूमि चिह्नित की गई है। संयंत्र में अक्षय ऊर्जा से प्राप्त बिजली का इस्तेमाल इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जाएगा। प्रक्रिया में क्षारीय पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड घोल का इलेक्ट्रोलाइट के रूप में इस्तेमाल होगा।
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परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 423 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन है। इस हिसाब से सालाना करीब 1,54,395 किलोग्राम यानी 154.4 टन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। एक किलोग्राम हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए करीब 13 लीटर पानी की जरूरत होगी। पानी की आपूर्ति भूमिगत स्रोतों से ट्यूबवेल के माध्यम से की जाएगी।परियोजना के अनुसार एक किलोग्राम हाइड्रोजन तैयार करने में करीब 52.01 यूनिट बिजली की खपत होगी। 423 किलोग्राम प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के अनुसार संयंत्र को रोजाना करीब 22 हजार यूनिट बिजली की जरूरत पड़ेगी। सालाना आधार पर बिजली की खपत करीब 80.35 लाख यूनिट रहने का अनुमान है।
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एचपीपीसीएल अधिकारियों के अनुसार संयंत्र में मशीनरी और तकनीकी उपकरणों की स्थापना लगभग पूरी हो चुकी है। अब परीक्षण और कमीशनिंग की प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके बाद फरवरी 2027 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल औद्योगिक ईंधन, रसायन, उर्वरक और परिवहन क्षेत्र में किया जा सकता है।
ऊना में 140 करोड़ की ग्रीन अमोनिया परियोजना का प्रस्ताव
ऊना में करीब 140 करोड़ रुपये के निवेश से ग्रीन अमोनिया परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव है। इसे से 2029 तक विकसित करने की योजना है। वहीं, चंबा में एनएचपीसी की ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें सौर ऊर्जा से प्रतिदिन करीब 20 किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन और 300 किलोवाट से अधिक क्षमता के सौर संयंत्र का प्रावधान है।
ऊना में करीब 140 करोड़ रुपये के निवेश से ग्रीन अमोनिया परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव है। इसे से 2029 तक विकसित करने की योजना है। वहीं, चंबा में एनएचपीसी की ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें सौर ऊर्जा से प्रतिदिन करीब 20 किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन और 300 किलोवाट से अधिक क्षमता के सौर संयंत्र का प्रावधान है।