{"_id":"6ab0cdc512277ca77a0a4144","slug":"pmgsy-road-quality-rules-10-percent-concrete-section-fail-2026-09-21","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल प्रदेश: पीएमजीएसवाई सड़कों की गुणवत्ता जांच बदली, 10 फीसदी हिस्सा खराब मिला तो पूरी सड़क होगी फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल प्रदेश: पीएमजीएसवाई सड़कों की गुणवत्ता जांच बदली, 10 फीसदी हिस्सा खराब मिला तो पूरी सड़क होगी फेल
Mon, 21 Sep 2026 11:56 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:56 AM IST
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता जांच के नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था उन सड़कों पर लागू होगी, जिनमें सीमेंट कंक्रीट का हिस्सा भी शामिल है। यदि सड़क की कुल लंबाई में सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से की हिस्सेदारी 10 फीसदी या उससे अधिक है और गुणवत्ता जांच में यह हिस्सा असंतोषजनक पाया जाता है, तो पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता ग्रेडिंग भी असंतोषजनक मानी जाएगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए नियम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जाने वाली ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता जांच को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है। अब सड़क के किसी महत्वपूर्ण सीमेंट कंक्रीट हिस्से में मिली खराब गुणवत्ता का असर पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता ग्रेडिंग पर पड़ेगा।
विज्ञापन
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नियुक्त मुख्य अभियंता को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
10 फीसदी हिस्सा खराब तो पूरी सड़क की गुणवत्ता असंतोषजनक
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से को लेकर है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की किसी सड़क की कुल लंबाई में यदि सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से की हिस्सेदारी 10 फीसदी या उससे अधिक है और गुणवत्ता जांच के दौरान यह हिस्सा असंतोषजनक पाया जाता है, तो पूरी सड़क की गुणवत्ता को भी असंतोषजनक माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि सड़क का अधिकांश हिस्सा यदि ठीक भी पाया जाता है, लेकिन उसमें शामिल महत्वपूर्ण सीमेंट कंक्रीट हिस्से में गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामी मिलती है, तो अंतिम गुणवत्ता जांच में पूरी सड़क को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। नई व्यवस्था से सीमेंट कंक्रीट से बनाए गए हिस्सों की गुणवत्ता को अलग से महत्व मिलेगा और इन्हें पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता जांच से अलग नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन
तारकोल और सीमेंट कंक्रीट दोनों से बन सकती हैं सड़कें
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को मुख्य सड़कों, बाजारों और दूसरे संपर्क मार्गों से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कें बनाई जाती हैं। इन सड़कों में आवश्यकता के अनुसार तारकोल, सीमेंट कंक्रीट या दोनों का मिश्रित इस्तेमाल किया जा सकता है। नया नियम खास तौर पर उन सड़कों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें सीमेंट कंक्रीट का हिस्सा भी शामिल है। यदि यह हिस्सा सड़क की कुल लंबाई का 10 फीसदी या उससे अधिक है, तो इसकी गुणवत्ता अब पूरी सड़क की अंतिम ग्रेडिंग को प्रभावित करेगी।
गुणवत्ता जांच में एकरूपता लाने का प्रयास
राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी के अनुसार संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य सड़क निर्माण इकाइयों और स्वतंत्र गुणवत्ता निगरानी अधिकारियों की ओर से अपनाई जाने वाली गुणवत्ता जांच व्यवस्था में एकरूपता लाना है। सड़क निर्माण इकाइयां गुणवत्ता दर्ज करने के लिए गुणवत्ता प्रथम ऐप का इस्तेमाल करती हैं, जबकि स्वतंत्र गुणवत्ता निगरानी अधिकारी गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ऐप के माध्यम से अपनी रिपोर्ट दर्ज करते हैं। नई व्यवस्था के बाद सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से की गुणवत्ता को लेकर दोनों स्तरों की जांच में समान मानदंड अपनाने पर जोर रहेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब सड़क के किसी महत्वपूर्ण कंक्रीट हिस्से में पाई गई खराब गुणवत्ता को पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता ग्रेडिंग से अलग नहीं रखा जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को मुख्य सड़कों, बाजारों और दूसरे संपर्क मार्गों से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कें बनाई जाती हैं। इन सड़कों में आवश्यकता के अनुसार तारकोल, सीमेंट कंक्रीट या दोनों का मिश्रित इस्तेमाल किया जा सकता है। नया नियम खास तौर पर उन सड़कों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें सीमेंट कंक्रीट का हिस्सा भी शामिल है। यदि यह हिस्सा सड़क की कुल लंबाई का 10 फीसदी या उससे अधिक है, तो इसकी गुणवत्ता अब पूरी सड़क की अंतिम ग्रेडिंग को प्रभावित करेगी।
गुणवत्ता जांच में एकरूपता लाने का प्रयास
राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी के अनुसार संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य सड़क निर्माण इकाइयों और स्वतंत्र गुणवत्ता निगरानी अधिकारियों की ओर से अपनाई जाने वाली गुणवत्ता जांच व्यवस्था में एकरूपता लाना है। सड़क निर्माण इकाइयां गुणवत्ता दर्ज करने के लिए गुणवत्ता प्रथम ऐप का इस्तेमाल करती हैं, जबकि स्वतंत्र गुणवत्ता निगरानी अधिकारी गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ऐप के माध्यम से अपनी रिपोर्ट दर्ज करते हैं। नई व्यवस्था के बाद सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से की गुणवत्ता को लेकर दोनों स्तरों की जांच में समान मानदंड अपनाने पर जोर रहेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब सड़क के किसी महत्वपूर्ण कंक्रीट हिस्से में पाई गई खराब गुणवत्ता को पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता ग्रेडिंग से अलग नहीं रखा जा सकेगा।