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हिमाचल: शराब पीकर गाड़ी चलाने पर कानून बेअसर? शिमला शहर में हुए 60 फीसदी चालान, नौ महीने में 2125 केस
Mon, 05 Oct 2026 10:23 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 05 Oct 2026 10:23 AM IST
शिमला जिले में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद नियम तोड़ने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। 15 सितंबर तक जिले में 2125 चालान किए गए, जिनमें करीब 60 फीसदी चालान शिमला शहर में हुए। पुलिस रात में नाकाबंदी और ब्रेथ एनालाइजर के जरिए जांच कर रही है। शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश भी की जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई के लिए सख्त कानून और पुलिस के लगातार अभियान के बावजूद शिमला में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। जिला शिमला में इस साल 15 सितंबर तक शराब पीकर वाहन चलाने वाले 2125 चालकों के चालान किए जा चुके हैं। इनमें करीब 60 फीसदी चालान शिमला शहर में हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहर में शराब पीकर वाहन चलाने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि शिमला शहर में नियमित जांच और अधिक पुलिस कार्रवाई के कारण यहां मामलों की संख्या ज्यादा सामने आ सकती है।
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2125 चालान, लाइसेंस सस्पेंड करने की सिफारिश
जिला पुलिस के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की टीमें खासकर रात के समय विभिन्न स्थानों पर नाकाबंदी कर ब्रेथ एनालाइजर से चालकों की जांच करती हैं। 15 सितंबर तक पुलिस ने जिले में कुल 2125 चालान किए हैं। कार्रवाई के साथ ऐसे वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश संबंधित आरएलए को भी भेजी गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार कुल मामलों में करीब 60 फीसदी चालान शिमला शहर में हुए। इसके बाद रामपुर और झाकड़ी में शराब पीकर वाहन चलाने के मामले अधिक सामने आए हैं।
जिला पुलिस के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की टीमें खासकर रात के समय विभिन्न स्थानों पर नाकाबंदी कर ब्रेथ एनालाइजर से चालकों की जांच करती हैं। 15 सितंबर तक पुलिस ने जिले में कुल 2125 चालान किए हैं। कार्रवाई के साथ ऐसे वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश संबंधित आरएलए को भी भेजी गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार कुल मामलों में करीब 60 फीसदी चालान शिमला शहर में हुए। इसके बाद रामपुर और झाकड़ी में शराब पीकर वाहन चलाने के मामले अधिक सामने आए हैं।
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रात में ज्यादा रहती है पुलिस की नजर
शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस रात के समय विशेष नाकाबंदी करती है। इस दौरान संदिग्ध वाहन चालकों को रोककर एल्कोमीटर से जांच की जाती है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित रूप से कार्रवाई कर रही है। रात के समय भी नाकाबंदी करके चालकों की जांच की जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शराब पीने के बाद वाहन न चलाएं। नशे में वाहन चलाना खुद चालक के साथ-साथ सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस रात के समय विशेष नाकाबंदी करती है। इस दौरान संदिग्ध वाहन चालकों को रोककर एल्कोमीटर से जांच की जाती है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित रूप से कार्रवाई कर रही है। रात के समय भी नाकाबंदी करके चालकों की जांच की जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शराब पीने के बाद वाहन न चलाएं। नशे में वाहन चलाना खुद चालक के साथ-साथ सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
दस हजार रुपये तक जुर्माना और सजा का प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम के तहत शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाना दंडनीय है। ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ कारावास का भी प्रावधान है। लगातार उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी पुलिस अधीक्षकों को कार्रवाई के लिए एल्कोसेंसर उपलब्ध करवाए गए हैं। शराब के नशे में पुलिस कर्मियों से दुर्व्यवहार या विवाद करने वाले व्यक्ति का मेडिकल करवाकर नियमानुसार मामला दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। शहर में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि केवल सख्त कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों में जिम्मेदारी और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाना दंडनीय है। ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ कारावास का भी प्रावधान है। लगातार उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी पुलिस अधीक्षकों को कार्रवाई के लिए एल्कोसेंसर उपलब्ध करवाए गए हैं। शराब के नशे में पुलिस कर्मियों से दुर्व्यवहार या विवाद करने वाले व्यक्ति का मेडिकल करवाकर नियमानुसार मामला दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। शहर में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि केवल सख्त कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों में जिम्मेदारी और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।