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हिमाचल: पांगी का जैविक सेब कश्मीरी और विदेशी सेब को देगा टक्कर, 'पांगी सेब' ब्रांड से अक्टूबर में होगी एंट्री
Thu, 24 Sep 2026 10:13 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 24 Sep 2026 10:13 AM IST
Pangi Organic Apple: चंबा के पांगी क्षेत्र के प्राकृतिक तरीके से उत्पादित सेब को अब अलग ब्रांड पहचान देने की तैयारी है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में करीब 5,000 कार्टन ‘पांगी सेब’ नाम से बाजार में उतारे जाएंगे। विशेष कार्टन तैयार हो चुके हैं और बागवानों को इन्हें 50 फीसदी तक सब्सिडी पर उपलब्ध करवाने की तैयारी है। पांगी को प्राकृतिक खेती क्षेत्र घोषित किए जाने के कारण यहां के सेब को अलग पहचान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
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इन पेटियों में पैक होगा सेब।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पांगी क्षेत्र में तैयार होने वाला प्राकृतिक तरीके से उत्पादित सेब अब अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी में है। पांगी के सेब को जल्द ही ‘पांगी सेब’ ब्रांड नाम से बाजार में उतारा जाएगा। अक्टूबर के पहले सप्ताह में इसकी बाजार में एंट्री होने की तैयारी है। पहले चरण में करीब 5,000 कार्टन ‘पांगी सेब’ के नाम से बाजार में उतारे जाएंगे। इसके लिए विशेष कार्टन की छपाई भी पूरी हो चुकी है। बागवानों को ये कार्टन 50 फीसदी तक सब्सिडी पर उपलब्ध करवाने की तैयारी की जा रही है।
प्राकृतिक तरीके से तैयार सेब को मिलेगी अलग पहचान
पांगी उपमंडल को पूरी तरह प्राकृतिक खेती के लिए घोषित किया जा चुका है। यहां रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के साथ-साथ इनके परिवहन पर भी प्रतिबंध है। ऐसे में यहां प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले सेब को अलग ब्रांड पहचान देने की तैयारी की जा रही है। करीब 8,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले पांगी के सेब को इसकी प्राकृतिक उत्पादन प्रक्रिया के कारण बाजार में अलग पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। सचिव बागवानी सी पाल रासु के अनुसार, पांगी के एसडीएम अमनदीप सिंह ने इस संबंध में प्रस्ताव दिया है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में ‘पांगी सेब’ को ब्रांड के तौर पर बाजार में उतारने की तैयारी है।
पहले चरण में 5 हजार कार्टन
इस वर्ष शुरुआत सीमित स्तर पर की जा रही है। पहले चरण में करीब 5,000 कार्टन बाजार में भेजे जाएंगे। इसके बाद मांग और उत्पादन के आधार पर ब्रांड को आगे बढ़ाने की योजना है। बागवानों को विशेष कार्टन उपलब्ध करवाने के साथ सेब उत्पादन से जुड़ी आवश्यक सहायता और उपदान उपलब्ध करवाने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इन कार्टन को जल्द लॉन्च करेंगे।
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अभी पांगी में सीमित है सेब उत्पादन
पांगी में सेब का उत्पादन फिलहाल सीमित है। पिछले कुछ वर्षों में यहां नए बगीचे विकसित किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई अभी पूरी तरह फल उत्पादन की अवस्था में नहीं पहुंचे हैं। पुराने बगीचों में भी उत्पादन सीमित है। आने वाले वर्षों में पांगी में सेब का रकबा और उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्र के बागवानों के लिए ब्रांडिंग को बाजार से बेहतर जुड़ाव का माध्यम माना जा रहा है।
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प्राकृतिक तरीके से तैयार सेब को मिलेगी अलग पहचान
पांगी उपमंडल को पूरी तरह प्राकृतिक खेती के लिए घोषित किया जा चुका है। यहां रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के साथ-साथ इनके परिवहन पर भी प्रतिबंध है। ऐसे में यहां प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले सेब को अलग ब्रांड पहचान देने की तैयारी की जा रही है। करीब 8,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले पांगी के सेब को इसकी प्राकृतिक उत्पादन प्रक्रिया के कारण बाजार में अलग पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। सचिव बागवानी सी पाल रासु के अनुसार, पांगी के एसडीएम अमनदीप सिंह ने इस संबंध में प्रस्ताव दिया है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में ‘पांगी सेब’ को ब्रांड के तौर पर बाजार में उतारने की तैयारी है।
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पहले चरण में 5 हजार कार्टन
इस वर्ष शुरुआत सीमित स्तर पर की जा रही है। पहले चरण में करीब 5,000 कार्टन बाजार में भेजे जाएंगे। इसके बाद मांग और उत्पादन के आधार पर ब्रांड को आगे बढ़ाने की योजना है। बागवानों को विशेष कार्टन उपलब्ध करवाने के साथ सेब उत्पादन से जुड़ी आवश्यक सहायता और उपदान उपलब्ध करवाने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इन कार्टन को जल्द लॉन्च करेंगे।
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अभी पांगी में सीमित है सेब उत्पादन
पांगी में सेब का उत्पादन फिलहाल सीमित है। पिछले कुछ वर्षों में यहां नए बगीचे विकसित किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई अभी पूरी तरह फल उत्पादन की अवस्था में नहीं पहुंचे हैं। पुराने बगीचों में भी उत्पादन सीमित है। आने वाले वर्षों में पांगी में सेब का रकबा और उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्र के बागवानों के लिए ब्रांडिंग को बाजार से बेहतर जुड़ाव का माध्यम माना जा रहा है।
इस साल हिमाचल में सेब की आवक 40 से 50 फीसदी कम
प्रदेश की मंडियों में इस बार सेब की आवक पिछले वर्ष की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक कम बताई गई है। प्रतिकूल मौसम का असर सेब उत्पादन पर पड़ा है। अब तक राज्य की मंडियों में करीब एक करोड़ कार्टन सेब पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा लगभग दोगुना था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब की तुड़ान जारी है, इसलिए अंतिम उत्पादन का आंकड़ा बाद में स्पष्ट होगा। हिमाचल प्रदेश में सेब का कुल रकबा करीब 1.16 लाख हेक्टेयर है। हालांकि इसमें पांगी का हिस्सा फिलहाल बहुत कम है।
किन्नौर के सेब जैसा स्वाद
पांगी क्षेत्र के सेब को स्वाद के लिहाज से किन्नौर के सेब जैसा बताया जाता है। ऐसे में प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले इस सेब को अलग ब्रांड के तौर पर बाजार में पेश करने की कोशिश की जा रही है। 'पांगी सेब' की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब मंडियों में कश्मीर के सेब के साथ विदेशी सेब की भी अच्छी मौजूदगी है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ने के साथ पांगी के सेब को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाने की उम्मीद है।
प्रदेश की मंडियों में इस बार सेब की आवक पिछले वर्ष की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक कम बताई गई है। प्रतिकूल मौसम का असर सेब उत्पादन पर पड़ा है। अब तक राज्य की मंडियों में करीब एक करोड़ कार्टन सेब पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा लगभग दोगुना था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब की तुड़ान जारी है, इसलिए अंतिम उत्पादन का आंकड़ा बाद में स्पष्ट होगा। हिमाचल प्रदेश में सेब का कुल रकबा करीब 1.16 लाख हेक्टेयर है। हालांकि इसमें पांगी का हिस्सा फिलहाल बहुत कम है।
किन्नौर के सेब जैसा स्वाद
पांगी क्षेत्र के सेब को स्वाद के लिहाज से किन्नौर के सेब जैसा बताया जाता है। ऐसे में प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले इस सेब को अलग ब्रांड के तौर पर बाजार में पेश करने की कोशिश की जा रही है। 'पांगी सेब' की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब मंडियों में कश्मीर के सेब के साथ विदेशी सेब की भी अच्छी मौजूदगी है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ने के साथ पांगी के सेब को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाने की उम्मीद है।