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हिमाचल: हिमुडा में वरिष्ठता विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, सीईओ पद की नियुक्ति रद्द; दो हफ्ते में पात्र अधिकारी चुनें

Fri, 04 Sep 2026 03:33 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 04 Sep 2026 03:33 PM IST
सार
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HIMUDA CEO Dispute: हिमुडा के सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को नियमों के विपरीत मानते हुए अधिसूचना रद्द कर दी। अदालत ने दो सप्ताह में पात्र अधिकारियों पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारी अंजोरी कपूर को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

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himuda ceo appointment cancelled himachal high court seniority dispute
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमुडा में नियमों को दरकिनार कर दी गई पदोन्नति और नियुक्ति पर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने हिमुडा के सर्वोच्च पद सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव) पद से सम्बंधी 27 मई 2025 की अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए नियुक्ति को गैर-कानूनी ठहराकर रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और हिमुडा को निर्देश दिया है कि वे आर एंड पी नियम, 2012 के भर्ती नियमों के मुताबिक सीईओ कम सेक्रेटरी के पद पर दो सप्ताह के भीतर केवल पात्र अधिकारियों के मामलों पर विचार किया जाए और याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर को भी विचार में शामिल किया जाए।

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न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार की ओर से इस पद पर रहते हुए अब तक प्राप्त किए गए वित्तीय लाभों को उनसे वापस न लेने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने जूनियर एवं अपात्र अधिकारी को सीईओ बना दिया था और वरिष्ठ अंजोरी कपूर के लिए एडवाइजर की नई पोस्ट क्रिएट की थी। अंजोरी कपूर ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ दोनों हिमुडा में कार्यरत हैं। सेवा रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता, प्रतिवादी से वरिष्ठ हैं।9 दिसंबर 2022 को याचिकाकर्ता को हिमुडा के एकमात्र नियमित कैडर पद पर मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के रूप में पदोन्नत किया गया था। इसके पश्चात, प्रतिवादी (जो उस समय अधीक्षण अभियंता थे)के पद को केवल उनके व्यक्तिगत स्तर पर अपग्रेड करके मुख्य अभियंता का दर्जा दे दिया गया, जिसे पद खाली होने पर स्वतः डाउनग्रेड होना था। मई 2025 में हिमुडा के पुनर्गठन का हवाला देते हुए वरिष्ठ अधिकारी (अंजोरी कपूर) को सलाहकार (नीति एवं रणनीति) के पद पर री-डेजिग्नेट कर दिया गया, जबकि कनिष्ठ अधिकारी प्रतिवादी को हिमुडा के सर्वोच्च पद सीईओ -कम- सेक्रेटरी पर नियुक्त कर दिया गया।

अदालत ने कहा कि मुख्य अभियंता का कैडर केवल एक ही नियमित पद का है। किसी अधिकारी के पद को व्यक्तिगत उपाय के रूप में अपग्रेड करने से नया नियमित पद सृजित नहीं होता। अदालत में सरकार को बड़ा झटका देते हुए कहा कि प्रतिवादी की पदोन्नति को नियमित कैडर पद के समकक्ष नहीं माना जा सकता।

अधिकारी-सह-सचिव के पद के लिए निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2012 के तहत शर्तों को पूरा नहीं करते थे। अतः उनकी नियुक्ति अवैध और नियमों के विपरीत है।प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रस्ताव एक ही दिन में बदलकर इस प्रकार तैयार किया गया जिससे कनिष्ठ अधिकारी को अनुचित लाभ मिले और वरिष्ठ अधिकारी को उनके अधिकार से वंचित किया जा सके।
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