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स्वास्थ्य: हिमाचल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर होगी पहचान, नौ और 27 तारीख को लगेंगे विशेष जांच कैंप
Thu, 27 Aug 2026 09:48 AM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 27 Aug 2026 09:48 AM IST
हिमाचल प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जटिलताओं से बचाने के लिए पीएमएसएमए के तहत विशेष जांच कैंप लगाए जाएंगे। हर महीने 9 और 27 तारीख को अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क जांच होगी। ब्लड प्रेशर, वजन और हीमोग्लोबिन समेत जरूरी टेस्ट किए जाएंगे। एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी समस्याओं की समय पर पहचान कर उपचार उपलब्ध करवाया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जटिलताओं से बचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच व्यवस्था को मजबूत किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे।
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इन विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन हर महीने 9 और 27 तारीख को किया जाएगा। प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्षेत्रीय अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की शुरुआती स्तर पर पहचान कर समय रहते उपचार उपलब्ध करवाना है। यदि कोई गर्भवती महिला 9 तारीख को जांच नहीं करवा पाती है तो वह 27 तारीख को आयोजित होने वाले कैंप में स्वास्थ्य जांच करवा सकती है। इस व्यवस्था से ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं तक प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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मुफ्त में होंगे जरूरी स्वास्थ्य टेस्ट
पीएमएसएमए के तहत आयोजित होने वाले कैंप में गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाएगी। इस दौरान ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन सहित विभिन्न आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाएंगी। जांच के माध्यम से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, जेस्टेशनल डायबिटीज और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य संभावित जटिलताओं का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।
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किसी महिला में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के संकेत मिलने पर उसे आवश्यक उपचार और आगे की चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध करवाई जाएगी। जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां भी दी जाएंगी।
छह साल में छह गुना से ज्यादा बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में जांच के दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की पहचान में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में 2,496 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले सामने आए थे। इसके बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया और वर्ष 2025-26 में 15,320 तक पहुंच गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मामलों की संख्या बढ़ना जांच व्यवस्था के अधिक प्रभावी होने का भी संकेत है। ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग होने से गर्भावस्था में जोखिम की स्थिति का पहले पता लगाया जा रहा है, जिससे समय पर उपचार और निगरानी संभव हो रही है।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के आंकड़े
| वर्ष | सामने आए मामले |
|---|---|
| 2020-21 | 2,496 |
| 2021-22 | 4,020 |
| 2022-23 | 6,399 |
| 2023-24 | 8,054 |
| 2024-25 | 12,623 |
| 2025-26 | 15,320 |
समय पर पहचान से सुरक्षित प्रसव पर जोर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर के अनुसार पीएमएसएमए के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान के लिए जांच प्रक्रिया को तेज किया गया है। हर महीने 9 और 27 तारीख को अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच की जा रही है। जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान के बाद आवश्यक उपचार और निगरानी के माध्यम से सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर के अनुसार पीएमएसएमए के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान के लिए जांच प्रक्रिया को तेज किया गया है। हर महीने 9 और 27 तारीख को अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच की जा रही है। जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान के बाद आवश्यक उपचार और निगरानी के माध्यम से सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।