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निगरानी: सांसदों-विधायकों के पत्र अब फाइलों में नहीं दबा सकेंगे अफसर, PMO की सीधी निगरानी में होंगे VIP संदर्भ
Mon, 14 Sep 2026 11:45 AM IST
Ankesh Dogra
अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:45 AM IST
हिमाचल प्रदेश में सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों को महीनों तक लंबित रखना अब आसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने वीआईपी लेटर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है। इसके तहत जनप्रतिनिधियों के संदर्भों की ऑनलाइन निगरानी होगी और विभागों को कार्रवाई रिपोर्ट व स्टेटस अपडेट पोर्टल पर अपलोड करना होगा। प्रदेश में यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से लागू कर दी गई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों को महीनों तक फाइलों में दबाकर रखने वाले विभागों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने वीआईपी संदर्भों के निपटारे में देरी पर लगाम कसने के लिए वीआईपी लेटर मैनेजमेंट सिस्टम (वीएलएमएस) लागू कर दिया है।
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इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए हर मामले की निगरानी सीधे पीएमओ स्तर तक होगी और विभागों को समयबद्ध जवाब देना अनिवार्य होगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी इस प्रणाली को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, मंडलायुक्तों और बोर्ड-निगमों को पीएम-आरईएफ पोर्टल के माध्यम से वीआईपी मामलों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग करने को कहा गया है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। अब तक जनप्रतिनिधियों के पत्र विभिन्न स्तरों पर लंबित रहते थे और उनकी स्थिति जानना आसान नहीं होता था। नई व्यवस्था में हर संदर्भ को एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है।
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संबंधित विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी और किसी भी देरी की स्थिति में सिस्टम स्वतः रिमाइंडर और अलर्ट जारी करेगा। इससे फाइलों की गति बढ़ने और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। इस नई व्यवस्था के बाद सांसदों और विधायकों की ओर से उठाए गए जनहित के मामलों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। हर मामले की प्रगति पीएमओ के रिकॉर्ड में दर्ज होगी, जिससे अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा।
उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त सचिव सुभाषीश पांडा की ओर से मुख्य सचिव केके पंत को भेजे गए पत्र के आधार पर हिमाचल में यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से प्रभावी कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत वीआईपी पत्र सीधे संबंधित मंत्रालय, विभाग या राज्य सरकार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाएंगे। विभागों को अपने जवाब, कार्रवाई रिपोर्ट और स्टेटस अपडेट भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इससे प्रत्येक मामले की रियल-टाइम मॉनीटरिंग संभव होगी।
चिट्ठियों पर कार्रवाई न होने का सांसद उठाते रहे हैं मामला : प्रदेश सरकार को भेजी गई चिट्ठियों पर कार्रवाई न होने का सांसद आरोप लगाते रहे हैं। बीते दिनों ही मंडी में दिशा की बैठक में सांसद कंगना रणौत और धर्मशाला में सांसद राजीव भारद्वाज ने यह मामला उठाया था। सांसद अनुराग ठाकुर और सुरेश कश्यप भी इसको लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमलावर रहते हैं। भाजपा सांसद राज्य सरकार और विभिन्न विभागों पर उनके पत्रों और जनहित से जुड़े मामलों को नजरअंदाज करने के आरोप लगाते रहे हैं।
चिट्ठियों पर कार्रवाई न होने का सांसद उठाते रहे हैं मामला : प्रदेश सरकार को भेजी गई चिट्ठियों पर कार्रवाई न होने का सांसद आरोप लगाते रहे हैं। बीते दिनों ही मंडी में दिशा की बैठक में सांसद कंगना रणौत और धर्मशाला में सांसद राजीव भारद्वाज ने यह मामला उठाया था। सांसद अनुराग ठाकुर और सुरेश कश्यप भी इसको लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमलावर रहते हैं। भाजपा सांसद राज्य सरकार और विभिन्न विभागों पर उनके पत्रों और जनहित से जुड़े मामलों को नजरअंदाज करने के आरोप लगाते रहे हैं।