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Shimla News: जिले के 388 प्राथमिक स्कूलों में एक-एक शिक्षक, कैसे जलेगी शिक्षा की लौ

Thu, 20 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:59 PM IST
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One teacher in each of the 388 primary schools in the district, how will the flame of education be lit?
जिले के 388 प्राथमिक स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
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एक शिक्षक के सहारे चल रहे स्कूलों में ज्यादातर दुर्गम क्षेत्रों के स्कूल, जिले में कुल 1345 प्राथमिक स्कूल
अनिल पंवार
शिमला। जिले में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति काफी चिंताजनक है। जिले के 1,345 प्राथमिक स्कूलों में से 388 स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इन स्कूलों में एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई संभालनी पड़ रही है। इनमें ज्यादातर स्कूल ग्रामीण, दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित हैं। लोगों का कहना है कि यही कारण है कि अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूलों की जगह निजी स्कूलों में शिफ्ट कर रहे हैं।

विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 21 शिक्षा खंड हैं। इन सभी शिक्षा खंडों में करीब 1,345 प्राथमिक सरकारी स्कूल हैं। इनमें से करीब 28.8 प्रतिशत स्कूल एक अध्यापक के सहारे चल रहे हैं। इसके साथ ही एक कक्षा में भी अलग-अलग विषय शामिल हैं। प्रदेश में सरकार और शिक्षा विभाग गुणात्मक शिक्षा पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक शिक्षक इन स्कूलों में छात्रों को विषयवार और कक्षा के अनुसार कितना समय दे पा रहा होगा। प्राथमिक शिक्षा को किसी भी छात्र की बुनियादी शिक्षा, भाषा, गणित और सीखने की नींव माना जाता है। ऐसे में इन स्कूलों में विद्यार्थियों की नींव कितनी मजबूत हो रही होगी, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। वहीं सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन एकल शिक्षक वाले स्कूलों में इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना किसी चुनौती से कम नहीं है। एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं, अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों और विषयों को संभालना पड़ रहा है। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त तैयारी और अभ्यास करना भी चुनौती है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की तैनाती के संतुलन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के 388 प्राथमिक स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में समस्या सिर्फ कक्षाओं को संभालने तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को विभागीय स्तर पर दिए जाने वाले विभिन्न कार्य, कई तरह के रिकॉर्ड तैयार करना, ऑनलाइन डेटा अपडेट करना, सर्वे, बैठकों और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। इसके कारण भी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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कोट
शिक्षा विभाग में नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नए भर्ती हुए शिक्षकों की नियुक्तियां मिलनी बाकी है। नए शिक्षकों को स्कूलों में आवश्यकता अनुसार तैनाती की जाएगी। सिंगल टीचर स्कूलों में प्राथमिकता दी जाएगी।
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-निशा भलूनी, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा शिमला
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